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बाराबंकी के स्कूल में मातम: प्रार्थना के बाद 18 छात्राएं बेहोश, भीषण गर्मी ने खोली स्कूल मैनेजमेंट की पोल

बाराबंकी के स्कूल में मातम: प्रार्थना के बाद 18 छात्राएं बेहोश, भीषण गर्मी ने खोली स्कूल मैनेजमेंट की पोल

बाराबंकी में खौफनाक सुबह: प्रार्थना के बाद क्लासरूम में मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है, जिसने शिक्षा विभाग की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सतरिख स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (GGIC) में बृहस्पतिवार की सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब प्रार्थना सभा के बाद कक्षाओं में पहुंचीं 18 छात्राएं एक के बाद एक बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं। इस घटना ने न केवल अभिभावकों को दहशत में डाल दिया है, बल्कि सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के खोखले दावों की पोल भी खोल दी है।

भीषण उमस और बिजली की आंख-मिचौली बनी मुसीबत

मिली जानकारी के अनुसार, सुबह की प्रार्थना के बाद जब छात्राएं अपनी-अपनी कक्षाओं में पहुंचीं, तो वहां का माहौल नरक जैसा था। भीषण गर्मी और जानलेवा उमस के बीच स्कूल में बिजली गुल थी। कक्षाओं में वेंटिलेशन का अभाव था और 60-60 छात्राओं की भीड़ ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया। छात्राओं ने जी मिचलाने, हाथ-पैर में दर्द और सिर चकराने की शिकायत की, जिसके कुछ ही मिनटों बाद वे गश खाकर गिरने लगीं।

इन छात्राओं की बिगड़ी हालत

घटना में बेहोश होने वाली छात्राओं में मुख्य रूप से राहिला अंसारी, तेजस्विनी, लाइबा, लक्ष्मी, ज्योति, अंशु, निधि, प्रीती, पारुल, अनुष्का, कुमकुम, दिव्यांशी, शुभी, काजल, अनूसुइया, साबलीन, उन्नति और महक शामिल हैं। स्कूल प्रशासन और शिक्षकों ने तत्परता दिखाते हुए एंबुलेंस और निजी वाहनों की मदद से सभी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सतरिख में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने सभी छात्राओं को ग्लूकोज चढ़ाया और प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें खतरे से बाहर बताया।

क्यों फेल हुआ स्कूल का सिस्टम?

इस पूरी घटना के पीछे की पड़ताल करने पर जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं:

  • शो-पीस बने सोलर पैनल: कॉलेज की छत पर 2017 में लाखों रुपये की लागत से सोलर पैनल लगाए गए थे, लेकिन 7 साल बीत जाने के बाद भी वे केवल 'शो-पीस' बनकर रह गए हैं।
  • खराब जनरेटर: स्कूल में बैकअप के लिए रखा गया जनरेटर महीनों से खराब पड़ा है, जिसकी मरम्मत कराने की सुध किसी ने नहीं ली।
  • क्षमता से अधिक छात्राएं: कॉलेज में 639 छात्राएं पंजीकृत हैं, जबकि बैठने के लिए पर्याप्त हवादार कमरों का अभाव है।
"घटना की सूचना मिलते ही मैं तुरंत कॉलेज पहुंची। छात्राओं को तत्काल इलाज के लिए सीएचसी भेजा गया। कॉलेज के खराब जनरेटर और सोलर पैनल की कार्यप्रणाली की गहन जांच की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।" - गुंजिता अग्रवाल, एसडीएम सदर

प्रशासन की कार्रवाई और आगे की राह

जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) अमिता सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि कॉलेज में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए पत्राचार किया जा रहा है। सवाल यह है कि जब बिजली नहीं थी, तो बैकअप की व्यवस्था क्यों नहीं थी? उधर, औरेला के सुंदर लाल इंटर कॉलेज में भी भीषण गर्मी के कारण तीन छात्राओं के बीमार होने की खबर है, जिसे स्कूल प्रशासन ने दबाने की कोशिश की।

अभिभावकों में गहरा आक्रोश

इस घटना के बाद से अभिभावकों में अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब सरकार स्कूलों के कायाकल्प का दावा करती है, तो फिर बच्चों को ऐसी भीषण गर्मी में बिना बिजली के बैठने पर मजबूर क्यों किया जा रहा है? क्या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार किया जा रहा है?

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या बेहोश हुई सभी छात्राएं अब सुरक्षित हैं?

जी हां, सीएचसी सतरिख में उपचार के बाद सभी 18 छात्राओं की हालत सामान्य है और उन्हें घर भेज दिया गया है।

2. घटना का मुख्य कारण क्या था?

गर्मी और उमस के बीच बिजली न होना, खराब जनरेटर और सोलर पैनल का काम न करना इस घटना का मुख्य कारण रहा।

3. क्या प्रशासन ने कोई जांच कमेटी बनाई है?

एसडीएम सदर और डीआईओएस ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं, जिसमें जनरेटर और सोलर पैनल के काम न करने की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

Content Writer

अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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