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Himachal Weather: 13 सितंबर से फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, भारी बारिश का अलर्ट

Himachal Weather: 13 सितंबर से फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, भारी बारिश का अलर्ट

पहाड़ों की रानी हिमाचल प्रदेश इन दिनों अजीब से मौसम के दौर से गुजर रही है। सावन और भादों के महीने में जहां झमाझम बारिश से नदियां उफान पर रहती थीं, वहीं इस साल सितंबर के महीने में मौसम के तेवर थोड़े बदले हुए नजर आ रहे हैं। आधिकारिक तौर पर मानसून की रफ्तार भले ही थोड़ी धीमी पड़ी हो, लेकिन बादलों की आवाजाही और रुक-रुक कर होने वाली बारिश ने आम जनजीवन को राहत कम और मुश्किलें ज्यादा दी हैं। मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों और चेतावनियों के मुताबिक, देवभूमि में राहत का यह दौर ज्यादा लंबा नहीं टिकने वाला है। आने वाले कुछ ही दिनों में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है और 13 सितंबर से प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश का नया दौर शुरू होने की पूरी संभावना है।

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला का ताजा पूर्वानुमान

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश में वर्तमान में मानसून कमजोर जरूर पड़ा है, लेकिन इसका पूरी तरह से जाना अभी बाकी है। अगले कुछ दिनों यानी 12 सितंबर तक मौसम का मिजाज लगभग ऐसा ही बना रहने का अनुमान है। इस दौरान राज्य के अधिकांश इलाकों में धूप खिलने और बीच-बीच में छिटपुट या हल्की वर्षा होने की उम्मीद है। हालांकि, यह स्थिति सिर्फ एक शांत आंधी से पहले की खामोशी जैसी है। मौसम वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि 13 सितंबर से राज्य के कई इलाकों में मध्यम से लेकर भारी दर्जे की वर्षा हो सकती है। इस संभावित बदलाव को देखते हुए प्रशासन और स्थानीय नागरिकों को एक बार फिर सतर्क होने की सलाह दी गई है, क्योंकि ढलान वाले इलाकों में भारी बारिश आफत का सबब बन सकती है।

जनोग घाट भूस्खलन: साफ मौसम में भी मंडराता खतरा

हिमाचल प्रदेश में पहाड़ी इलाकों की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां बारिश न होने पर भी खतरा टलता नहीं है। इसका ताजा उदाहरण हाल ही में शिमला जिले के ठियोग के अंतर्गत आने वाले जनोग घाट में देखने को मिला। यहां शिमला-रामपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर उस वक्त अचानक हड़कंप मच गया जब बिल्कुल साफ मौसम के बावजूद अचानक भारी भूस्खलन (Landslide) हो गया। पहाड़ से दरक कर आया भारी मलबा और चार विशाल पेड़ सीधे सड़क पर आ गिरे, जिससे व्यस्त रहने वाला यह नेशनल हाईवे पूरी तरह से ठप हो गया।

इस अचानक हुए लैंडस्लाइड के कारण सड़क के दोनों तरफ वाहनों लंबी कतारें लग गईं। स्थिति यह थी कि स्कूली बसें, जरूरी सामान ढोने वाले वाहन और सबसे महत्वपूर्ण, सेब से लदे हुए ट्रक बीच रास्ते में घंटों फंसे रहे। सेब सीजन के दौरान एनएच का बंद होना बागवानों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। गनीमत यह रही कि इस घटना में कोई बड़ा जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन प्रशासन और सड़क निर्माण से जुड़े अमले को मलबा हटाने में करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। लगातार चार घंटे की अथक मेहनत के बाद ही यातायात को सुचारू रूप से बहाल किया जा सका।

तापमान का अजीब खेल: सुबह-सवेरे ठंड, दोपहर में चुभती गर्मी

सितंबर के इस महीने में हिमाचल के मौसम का दोहरा चरित्र देखने को मिल रहा है। सुबह और शाम के समय वादियों में हल्की ठंड का अहसास होने लगा है, जो सर्दियों की आहट देता है, वहीं दिन चढ़ते ही तेज धूप लोगों को परेशान कर रही है। तापमान के आंकड़ों पर नजर डालें तो केलंग में न्यूनतम तापमान में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके बाद यह 10.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं, केलंग में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से करीब 6.3 डिग्री अधिक यानी 25.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।

इसी तरह भुंतर और कल्पा जैसे क्षेत्रों में भी दिन का पारा सामान्य से लगभग तीन डिग्री ऊपर चल रहा है। मैदानी इलाकों की बात करें तो ऊना जिला एक बार फिर सबसे गर्म बना हुआ है, जहां दिन का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को पार कर गया है। इसके विपरीत, पालमपुर और कुफरी जैसे पर्यटन स्थलों पर अधिकतम तापमान में दो से तीन डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वहां के मौसम में सुहानी ठंडक घुल गई है।

मानसून की तबाही: अब तक 1550 करोड़ से ज्यादा का नुकसान

इस साल के मानसून सीजन ने हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी और बुनियादी ढांचे को गहरी चोट पहुंचाई है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिले आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून से लेकर 8 सितंबर तक के अल्पकाल में ही कुल 1,550.19 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। कुदरत के इस भयंकर तांडव में अब तक 114 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। मौत के इन मामलों में मुख्य वजहें अचानक आई बाढ़ (Flash Floods), जानलेवा भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाएं रहीं हैं।

सड़कों के बंद होने का सिलसिला अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। पूरे प्रदेश में वर्तमान में लगभग 65 महत्वपूर्ण सड़कें यातायात के लिए पूरी तरह से बाधित हैं। इन बंद मार्गों में अकेले मंडी जिले की स्थिति सबसे खराब है, जहां 29 सड़कें अभी भी बंद पड़ी हैं। इसके अलावा कुल्लू जिले में भी 11 मुख्य मार्ग अवरुद्ध हैं। लोक निर्माण विभाग (PWD) की मशीनरी और कर्मचारी इन सड़कों को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए दिन-रात युद्धस्तर पर जुटे हुए हैं, ताकि आम जनता और पर्यटकों को आवागमन में राहत मिल सके।

सिरमौर और मंडी में बरसे बदरा

बीते 24 घंटों के दौरान राज्य के कुछ हिस्सों में बादलों ने एक बार फिर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। विशेष रूप से सिरमौर जिले के कई इलाकों में झमाझम बारिश रिकॉर्ड की गई। सिरमौर के पच्छाद क्षेत्र में सबसे अधिक 48.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि इसी जिले के धौलाकुआं में 33.5 मिलीमीटर पानी बरसा। इसके अलावा मंडी जिले के प्रसिद्ध पर्यटन और धार्मिक स्थल मुरारी देवी में 46 मिलीमीटर और शिमला के सेब बहुल क्षेत्र कोटखाई में 19.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। मंगलवार को भी राज्य के छिटपुट स्थानों पर बादलों की लुकाछिपी के बीच हल्की बौछारें गिरती रहीं।

प्रशासन और आम जनता के लिए सलाह

चूंकि मौसम विभाग ने 13 सितंबर से एक बार फिर भारी बारिश की चेतावनी जारी कर दी है, ऐसे में आने वाले दिन हिमाचल के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। विशेष रूप से ऊंचाई वाले और नदी-नालों के पास बसे इलाकों के लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। यात्रा करने से पहले सड़कों की स्थिति की जानकारी अवश्य लें और अनावश्यक रूप से भूस्खलन संभावित क्षेत्रों (Landslide Prone Areas) की तरफ जाने से बचें। सरकार और जिला प्रशासन ने भी सभी संबंधित विभागों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दे दिए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

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अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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