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भारतीय रेलवे का बड़ा कदम: 40 घंटे से लंबी यात्रा वाली 11 ट्रेनें होंगी विशेष निगरानी में

भारतीय रेलवे का बड़ा कदम: 40 घंटे से लंबी यात्रा वाली 11 ट्रेनें होंगी विशेष निगरानी में

भारतीय रेलवे ने देश की उन चुनिंदा लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए एक विशेष स्वच्छता और निगरानी अभियान की शुरुआत की है, जिनकी यात्रा का कुल समय 40 घंटे से अधिक है। कई दिनों तक लगातार पटरियों पर दौड़ने वाली इन ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को अब सफर के दौरान बेहतर हाउसकीपिंग, साफ-सुथरे शौचालय और बेहतर ऑन-बोर्ड सेवाएं मिल सकेंगी। रेलवे बोर्ड के हालिया निर्देशों के बाद, देश के विभिन्न रेलवे जोन ने इन चुनिंदा ट्रेनों पर अपनी पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है, ताकि यात्रियों का सफर और अधिक आरामदायक और सुखद बन सके।

लंबी यात्राओं में स्वच्छता सबसे बड़ी चुनौती

जब कोई ट्रेन लगातार दो से तीन दिन तक सफर करती है, तो डिब्बों की सफाई, कचरे का प्रबंधन, शौचालयों की स्थिति और छोटी-मोटी तकनीकी दिक्कतें यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन जाती हैं। अक्सर यह देखा जाता है कि ट्रेन अपने शुरुआती स्टेशन से तो पूरी तरह साफ-सुथरी निकलती है, लेकिन जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ती है, रख-रखाव के अभाव में स्थिति बिगड़ने लगती है। इसी समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए रेलवे बोर्ड ने एक नया और सख्त खाका तैयार किया है, जिसके तहत इन 11 ट्रेनों को विशेष श्रेणी में रखा गया है।

रेलवे बोर्ड द्वारा जारी किए गए आधिकारिक दिशा-निर्देशों के मुताबिक, इन ट्रेनों की केवल शुरुआती स्टेशन पर ही नहीं, बल्कि पूरे रास्तेभर (एन-रूट) कड़ी निगरानी की जाएगी। जिन जोन्स के अंतर्गत ये ट्रेनें आती हैं, उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे सफर के दौरान किसी भी स्तर पर कोताही न बरतें और नियमित अंतराल पर साफ-सफाई के स्तर की समीक्षा करते रहें।

सूची में शामिल हैं देश की सबसे लंबी दूरी तय करने वाली ट्रेनें

रेलवे की इस विशेष निगरानी सूची में उन ट्रेनों को शामिल किया गया है, जो देश के एक कोने से दूसरे कोने तक का लंबा सफर तय करती हैं। इस सूची में देश की सबसे लंबी दूरी तय करने वाली प्रतिष्ठित विवेक एक्सप्रेस (Vivek Express) सबसे ऊपर है। इसके अलावा अवध असम एक्सप्रेस (Avadh Assam Express), अमरापाली एक्सप्रेस (Amrapali Express) और झेलम एक्सप्रेस (Jhelum Express) जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनें भी इस लिस्ट का हिस्सा हैं।

आंकड़ों के नजरिए से देखें तो डिब्रूगढ़ से कन्याकुमारी के बीच चलने वाली विवेक एक्सप्रेस लगभग 4,158 किलोमीटर की सबसे लंबी दूरी तय करती है। इस ट्रेन का पूरा रैक टर्नअराउंड समय करीब 170 घंटे का होता है, जिससे यह साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस पर विशेष ध्यान देना कितना आवश्यक है।

नई व्यवस्था के तहत लागू किए गए मुख्य नियम

रेलवे बोर्ड ने अपने आदेश में साफ कर दिया है कि इन 11 ट्रेनों के रख-रखाव के लिए डिपो स्तर पर विशेष टीमें तैनात की जाएंगी। व्यवस्था को पुख्ता बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:

  • क्लीन ट्रेन स्टेशन (CTS) प्वाइंट्स पर फोकस: रास्ते में पड़ने वाले मुख्य स्टेशनों पर सफाई टीमों के पास पर्याप्त मात्रा में मैनपावर, आधुनिक उपकरण और सफाई सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
  • समय-समय पर कचरा संग्रहण: ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग सर्विसेज (OBHS) के तहत हर दो घंटे में डिब्बों से कचरा एकत्र किया जाएगा। निर्देश दिए गए हैं कि इस कचरे को पटरियों पर फेंकने के बजाय तयशुदा डिस्पोजल पॉइंट्स पर ही नष्ट किया जाए।
  • टाइम-स्टैम्प फोटोग्राफी: डिब्बों और शौचालयों की सफाई के पुख्ता सबूत के तौर पर चुनिंदा निरीक्षण बिंदुओं के साथ-साथ शुरुआती और अंतिम स्टेशनों पर टाइम-स्टैम्प वाली तस्वीरें ली जाएंगी।
  • चलती ट्रेन में छोटे रिपेयर वर्क: यात्रा के दौरान ही कोच के भीतर आने वाली छोटी-मोटी तकनीकी दिक्कतों और बायो-टोइलेट्स की समय पर जांच कर उन्हें ठीक किया जाएगा।

यात्रियों की जागरूकता और कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर जोर

रेलवे का मानना है कि केवल प्रशासनिक सख्ती से शत-प्रतिशत स्वच्छता हासिल नहीं की जा सकती, इसके लिए यात्रियों का सहयोग और कर्मचारियों का कुशल होना भी उतना ही जरूरी है। रेलवे बोर्ड के पत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि नई ओबीएचएस (OBHS) योजना के तहत यात्रियों को भी जागरूक किया जाए।

पत्र में कहा गया है, "ओबीएचएस कर्मचारियों को उनके सौंपे गए कार्यों, यात्रियों के साथ शालीन व्यवहार और उचित शिष्टाचार के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। डिपो स्तर पर इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि कर्मचारी पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें।"

यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ

रेलवे के इस कदम से उन लाखों यात्रियों को सबसे बड़ा फायदा मिलेगा जो लंबी दूरी की यात्रा के दौरान अक्सर गंदगी और बदइंतजामी से परेशान रहते थे। रेलवे अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से यात्रियों की शिकायतों की समीक्षा करने और फीडबैक लेने की व्यवस्था से जमीनी स्तर पर सुधार देखने को मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह पायलट प्रोजेक्ट इन 11 ट्रेनों में पूरी तरह सफल रहता है, तो आने वाले समय में देश की अन्य लंबी दूरी की ट्रेनों में भी इसी तरह की सख्त और आधुनिक निगरानी प्रणाली लागू की जा सकती है, जिससे भारतीय रेल का सफर और अधिक सुविधाजनक हो सके।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

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अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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