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झारखंड में 108 एम्बुलेंस कर्मियों का बड़ा ऐलान, हड़ताल से चरमरा सकती है स्वास्थ्य सेवाएं

झारखंड में 108 एम्बुलेंस कर्मियों का बड़ा ऐलान, हड़ताल से चरमरा सकती है स्वास्थ्य सेवाएं

झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था आने वाले दिनों में एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है। आपातकालीन सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली 108 एम्बुलेंस सेवा के कर्मचारी अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। झारखंड प्रदेश एम्बुलेंस कर्मचारी संघ के आह्वान पर राज्यभर के कर्मचारियों ने सोमवार से अपने विरोध प्रदर्शन का आगाज कर दिया है। पहले दिन कर्मचारियों ने अपनी वर्दी पर काला बिल्ला लगाकर सरकार और संबंधित प्रबंधन के खिलाफ कड़ा रोष व्यक्त किया है। इस विरोध प्रदर्शन के कारण राज्य के विभिन्न जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं के ठप होने की आशंका जताई जा रही है, जिसका सीधा असर आपातकालीन स्थिति में मरीजों को मिलने वाली सहायता पर पड़ सकता है।

काला बिल्ला लगाकर दी ड्यूटी, सरकार के खिलाफ जताया विरोध

आंदोलन के पहले दिन रामगढ़ समेत झारखंड के तमाम जिलों में 108 एम्बुलेंस के कर्मचारी हाथों में और सीने पर काला बिल्ला लगाए नजर आए। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी के साथ निभा रहे हैं, लेकिन उनकी जायज़ मांगों पर लंबे समय से कोई ठोस सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया है। मजबूरन उन्हें इस चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ा है। प्रदर्शन के दौरान कुणाल बनर्जी, विकास, सिकंदर महतो, अरविन्द यादव, भारत महतो, मुकेश कुमार, बसंत महतो, अनिल कुमार, शंकर कुमार, रोहित महतो, हेमंत कुमार, आनंद, मनोज और लोकेश समेत कई प्रमुख कर्मचारी उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में अपनी मांगों को पूरा करने की पुरजोर मांग की है।

क्या हैं 108 एम्बुलेंस कर्मियों की प्रमुख मांगें?

कर्मचारी संघ ने अपनी मांगों की एक लंबी सूची प्रशासन और सरकार के सामने रखी है। संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

  • सरकारी माध्यम से संचालन: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अभियान निदेशक द्वारा जारी पत्र के अनुरूप, जिला स्तर पर सीधे सरकारी माध्यम से 108 एम्बुलेंस सेवा का संचालन शुरू किया जाए।
  • बहाल हों निष्कासित कर्मी: 'सम्मान फाउंडेशन' की ओर से प्रक्रिया के तहत हटाए गए सभी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से पुनः सेवा में बहाल किया जाए।
  • वैधानिक अधिकार और सुविधाएं: आईपीएफ/एएसआई के तहत ओवरटाइम का भुगतान, ग्रेच्युटी का लाभ और न्यूनतम वेतन अधिनियम के दायरे में सभी वैधानिक अधिकार पूरी तरह से सुनिश्चित किए जाएं।

आंदोलन का पूरा शेड्यूल: कब क्या होगा?

कर्मचारी संघ ने सरकार को चेतावनी देते हुए एक कड़ा और चरणबद्ध आंदोलन कार्यक्रम तैयार किया है, यदि समय रहते वार्ता नहीं हुई तो यह आंदोलन उग्र रूप ले सकता है:

  • 14 से 19 सितंबर: कर्मचारी काला बिल्ला लगाकर अपनी ड्यूटी करेंगे और विरोध दर्ज कराएंगे।
  • 19 सितंबर: सिविल सर्जन कार्यालय से लेकर डीसी (डिप्टी कमिश्नर) कार्यालय तक एक विशाल कैंडल मार्च निकाला जाएगा।
  • 21 सितंबर: सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए अनोखे तरीके से भिक्षाटन कार्यक्रम किया जाएगा।
  • 23 सितंबर: जिला स्तर पर जोरदार धरना-प्रदर्शन आयोजित होगा।
  • 25 सितंबर: राज्यव्यापी एक दिवसीय पूर्ण हड़ताल की जाएगी, जिससे एम्बुलेंस सेवाएं पूरी तरह ठप रह सकती हैं।
  • 28 सितंबर: यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो इस दिन से अनिश्चितकालीन पूर्ण हड़ताल का ऐलान कर दिया गया है।

आम जनता की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

एम्बुलेंस सेवाओं के इस तरह से अनिश्चितकालीन हड़ताल की ओर बढ़ने से सबसे बड़ी मुसीबत आम जनता के लिए खड़ी हो सकती है। दुर्घटनाओं, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए 108 सेवा संजीवनी का काम करती है। यदि 25 सितंबर की एक दिवसीय हड़ताल और 28 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होती है, तो सरकारी अस्पतालों से लेकर सुदूर ग्रामीण इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो सकती हैं। हालांकि, संघ ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि सरकार या संबंधित अधिकारी अभी भी सकारात्मक पहल करते हैं और बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान निकालते हैं, तो इस आंदोलन को आगे बढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।

प्रशासन और सरकार पर टकटकी

फिलहाल, गेंद प्रशासन और सरकार के पाले में है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग और एनएचएम के अधिकारियों को इस मामले में जल्द से जल्द हस्तक्षेप करने की जरूरत है ताकि समय रहते कर्मचारियों से संवाद स्थापित किया जा सके। यदि आने वाले कुछ दिनों में कोई आधिकारिक बैठक या समझौता नहीं होता है, तो झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरा संकट मंडराना तय माना जा रहा है। देखना यह होगा कि सरकार इन कर्मचारियों की सुध कब लेती है और मरीजों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए क्या हल निकाला जाता है।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

Content Writer

अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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