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मानसून की बेरुखी से गहराया संकट, 198 तालाब सूखे, किसानों की बढ़ी चिंता

मानसून की बेरुखी से गहराया संकट, 198 तालाब सूखे, किसानों की बढ़ी चिंता

भयानक मंजर की कल्पना की है जहां पानी की एक-एक बूंद के लिए इंसान और पशुधन दोनों तरस जाएं? इस समय कर्नाटक के हावेरी जिले के लोग कुछ ऐसी ही विकट परिस्थिति से जूझ रहे हैं। मानसून की बेरुखी ने इस पूरे इलाके की तस्वीर बदल कर रख दी है। खेतों में लहलहाने वाली फसलें अब धूल फांक रही हैं और पानी के तमाम स्रोत तेजी से सूखते जा रहे हैं।

आसमान से बरसने वाली राहत की बूंदें इस साल हावेरी पर मेहरबान नहीं हुईं। मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन के आंकड़े डराने वाले हैं। अगर समय रहते हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में यह संकट और भी गहरा सकता है। आइए जानते हैं जमीन पर क्या है असल ग्राउंड रिपोर्ट और इस आपदा से निपटने के लिए प्रशासन क्या तैयारी कर रहा है।

वर्षा में भारी कमी: आंकड़े बयां कर रहे हैं बर्बादी की कहानी

किसी भी कृषि प्रधान इलाके के लिए मानसून का समय पर आना और पर्याप्त बरसना जीवनरेखा माना जाता है। लेकिन हावेरी में इस बार कुदरत कुछ ज्यादा ही रूठी नजर आ रही है। जिले में 1 जून से 17 अगस्त के बीच की अवधि पर गौर करें तो स्थिति बेहद चिंताजनक है:

  • अपेक्षित वर्षा: 36.69 सेंटीमीटर
  • वास्तविक वर्षा: 20.86 सेंटीमीटर
  • कुल वर्षा की कमी: 43.15 प्रतिशत

इस भारी-भरकम आंकड़े ने साफ कर दिया है कि जिले में सूखे के बादल मंडराने लगे हैं। किसानों की महीनों की मेहनत और पूंजी मिट्टी में मिलती दिख रही है।

रट्टीहल्ली में सबसे बुरा हाल, सभी तालुकों में सूखे का असर

हावेरी जिले का शायद ही कोई ऐसा तालुका बचा हो जो इस आपदा से अछूत रहा हो। ब्याडगी, हानगल, हावेरी, हिरेकेरूर, राणेबेन्नूर, सवणूर, शिग्गावी और रट्टीहल्ली—हर जगह बारिश की भयंकर कमी दर्ज की गई है। हालांकि, इसमें भी रट्टीहल्ली तालुका सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है, जहां सामान्य से 65.99 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इस भारी गिरावट ने यहां के किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है।

जिले के 2,058 तालाबों में मंडराया खतरा

जल संकट की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिले के कुल 2,058 तालाबों में पानी का स्तर लगातार गिर रहा है। प्रशासनिक सर्वे के मुताबिक:

  • 198 तालाब पूरी तरह से सूख चुके हैं और वहां सिर्फ सूखी जमीन बची है।
  • 1,138 तालाबों में केवल 1 से 30 प्रतिशत तक ही पानी बचा है।
  • 440 तालाबों में 31 से 50 प्रतिशत पानी मौजूद है।
  • 268 तालाबों में 51 से 99 प्रतिशत पानी बचा है।
  • मात्र 14 तालाब ऐसे हैं जो पूरी तरह से लबालब भरे हुए हैं।
"कम जलस्तर वाले इन तालाबों का बचा-कुचा पानी भी गर्मी और धूप के चलते आने वाले दिनों में तेजी से वाष्प बनकर उड़ जाएगा, जिससे स्थिति और विकट हो सकती है।" - स्थानीय जल विशेषज्ञ

दूसरी तरफ कुछ राहत की उम्मीद भी

हर तरफ निराशा के बीच कुछ चुनिंदा जगहों पर राहत की उम्मीद भी जगी है। हिरेकेरूर के निडणेगिलु, हानगल के हुलगड्डी और सागरवल्ली समेत कुल 14 तालाब ऐसे हैं जो शत-प्रतिशत भरे हुए हैं। इसके अलावा, पश्चिमी घाट के ऊपरी इलाकों में हुई कुछ अच्छी बारिश की वजह से वरदा और तुंगभद्रा नदियों के जलप्रवाह में थोड़ा सुधार जरूर देखा गया है। सवणूर के कलसूर के पास वरदा नदी का पानी छोटे पुल के ऊपर तक बहने के कारण कुछ समय के लिए यातायात भी रोकना पड़ा था। हालांकि, यह राहत केवल कुछ ही क्षेत्रों तक सीमित है।

जिला प्रशासन की तैयारी: क्या हावेरी घोषित होगा सूखाग्रस्त?

बढ़ते संकट को देखते हुए अब जिला प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। किसानों के दर्द और आर्थिक तंगी को समझते हुए अधिकारियों ने सूखाग्रस्त जिला घोषित करने के लिए जरूरी मानदंडों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करना शुरू कर दिया है।

हावेरी के अतिरिक्त जिलाधिकारी नागराज ने मीडिया से बातचीत में बताया कि, "बारिश की कमी के कारण कृषि और जनजीवन पर पड़े प्रभावों का जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण कराया जा रहा है। सभी तहसीलों से सटीक जानकारी जुटाई जा रही है और राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपकर जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएंगे ताकि प्रभावितों को राहत पहुंचाई जा सके।"

किसानों की निगाहें अब सरकार और प्रशासन की ओर टिकी हैं कि उन्हें इस प्राकृतिक आपदा से उबरने के लिए किस प्रकार का मुआवजा या सहायता पैकेज मिलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: हावेरी में इस साल मानसून की स्थिति कैसी रही है?

Ans: हावेरी में इस मानसून सीजन (1 जून से 17 अगस्त तक) में अपेक्षित 36.69 सेमी की तुलना में केवल 20.86 सेमी बारिश हुई है, जिससे 43.15% की भारी कमी दर्ज की गई है।

Q2: जिले के तालाबों की क्या स्थिति है?

Ans: जिले के 2,058 तालाबों में से 198 तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं। 1,138 तालाबों में केवल 1 से 30% तक ही पानी बचा है, जबकि केवल 14 तालाब पूरी तरह भरे हैं।

Q3: सबसे ज्यादा सूखा किस तालुका में देखा गया है?

Ans: हावेरी जिले के रट्टीहल्ली तालुका में सबसे अधिक 65.99 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है, जिससे वहां भयंकर जल संकट पैदा हो गया है।

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तनु उपाध्याय

तनु उपाध्याय

Senior Sub Editor

तनु उपाध्याय एंटरटेनमेंट जगत की हलचल को करीब से समझती हैं और उसे दर्शकों के सामने आकर्षक अंदाज में पेश करती हैं। फिल्मों, टीवी, ओटीटी और वायरल ट्रे...

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