नोएडा के निजी स्कूलों में डिजिटल क्रांति पर लगाम, अब 'बोर्ड' से होगी पढ़ाई
क्या आपके बच्चे स्कूल में पढ़ाई के नाम पर लगातार स्क्रीन के सामने बैठे रहते हैं? अगर आप नोएडा या ग्रेटर नोएडा में रहते हैं, तो यह खबर आपको और आपके बच्चों को बड़ी राहत देने वाली है। जिला प्रशासन अब निजी स्कूलों में बढ़ते 'स्क्रीन टाइम' को नियंत्रित करने के लिए एक सख्त गाइडलाइन तैयार कर रहा है। आने वाले दिनों में स्कूलों को स्मार्ट बोर्ड और वीडियो के बजाय पारंपरिक तरीके से यानी 'ब्लैकबोर्ड' पर पढ़ाने को प्राथमिकता देनी होगी।
क्यों पड़ी इस नियम की जरूरत?
बीते कुछ समय से अभिभावकों और अभिभावक संघों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि निजी स्कूल बच्चों को पढ़ाने के नाम पर जरूरत से ज्यादा समय स्क्रीन के सामने बिठा रहे हैं। स्थिति यह है कि कई स्कूलों में डांस, संगीत और अन्य विषय भी केवल वीडियो के जरिए सिखाए जा रहे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, स्कूल में बिताए गए 6 घंटों में से करीब 3 घंटे यानी 50 से 60 प्रतिशत समय बच्चे स्क्रीन के सामने बिताने को मजबूर हैं। इससे न केवल बच्चों की आंखों पर बुरा असर पड़ रहा है, बल्कि उनके मानसिक और सामाजिक विकास में भी बाधा आ रही है।
क्या है प्रशासन की नई गाइडलाइन?
जिलाधिकारी मेधा रूपम ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि स्कूलों में स्क्रीन टाइम की एक निश्चित सीमा तय की जाएगी। जिला प्रशासन द्वारा तैयार की गई नई गाइडलाइन के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- प्राइमरी छात्र: इनके लिए अधिकतम स्क्रीन टाइम 30 मिनट तय किया गया है।
- सीनियर छात्र: बड़े बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम की सीमा 60 मिनट होगी।
- शिक्षण पद्धति: शिक्षकों को वीडियो के बजाय सामान्य बोर्ड का उपयोग करके लिखकर और बोलकर पढ़ाना अनिवार्य होगा।
- निगरानी: इन नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी के लिए मजिस्ट्रेट नियुक्त किए जाएंगे।
- कार्रवाई: नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उम्र के अनुसार स्क्रीन टाइम का वैज्ञानिक मानक
प्रशासन ने WHO और शिक्षा विभाग के नियमों का अध्ययन करने के बाद एक विस्तृत चार्ट तैयार किया है, जिसे स्कूलों को मानना होगा:
- 1 साल से कम: स्क्रीन टाइम की बिल्कुल अनुमति नहीं।
- 1 से 2 वर्ष: पूरी तरह मनाही (2 साल के बच्चों के लिए 1 घंटे से जितना कम हो, उतना बेहतर)।
- 3 से 4 वर्ष: पूरे दिन में अधिकतम 1 घंटा।
- 5 से 10 वर्ष: मनोरंजक स्क्रीन टाइम अधिकतम 1 से 2 घंटे।
- 10 से 18 वर्ष: होमवर्क के अलावा अन्य डिवाइस का उपयोग 2 घंटे से कम होना चाहिए।
शिक्षाविदों और अभिभावकों की राय
रायन इंटरनेशनल स्कूल की प्रधानाचार्या सुधा सिंह का कहना है, 'कई बार अभिभावक खुद डिजिटल बोर्ड की मांग करते हैं, लेकिन शिक्षा में संतुलन बनाना बेहद जरूरी है। यदि बच्चों को सिर्फ स्क्रीन के जरिए पढ़ाया जाएगा, तो उनका सर्वांगीण विकास नहीं होगा। दुनिया के कई विकसित देश अब वापस अपनी पुरानी और प्रभावी शिक्षा प्रणाली की ओर लौट रहे हैं।'
निष्कर्ष
नोएडा प्रशासन का यह कदम बच्चों के स्वास्थ्य और उनकी सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। यह न केवल बच्चों की आंखों को डिजिटल थकान से बचाएगा, बल्कि शिक्षकों और छात्रों के बीच के संवाद को भी मजबूत करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: क्या यह नियम सभी स्कूलों पर लागू होगा?
उत्तर: हाँ, यह गाइडलाइन नोएडा और ग्रेटर नोएडा के सभी निजी स्कूलों पर लागू होगी।
प्रश्न 2: अगर स्कूल इन नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो क्या होगा?
उत्तर: नियमों के उल्लंघन पर जिला प्रशासन द्वारा कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसकी निगरानी मजिस्ट्रेट करेंगे।
प्रश्न 3: क्या स्मार्ट क्लास पूरी तरह बंद हो जाएंगी?
उत्तर: स्मार्ट क्लास बंद नहीं होंगी, लेकिन उनका उपयोग सीमित और नियंत्रित होगा। मुख्य पढ़ाई बोर्ड के माध्यम से ही करानी होगी।