वैश्विक मंच पर आज भारत की कूटनीति और नेतृत्व क्षमता की गूंज लगातार सुनाई दे रही है। सितंबर 2026 के इस दौर में, जब दुनिया कई तरह के भू-राजनीतिक तनावों, आर्थिक अनिश्चितताओं और जलवायु परिवर्तन के गंभीर संकटों से जूझ रही है, तब 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन बेहद खास रहा। सम्मेलन के दूसरे दिन सदस्य देशों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने दुनिया के सामने भविष्य का एक ऐसा रोडमैप रखा, जो आपसी सहयोग और सतत विकास पर आधारित है।
चार स्तंभों पर टिका भारत का दृष्टिकोण: रेजिलिएंस से लेकर सस्टेनेबिलिटी तक
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए स्पष्ट किया कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स मंच पर हमारा पूरा फोकस मुख्य रूप से चार प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित रहा है। ये चार स्तंभ हैं- रेजिलिएंस (लचीलापन), इनोवेशन (नवाचार), कोऑपरेशन (सहयोग) और सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता)।
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जब तक वैश्विक स्तर पर इन चार बिंदुओं को अपने कामकाज के केंद्र में नहीं लाया जाएगा, तब तक दुनिया की आने वाली चुनौतियों का सामना करना असंभव होगा। पीएम ने कहा कि सभी सदस्य देशों के आपसी सहयोग और मजबूत समर्थन के कारण ही हम अपने साझा विजन को एक 'विन-विन कोलैबोरेशन' (जीत-जीत के सहयोग) में बदलने में पूरी तरह कामयाब रहे हैं।
छोटे उद्योगों और शहरी विकास के लिए नए इनिशिएटिव
छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की।
- ब्रिक्स MSME कोऑपरेशन पोर्टल: छोटे उद्यमों को सही समय पर ज्ञान (Knowledge), फाइनेंस (Finance) और नए बाजारों (New Markets) से जोड़ने के लिए इस विशेष पोर्टल का इनिशिएटिव लिया गया है। इससे सीमा पार व्यापार करने वाले छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत मिलेगी।
- ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब: तेजी से हो रहे शहरीकरण के बीच हमारे शहरों के सामने ट्रैफिक, प्रदूषण और संसाधनों के प्रबंधन की बड़ी चुनौती है। इन समस्याओं से निपटने और आपसी अनुभवों को साझा करने के लिए इस हब की स्थापना की गई है ताकि बेस्ट प्रैक्टिसेज को अपनाया जा सके।
वैश्विक तनाव और सप्लाई चेन के संकट पर चिंता
आज की दुनिया एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई है। इस इंटरकनेक्टेड दुनिया की सच्चाई को बयां करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में लगातार बढ़ते तनाव का आम नागरिकों की जिंदगी पर सीधा और बेहद नकारात्मक असर पड़ रहा है।
उन्होंने हाल के वर्षों का हवाला देते हुए कहा कि महामारियों के दौर, जलवायु आपदाओं और ग्लोबल सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने यह साफ कर दिया है कि आज का कोई भी संकट किसी एक देश या इलाके तक सीमित नहीं रहता। वह पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेता है। यही वजह है कि भारत ने ब्रिक्स के भीतर 'रेजिलिएंस' यानी संकट से उबरने की क्षमता बढ़ाने पर सबसे ज्यादा जोर दिया है।
पर्यावरण और मानव विकास: एक-दूसरे के पूरक
भारतीय संस्कृति और दर्शन की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने प्रकृति के साथ हमारे गहरे जुड़ाव को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता में प्रकृति को हमेशा मां का दर्जा दिया गया है।
"सदियों से हमारी यह मान्यता रही है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। ब्रिक्स मंच पर भी हमने हमेशा मानव विकास और पर्यावरण के बीच एक सटीक संतुलन बनाने पर बल दिया है। यही सस्टेनेबिलिटी का असली आधार है और यही भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा सबसे बड़ा दायित्व भी है।"
समुद्री नाविकों (Seafarers) के लिए बड़ा प्रस्ताव
ग्लोबल ट्रेड (वैश्विक व्यापार) के पहिये को लगातार घुमाने में मर्चेंट नेवी और नाविकों की भूमिका रीढ़ की हड्डी जैसी होती है। इस बात को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने एक मानवीय और दूरदर्शी प्रस्ताव रखा।
उन्होंने कहा कि सीफेयरर्स ग्लोबल ट्रेड में बेहद अहम योगदान देते हैं, लेकिन जब कभी कोई वैश्विक संकट आता है, तो उन्हें अक्सर पर्याप्त मदद या सुरक्षा नहीं मिल पाती है। इस स्थिति को बदलने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने 'सीफेयरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क' बनाने का एक ठोस प्रस्ताव पेश किया, जिसकी सराहना सम्मेलन में मौजूद अन्य राष्ट्रध्यक्षों ने भी की।
'न्यू दिल्ली ब्रिक्स लीडर्स डिक्लेरेशन' को मिली मंजूरी
संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि हमारा भविष्य साझा है, इसलिए उस भविष्य को आकार देने का अधिकार भी हम सबका मिलकर होना चाहिए। उनकी यह बात 'आवाज से असर तक' और 'विशेषाधिकार से साझेदारी तक' के मंत्र को चरितार्थ करती है।
सम्मेलन के अंतिम सत्र में ऐतिहासिक 'न्यू दिल्ली ब्रिक्स लीडर्स डिक्लेरेशन' को औपचारिक रूप से अपना लिया गया। इस घोषणापत्र में भविष्य में ब्रिक्स देशों के बीच आपसी सहयोग की प्राथमिकताओं, साझा प्रतिबद्धताओं और आगे की दिशा को बेहद स्पष्ट रूप से तय किया गया है।
निष्कर्ष
ब्रिक्स समिट के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी के भाषण ने यह साबित कर दिया कि भारत आज वैश्विक राजनीति में केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि गेम-चेंजर की भूमिका निभा रहा है। तकनीकी इनोवेशन से लेकर पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक सहयोग तक, भारत ने दुनिया को एक बार फिर से 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया है। आने वाले समय में ब्रिक्स मंच के माध्यम से ये नीतियां वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा देने का काम करेंगी।