देश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। ताजा मामला सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) और उससे जुड़े युवा नेताओं के बयानों से जुड़ा है, जिसने सनसनी फैला दी है। संगठन के प्रमुख चेहरों में शुमार सौरव दास ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा दावा किया है, जिसने राजनीतिक तापमान को अचानक बहुत बढ़ा दिया है। सौरव दास का कहना है कि केंद्र सरकार उन्हें और उनके साथियों को गिरफ्तार करने की बड़ी साजिश रच रही है। इस खुलासे के बाद से युवाओं और समर्थकों के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
सोशल मीडिया पर सौरव दास का बड़ा पोस्ट
सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक के बाद एक कई तीखे पोस्ट साझा किए हैं। इन पोस्ट में उन्होंने सीधे तौर पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े किए हैं। सौरव ने अपने संदेश में दावा किया कि सरकार उन्हें, अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका, रत्ना और संगठन के अन्य प्रमुख नेताओं को जेल में डालने की योजना पर काम कर रही है।
उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए लिखा कि यदि सरकार को यह लगता है कि इस तरह की तानाशाही हरकतों से युवाओं की आवाज को दबाया जा सकता है, तो यह उनकी बहुत बड़ी गलतफहमी है। देश की युवा पीढ़ी अब पूरी तरह से जाग चुकी है। सौरव ने देश के नाम अपने संदेश में अपील की है कि उनके अधिकारों और भविष्य की यह लड़ाई किसी भी कीमत पर रुकनी नहीं चाहिए, चाहे वे खुद सलाखों के पीछे ही क्यों न चले जाएं।
अभिजीत दीपके का सीधा हमला और चुनौती
सौरव दास के इस दावे के तुरंत बाद संगठन के एक अन्य प्रमुख नेता अभिजीत दीपके ने भी आक्रामक तेवर अपनाए। अभिजीत ने सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री को आड़े हाथों लेते हुए चुनौती भरे अंदाज में सोशल मीडिया पर लिखा कि आखिर कितनों को गिरफ्तार किया जाएगा? उन्होंने ऐलान किया कि आगामी 10 अक्टूबर को पूरा देश सड़कों पर उतरने वाला है और इस विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
"कितनों को अरेस्ट करोगे? 10 अक्टूबर को पूरा देश आ रहा है..." - अभिजीत दीपके का सोशल मीडिया पोस्ट
अभिजीत दीपके ने अपने एक अन्य बयान में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के उम्मीदवारों का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि बार-बार पेपर लीक होने की घटनाओं की वजह से राज्य के 20 लाख से अधिक उम्मीदवार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। ये युवा आज अपनी मेहनत का हक और MPSC चेयरमैन के इस्तीफे की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। सरकार को अहंकार छोड़कर इन युवाओं की बात सुननी चाहिए, क्योंकि यही छात्र महाराष्ट्र का भविष्य तय करने वाले हैं।10 अक्टूबर को बड़े जन आंदोलन का ऐलान
सीजेपी के नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे जेल जाने या किसी भी गंभीर परिणाम का सामना करने से डरने वाले नहीं हैं। संगठन का स्पष्ट रुख है कि दमनकारी नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन बदस्तूर जारी रहने चाहिए। भारत के आम नागरिकों और युवाओं से यह अपील की गई है कि वे आने वाली 10 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस बड़े राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन का हिस्सा बनें और अपनी एकजुटता दिखाएं।
चुनाव आयोग के खिलाफ भी चल रहा है मोर्चा
यह पूरा विवाद सिर्फ गिरफ्तारियों की आशंका तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संघर्ष भी चल रहा है। पिछले कुछ दिनों से यह संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयोग के कामकाज के खिलाफ लगातार मुखर रहा है। संगठन के मंच से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग जोर-शोर से उठाई जा रही है।
बीते दिनों अक्टूबर के शुरुआती हफ्ते में मुंबई में एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया था, जिसमें देश की कई जानी-मानी हस्तियों ने भी शिरकत की थी। इस दौरान मंच से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए थे और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई गई थी। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी इसी मुद्दे को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है।
युवाओं में आक्रोश और आगे की राह
मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में राजनीतिक पारा और अधिक चढ़ने वाला है। एक तरफ जहां युवा प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों को लेकर नाराज हैं, वहीं दूसरी तरफ सामाजिक संगठनों और प्रशासनिक तंत्र के बीच की तनातनी सड़कों पर उतरती दिख रही है। 10 अक्टूबर को होने वाले संभावित प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में सरकार और इन युवा नेताओं के बीच का यह गतिरोध किस दिशा में आगे बढ़ता है।