राजनीति के गलियारों में चुनावी सरगर्मी जितनी तेज होती है, उतनी ही तेजी से अपनों के बीच की खींचतान और कलह भी सतह पर आने लगती है। साल 2026 के इस सियासी दौर में राजस्थान की राजधानी जयपुर से कांग्रेस पार्टी के भीतर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। नगर निगम चुनाव के नजदीक आते ही पार्टी के भीतर टिकट वितरण को लेकर भारी असंतोष देखने को मिल रहा है, जो अब खुलेआम बगावत का रूप ले चुका है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि नाराज कार्यकर्ताओं ने जयपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष के आवास का घेराव कर दिया और जमकर नारेबाजी की।टिकट वितरण पर क्यों भड़का कार्यकर्ताओं का गुस्सा?
किसी भी राजनीतिक दल के लिए चुनाव जीतने की पहली सीढ़ी मजबूत और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं का विश्वास होती है। लेकिन जब टिकटों के बंटवारे में कथित तौर पर पैराशूट उम्मीदवारों या उन चेहरों को प्राथमिकता दी जाती है जिनका धरातल से सीधा नाता नहीं होता, तो बगावत होना लाजमी है। जयपुर में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला।
कांग्रेस पार्टी द्वारा नगर निगम चुनाव के लिए जैसे ही संभावित उम्मीदवारों की सूचियां सामने आईं, स्थानीय कार्यकर्ताओं का सब्र टूट गया। प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं का मुख्य आरोप था कि सालों से पार्टी के लिए खून-पसीना बहाने वाले निष्ठावान और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। उनका साफ कहना था कि पार्टी को जीत दिलाने वाले स्थानीय लोगों को ही चुनावी मैदान में उतारा जाना चाहिए, न कि ऐसे लोगों को जिन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता तक की गहरी समझ नहीं है।
- जिलाध्यक्ष के घर के बाहर उमड़ी भीड़, जमकर हुई नारेबाजविरोध प्रदर्शन का केंद्र बने जयपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा का आवास। सोमवार दोपहर अचानक बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और टिकट के दावेदार उनके घर के बाहर एकत्र हो गए। हाथों में पार्टी के झंडे और बैनर लिए कार्यकर्ताओं ने नेतृत्व के खिलाफ अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।नारेबाजी और शक्ति प्रदर्शन: कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और फैसले को तुरंत बदलने की मांग उठाई।
- स्थानीय बनाम बाहरी की लड़ाई प्रदर्शनकारियों का एकमात्र नारा था कि 'स्थानीय कार्यकर्ता को हक दो, बाहरी को बाहर करो।'
- चेतावनी: कार्यकर्ताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि पार्टी आलाकमान ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो वे चुनाव में निष्क्रिय हो जाएंगे या निर्दलीय ताल ठोकेंगे।
चुनावी रण से पहले पार्टी के लिए बड़ी चुनौतीएक तरफ जहां सत्ता और विपक्ष चुनावी वैतरणी पार करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं, वहीं आंतरिक कलह किसी भी दल के लिए सबसे बड़ा नुकसान साबित हो सकती है। जयपुर नगर निगम चुनाव कांग्रेस के लिए अपनी जमीन मजबूत करने का एक अहम अवसर है। ऐसे समय में अपनों का ही विरोध पार्टी के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते इस डैमेज कंट्रोल (नुकसान की भरपाई) को नहीं संभाला गया, तो यह विरोध जयपुर के अन्य वार्डों में भी आग की तरह फैल सकता है। स्थानीय स्तर पर बागी तेवर अपना रहे कार्यकर्ता पार्टी के भीतर एक समानांतर चुनौती खड़ी कर रहे हैं, जिसका सीधा फायदा चुनावी मैदान में विरोधी दलों को मिल सकता है।
आगे क्या कदम उठाएगा नेतृत्व?
जिलाध्यक्ष के आवास पर हुए इस हंगामे के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में बैठकों का दौर शुरू हो गया है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक जिला नेतृत्व या पार्टी के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन जिस प्रकार का आक्रोश कार्यकर्ताओं में देखने को मिला है, उससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में जयपुर कांग्रेस के भीतर टिकट कटने और मिलने का यह घमासान और अधिक तूल पकड़ सकता है।
अब देखने यह होगा कि क्या प्रदेश नेतृत्व नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने में कामयाब हो पाता है या फिर यह बगावत पार्टी के चुनावी अरमानों पर पानी फेरने का काम करती है। पल-पल बदलती इस राजनीतिक परिस्थिति पर हर किसी की नजर टिकी हुई है।
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