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जयपुर नगर निगम चुनाव: शहर की इन 6 वीआईपी सीटों पर टिकी हैं सबकी निगाहें, दांव पर दिग्गजों की प्रतिष्ठा

जयपुर नगर निगम चुनाव: शहर की इन 6 वीआईपी सीटों पर टिकी हैं सबकी निगाहें, दांव पर दिग्गजों की प्रतिष्ठा

गुलाबी शहर जयपुर की राजनीतिक फिजा इन दिनों पूरी तरह से गरमाई हुई है। मौका है जयपुर नगर निगम चुनाव का, जहां कुल 150 वार्डों के लिए मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इस बार का यह चुनावी रण केवल गलियों और नुक्कड़ों की सफाई या विकास कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिग्गजों के राजनीतिक भविष्य और दलों की साख की बड़ी परीक्षा बन चुका है। चुनाव मैदान में कुल 723 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिनके भाग्य का फैसला 24.33 लाख से अधिक मतदाता करेंगे।

वोटिंग से ठीक पहले शहर के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। इनमें से 6 ऐसे वार्ड हैं जिन पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं। इन चुनिंदा वार्डों में सिर्फ एक पार्षद चुनना मकसद नहीं है, बल्कि यहां पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की प्रतिष्ठा, अंदरूनी कलह, टिकट बंटवारे का गुस्सा और आने वाले समय में मेयर की कुर्सी की बिसात भी बिछाई जा रही है। आइए विस्तार से जानते हैं उन 6 हॉट सीटों के समीकरणों को जो इस चुनाव को सबसे ज्यादा रोमांचक बना रहे हैं।

वार्ड 110: पूर्व महापौर की प्रतिष्ठा का कड़ा इम्तिहान

जयपुर नगर निगम के वार्ड 110 का मुकाबला इस चुनाव के सबसे चर्चित मुकाबलों में शुमार है। भारतीय जनता पार्टी ने यहां से पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल को मैदान में उतारकर इस सीट को बेहद हाई-प्रोफाइल बना दिया है। उनके सामने कांग्रेस पार्टी ने सुनीता मेठी को टिकट दिया है, जबकि अन्य दलों और निर्दलियों के रूप में बीना मेठी और सोना जैन भी मैदान में हैं। इस वार्ड में कुल 12,165 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ज्योति खंडेलवाल की जीत या हार केवल एक वार्ड की जीत-हार नहीं होगी, बल्कि यह उनकी आगामी राजनीतिक भूमिका और कद का भी निर्धारण करेगी। दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी स्थानीय समीकरणों को अपने पक्ष में साधने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। कांग्रेस प्रत्याशी के पति का भी पूर्व पार्षद का अनुभव रहा है, जो स्थानीय स्तर पर वोटों को गोलबंद करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

वार्ड 112: संगठन की साख और निर्दलीयों की चुनौती

वार्ड 112 में मुकाबला चतुष्कोणीय बनता नजर आ रहा है। भाजपा ने यहां से अपने पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष और शहर अध्यक्ष रह चुके अनुभवी नेता सुनील कोठारी पर दांव खेला है। उनके मुकाबले में कांग्रेस के आशीष शर्मा खड़े हैं। हालांकि, इस सीट का असली रोमांच आम आदमी पार्टी (AAP) और निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी से बढ़ गया है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय हो गया है। यहाँ कुल मतदाताओं की संख्या 12,288 है।

इस वार्ड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ आप और निर्दलीय उम्मीदवारों को मिलने वाले कुछ सौ वोट भी खेल बिगाड़ने या बनाने की ताकत रखते हैं। सुनील कोठारी के लिए यह चुनाव केवल पार्षद बनने का नहीं, बल्कि संगठन के शीर्ष स्तर पर अपनी पकड़ साबित करने का भी है।

वार्ड 76: टिकट विवाद और सामाजिक समीकरणों का दंगल

वार्ड 76 का चुनाव शुरू से ही विवादों और ड्रामे के साए में रहा है। भाजपा के भीतर इस वार्ड को लेकर जो टिकट कलह देखने को मिली, उसने इसे पूरे शहर में चर्चा का विषय बना दिया। पार्टी की आधिकारिक सूची में निवर्तमान उप महापौर पुनीत कर्णावट का नाम तय था, लेकिन स्थानीय विधायक कालीचरण सराफ द्वारा कुलदीप मिश्रा को सिंबल सौंपे जाने से जबरदस्त घमासान मच गया। हालांकि बाद में इसे 'गफलत' बताकर स्थिति संभालने की कोशिश की गई, लेकिन अंदरखाने का असंतोष अभी भी सुलग रहा है।

कांग्रेस ने इस मौके का फायदा उठाते हुए राजस्थान जैन युवा महासभा के अध्यक्ष प्रदीप जैन को मैदान में उतारकर मास्टरस्ट्रोक चला है। इसे सामाजिक वोटों में सेंध लगाने के एक बड़े राजनीतिक दांव के रूप में देखा जा रहा है। 13,729 मतदाताओं वाले इस वार्ड में पुनीत कर्णावट का व्यक्तिगत जनसंपर्क उनकी सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन असंतुष्ट कार्यकर्ताओं की बेरुखी उनके लिए बड़ा रिस्क फैक्टर साबित हो सकती है।

वार्ड 135: बहुकोणीय मुकाबला और वोटों की जबरदस्त काट

वार्ड 135 में छह प्रत्याशी चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं, जिससे यह सीट पूरी तरह से अनिश्चितता के घेरे में है। भाजपा ने विमल अग्रवाल को टिकट दिया है, जिनका मुकाबला कांग्रेस के रवि कुमार शर्मा, आप के अमित कुमार शर्मा और दो अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों से है। इस वार्ड में कुल 17,823 मतदाता हैं, जो इसे आकार के हिसाब से भी एक बड़ा वार्ड बनाते हैं।

विमल अग्रवाल को दोबारा टिकट मिलने को लेकर भी पार्टी के भीतर सुगबुगाहट और विरोध की चर्चाएं सामने आई थीं। ऐसे में यह वार्ड संगठन की अनुशासनित ताकत और व्यक्तिगत प्रत्याशी के जनसंपर्क—दोनों की कड़ी परीक्षा ले रहा है। जानकारों का कहना है कि यदि कोई प्रत्याशी 30 से 35 प्रतिशत वोट अपने पाले में खींचने में सफल रहता है, तो उसकी जीत पक्की है। लेकिन आप और निर्दलीय जितने ज्यादा वोट काटेंगे, जीत का अंतर उतना ही सिमट जाएगा।

वार्ड 43: सीधी टक्कर और बूथ मैनेजमेंट का इम्तिहान

वार्ड 43 में मुकाबला अपेक्षाकृत सीधा दिखाई देता है, जहाँ कोई मजबूत तीसरा कोण नजर नहीं आ रहा है। यहाँ भाजपा की ओर से शैलेंद्र भार्गव और कांग्रेस की ओर से आशीष शर्मा आमने-सामने हैं। इस वार्ड में कुल 13,624 मतदाता हैं।

चूँकि यहाँ मुकाबला द्विपक्षीय है, इसलिए दोनों ही दलों का बूथ स्तर का नेटवर्क और चुनाव के अंतिम घंटों में मतदाताओं से संपर्क करने की क्षमता ही हार-जीत तय करेगी। यह सीट भाजपा संगठन के लिए अपनी साख बचाने की लड़ाई है, तो वहीं कांग्रेस के लिए यह स्थानीय प्रत्याशी की लोकप्रियता को भुनाने का बेहतरीन मौका है।

वार्ड 53: नेता प्रतिपक्ष की प्रतिष्ठा दांव पर

जयपुर नगर निगम चुनाव के सबसे प्रतिष्ठापूर्ण मुकाबलों में वार्ड 53 का नाम सबसे ऊपर लिया जा सकता है। यहाँ सीधा और कड़ा मुकाबला कांग्रेस के निवर्तमान नेता प्रतिपक्ष राजीव चौधरी और भाजपा के सतीश कुमार शर्मा के बीच है। इस वार्ड में केवल दो ही प्रमुख प्रत्याशी मैदान में हैं, जिससे लड़ाई पूरी तरह से आर-पार की हो गई है।

इस वार्ड के भौगोलिक दायरे में प्रताप नगर के बड़े हाउसिंग बोर्ड सेक्टर, जेडीए और विभिन्न सोसायटियों की कॉलोनियां तथा आसपास की ढाणियां शामिल हैं, जहाँ कुल 14,169 मतदाता रहते हैं। एक तरफ जहाँ कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष की अपनी सियासी साख दांव पर है, वहीं भाजपा इस सीट को छीनकर अपनी राजनीतिक ताकत का अहसास कराना चाहती है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो जयपुर नगर निगम चुनाव के ये छह वार्ड महज प्रशासनिक इकाइयां नहीं हैं, बल्कि ये आने वाले समय की राजनीतिक दिशा तय करने वाली प्रयोगशाला बन चुके हैं। मतदान संपन्न होने के बाद जब परिणाम सामने आएंगे, तब यह स्पष्ट होगा कि किस दिग्गज की रणनीति सफल रही और किसे धरातल पर जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ा।

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रोली सिंह

रोली सिंह

Writer (स्थानीय खबरें)

रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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