दूध के चुनाव से लेकर तापमान तक, जानिए परफेक्ट दही जमाने का सही तरीका
भारतीय रसोई में दही का विशेष स्थान है। खाने के साथ परोसा जाने वाला या रायते और कढ़ी में इस्तेमाल होने वाला दही यदि घर का बना हो, तो उसका स्वाद और ताजगी दोनों बढ़ जाते हैं। हालांकि, कई घरों में यह आम शिकायत रहती है कि घर पर जमाने के बाद दही या तो बहुत पतला हो जाता है या उसमें से अत्यधिक पानी छूटने लगता है। बाजार जैसा गाढ़ा, क्रीमी और मलाईदार दही जमाने के लिए कुछ छोटी लेकिन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। सही तापमान, दूध की गुणवत्ता और जामन मिलाने की सही तकनीक से आप घर पर ही हलवाई या डेयरी जैसा बेहतरीन दही तैयार कर सकते हैं।
दूध की क्वालिटी और फैट कंटेंट का रखें ध्यान
घर पर गाढ़ा दही जमाने की प्रक्रिया में सबसे पहला और अहम कदम सही दूध का चयन करना है। टोंड या स्किम्ड दूध से दही जमाने पर वह अक्सर पानी छोड़ देता है और पतला बनता है। डेयरी जैसा मलाईदार टेक्सचर पाने के लिए हमेशा फुल क्रीम या फुल फैट दूध का ही इस्तेमाल करें। दूध में जितना अधिक फैट होगा, दही उतना ही अधिक ठोस और क्रीमी जमेगा। यदि आप पैकेट का दूध इस्तेमाल कर रहे हैं, तो नीले पैकेट के बजाय फुल क्रीम वाला दूध चुनें।
दूध का सही तापमान है सबसे जरूरी
दूध को उबालने के बाद उसे किस तापमान पर जामन मिलाया जा रहा है, यह दही के जमने की सफलता तय करता है। दूध न तो बहुत अधिक गर्म होना चाहिए और न ही पूरी तरह ठंडा। दूध को उबालने के बाद गुनगुना (लूक वॉर्म) होने दें। अपनी उंगली डालकर चेक करें; यदि उंगली बिना जले उस गर्ماहट को आसानी से सहन कर सके, तो तापमान बिल्कुल सही है। बहुत गर्म दूध में जामन मिलाने से बैक्टीरिया मर जाते हैं और दही पानी छोड़ देता है, जबकि ठंडे दूध में दही जमता ही नहीं है।
जामन (इन्नोकुलेशन) की सही मात्रा और इस्तेमाल
दही जमाने के लिए जामन यानी खट्टा दही बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जामन बहुत पुराना या अत्यधिक खट्टा नहीं होना चाहिए, अन्यथा पूरे दही का स्वाद बिगड़ सकता है। एक लीटर दूध के लिए लगभग एक छोटा चम्मच ताजा जामन पर्याप्त होता है। जामन को दूध में पूरी तरह मिलाने के लिए उसे अच्छी तरह फेंट लें ताकि दूध में उसकी गांठें न रहें। जामन को गुनगुने दूध में समान रूप से मिलाने से बैक्टीरिया अच्छी तरह एक्टिवेट होते हैं और दही एकसार जमता है।
जमाने के बर्तन और तापमान का रखरखाव
दही जमाने के लिए मिट्टी के बर्तन को सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि मिट्टी बर्तन की अतिरिक्त नमी को सोख लेती है जिससे दही गाढ़ा और सोंधी खुशबू वाला बनता है। यदि मिट्टी का बर्तन न हो, तो कांच या अच्छी क्वालिटी के स्टील के बर्तन का उपयोग किया जा सकता है। जामन मिलाने के बाद बर्तन को ढक्कन से ढककर किसी शांत और गर्म जगह पर 6 से 8 घंटे के लिए रख दें। इस दौरान बर्तन को बार-बार हिलाएं नहीं, अन्यथा दही का कर्ट स्ट्रक्चर टूट जाएगा और पानी अलग हो जाएगा। सर्दियों के मौसम में बर्तन को किसी ऊनी कपड़े या कंबल से लपेटकर रखना फायदेमंद होता है।
दही जमने के बाद तुरंत फ्रिज में रखना
जब दही अच्छी तरह से जम जाए, तो उसे तुरंत रूम टेम्परेचर पर खुला न छोड़ें। अच्छी तरह सेट होने के बाद दही के बर्तन को कम से कम 2 से 3 घंटे के लिए फ्रिज में रख दें। ऐसा करने से दही का तापमान स्थिर हो जाता है, वह और अधिक सेट हो जाता है और उसकी मलाई तथा क्रीमीनेस बरकरार रहती है। फ्रिज में रखने से दही में खटास भी नियंत्रित रहती है और पानी अलग नहीं होता।