मेरठ के बीआईटी ग्लोबल स्कूल में आयोजित वार्षिकोत्सव 'प्रवाह' में भारतीय संस्कृति और आधुनिक विज्ञान का अनूठा संगम देखने को मिला। इस अवसर पर जर्मनी से आए विशेष प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।
उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित बीआईटी ग्लोबल स्कूल में बुधवार को वार्षिक उत्सव 'प्रवाह' का भव्य आयोजन किया गया। इस सांस्कृतिक संध्या में विद्यार्थियों ने अपनी कला और प्रतिभा के माध्यम से प्राचीन वैदिक काल से लेकर आधुनिक भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति तक के सफर को मंच पर जीवंत कर दिया। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति के विभिन्न आयामों के साथ-साथ शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, अंतरिक्ष विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की संभावनाओं को भी बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
जर्मन मेहमानों की विशेष उपस्थिति
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में जर्मन-इंडियन सोसाइटी के फेडरल बोर्ड की उपाध्यक्ष और जर्मनी के स्टटगार्ट स्थित इंटरनेशनल प्रोजेक्ट सेंटर की निदेशक एंजेलिका हाफ ने शिरकत की। उनके साथ जर्मनी से आईं शिक्षिकाएं डामारिस रेबर, जेनिफर हाइस, अन्ना लीना मिल्च और शिक्षक निक जेनिन के नेतृत्व में एक छात्र प्रतिनिधिमंडल ने भी इस कार्यक्रम में विशेष रूप से सहभागिता की। विद्यालय प्रबंधन की ओर से सभी विदेशी मेहमानों का माल्यार्पण कर और पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। इसके अलावा स्थानीय विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षाविद, कई गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के अभिभावक भी इस आयोजन के साक्षी बने।
गणेश वंदना से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आगाज
पारंपरिक गणेश वंदना के साथ शुरू हुए इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं की मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। इसके तुरंत बाद विद्यालय के प्रधानाचार्य एनपी सिंह ने संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने अपने संबोधन में विद्यालय की शैक्षिक उपलब्धियों, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों और अब तक की प्रगति यात्रा का विस्तृत विवरण साझा किया। समारोह के दौरान जर्मनी से आए विद्यार्थियों ने भी अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति दी, जिसने दोनों देशों की संस्कृतियों के बीच आपसी जुड़ाव और गहरे सांस्कृतिक संबंधों को खूबसूरती से दर्शाया।
नृत्य-नाटिका 'प्रवाह' रही मुख्य आकर्षण
इस पूरे वार्षिकोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण मुख्य नृत्य-नाटिका ‘प्रवाह’ रही। इस प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों ने भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विकास यात्रा को मंच पर साकार किया। कार्यक्रम में देश की समृद्धि में हरित क्रांति और श्वेत क्रांति के योगदान, हिमालय की महिमा, नारी शक्ति के जागरण, शिक्षा के प्रसार और देश की वैज्ञानिक प्रगति को बेहद करीने से स्थान दिया गया। इसके अलावा अंतरिक्ष विज्ञान, राकेट तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उभरते दौर की झलक ने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया। असम, पंजाब और राजस्थान के लोकनृत्यों के जरिए विद्यार्थियों ने भारत की विविधता में एकता के सांस्कृतिक संदेश को मजबूती से प्रसारित किया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों, उत्कृष्ट संगीत और आकर्षक मंच सज्जा ने इन प्रस्तुतियों के प्रभाव को और अधिक बढ़ा दिया।
शैक्षिक संवाद और भविष्य की दिशा
मुख्य समारोह शुरू होने से पहले विद्यालय परिसर में एक विशेष शैक्षिक संवाद और प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया था। इस सत्र में भारत और जर्मनी दोनों देशों के शिक्षकों तथा विद्यार्थियों ने खुलकर हिस्सा लिया और अपनी शिक्षण पद्धतियों, नवाचारों तथा सांस्कृतिक अनुभवों का आदान-प्रदान किया। इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच शैक्षिक और सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करना तथा विद्यार्थियों के भीतर एक वैश्विक दृष्टिकोण, पारस्परिक सम्मान और सहयोग की भावना को विकसित करना था। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि एंजेलिका हाफ ने सभी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया, जबकि विद्यालय के प्रधानाचार्य एनपी सिंह ने सभी मेहमानों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।