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मुंबई में एसआरए योजनाओं पर बीएमसी का लेटर बम, प्रीमियम छूट से करोड़ों के नुकसान का दावा

मुंबई में एसआरए योजनाओं पर बीएमसी का लेटर बम, प्रीमियम छूट से करोड़ों के नुकसान का दावा

मुंबई की प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक सरकारी पत्र को लेकर हलचल मची हुई है। महानगरपालिका (BMC) और झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA) के बीच का यह ताजा विवाद सीधे तौर पर शहर के राजस्व और निर्माण नियमों से जुड़ा हुआ है। BMC आयुक्त अश्विनी भिडे ने सीधे नगर विकास विभाग को एक कड़ा पत्र लिखकर एसआरए की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस पत्र के सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि मुंबई में चल रहे पुनर्विकास कार्यों में नियमों की अनदेखी को लेकर प्रशासनिक स्तर पर खींचतान फिर से शुरू हो गई है।

नियमों के उल्लंघन और राजस्व नुकसान का गंभीर दावा

आयुक्त अश्विनी भिडे द्वारा भेजे गए पत्र में मुख्य रूप से यह आरोप लगाया गया है कि SRA की करीब 300 योजनाओं में नियमों के विपरीत जाकर भारी-भरकम प्रीमियम छूट दी गई है। इस छूट के कारण सीधे तौर पर बीएमसी के खजाने को करोड़ों रुपये के राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। मुंबई जैसे महानगर में जहां नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए हर एक रुपये की अहमियत है, वहां इस तरह का वित्तीय घाटा नगर निकाय के लिए चिंता का बड़ा विषय बन गया है.

पत्र के अनुसार, एसआरए की इन योजनाओं में नियमों की व्याख्या अपने हिसाब से की गई, जिसका सीधा असर महानगरपालिका की आर्थिक सेहत पर पड़ रहा है। इस खुलासे के बाद से ही प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में बैठकों का दौर शुरू हो गया है.

नियम 33(10) और 33(11) को लेकर क्या है असली विवाद?

इस पूरे विवाद के केंद्र में डेवलपमेंट कंट्रोल रेगुलेशन (DCR) के दो अहम नियम हैं—नियम 33(10) और नियम 33(11)। इन्हें समझना बेहद जरूरी है ताकि इस पूरे मामले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सके:

  • नियम 33(10): यह नियम विशेष रूप से मुंबई के स्लम (झोपड़पट्टी) क्षेत्रों के पुनर्विकास के लिए डिजाइन किया गया है। इसके तहत झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को पक्के मकान और डेवलपर्स को इंसेंटिव एफएसआई (FSI) दी जाती है।
  • नियम 33(11): यह नियम शहर के खाली भूखंडों (Vacant Plots) के विकास और अन्य विशिष्ट परियोजनाओं से जुड़ा हुआ है।

बीएमसी का तर्क यह है कि नियम 33(11) के तहत आने वाली योजनाओं को वे सभी रियायतें और प्रीमियम छूट नहीं मिलनी चाहिए, जो पारंपरिक स्लम रिहैबिलिटेशन (SRA) योजनाओं के लिए तय हैं। लेकिन आरोप है कि एसआरए ने इन दोनों श्रेणियों के नियमों के बीच की रेखा को धुंधला करते हुए खाली जमीनों पर बनने वाली कई परियोजनाओं में भी अवैध रूप से छूट का लाभ दे दिया.

पहले भी उठाई जा चुकी है आपत्ति

यह कोई पहला मौका नहीं है जब महानगरपालिका ने इस तरह का गंभीर मुद्दा उठाया हो। आयुक्त अश्विनी भिडे ने अपने पत्र में इस बात का खास तौर पर जिक्र किया है कि इस मामले पर पहले भी आपत्ति दर्ज कराई जा चुकी है। इससे पहले तत्कालीन बीएमसी आयुक्त भूषण गगराणी ने भी 29 अगस्त 2024 को इस विषय पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था।

उस समय यह उम्मीद जताई गई थी कि नगर विकास विभाग के हस्तक्षेप के बाद स्थिति सुधरेगी। विभाग की ओर से कुछ दिशा-निर्देश भी जारी किए गए थे, लेकिन बीएमसी का आरोप है कि धरातल पर उन निर्देशों का पूरी तरह से पालन नहीं किया गया। यही वजह है कि अब नए सिरे से इस कड़े पत्र के जरिए सरकार को स्थिति से अवगत कराया गया है.

बीएमसी ने मांगे सभी अधिकार, आगे क्या होगा?

इस पूरे विवाद के बीच बीएमसी ने एक और बड़ा कदम उठाया है। महानगरपालिका ने मांग की है कि नियम 33(11) के अंतर्गत आने वाली सभी योजनाओं की पूरी जिम्मेदारी और नियंत्रण अधिकार सीधे बीएमसी को सौंपे जाने चाहिए।

बीएमसी का मानना है कि यदि यह अधिकार उन्हें मिल जाते हैं, तो नियमों का पालन कड़ाई से सुनिश्चित किया जा सकेगा और भविष्य में नगर निकाय के राजस्व की ऐसी क्षति को रोका जा सकेगा। अब सबकी निगाहें उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास मौजूद नगर विकास विभाग और एसआरए के अगले कदम पर टिकी हैं कि वे इस पत्र का क्या जवाब देते हैं और क्या कोई बड़ा प्रशासनिक सुधार देखने को मिलता है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे ने किस विभाग को पत्र लिखा है?

उत्तर: बीएमसी आयुक्त ने महाराष्ट्र सरकार के नगर विकास विभाग को पत्र लिखकर एसआरए योजनाओं में प्रीमियम छूट और राजस्व नुकसान का मुद्दा उठाया है।

Q2: विवाद के केंद्र में कौन से नियम हैं?

उत्तर: यह विवाद विकास नियंत्रण नियमावली के नियम 33(10) (स्लम पुनर्विकास) और नियम 33(11) (खाली भूखंडों का विकास) के अंतर्गत दी जाने वाली छूट को लेकर है।

Q3: बीएमसी की मुख्य मांग क्या है?

उत्तर: बीएमसी ने मांग की है कि नियम 33(11) के तहत आने वाली सभी योजनाओं के अधिकार महानगरपालिका को दिए जाएं ताकि नियमों का पालन हो सके और राजस्व सुरक्षित रहे।

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तनु उपाध्याय

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Senior Sub Editor

तनु उपाध्याय एंटरटेनमेंट जगत की हलचल को करीब से समझती हैं और उसे दर्शकों के सामने आकर्षक अंदाज में पेश करती हैं। फिल्मों, टीवी, ओटीटी और वायरल ट्रे...

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