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पुणे में गणेशोत्सव पर ट्रेनें फुल, प्राइवेट बसों ने वसूले दोगुने दाम

पुणे में गणेशोत्सव पर ट्रेनें फुल, प्राइवेट बसों ने वसूले दोगुने दाम

त्योहारों का मौसम शुरू होते ही देश के कई हिस्सों में यात्रियों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। इस साल सितंबर 2026 के मध्य में चल रहे गणेशोत्सव के पावन अवसर पर महाराष्ट्र के पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ से अपने घरों को लौटने वाले यात्रियों को एक भारी आर्थिक झटके का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे की तमाम कोशिशों के बावजूद ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट और फुल हो चुकी सीटें यात्रियों के लिए सिरदर्द बन चुकी हैं। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए निजी ट्रैवल संचालकों ने अपनी तिजोरियां भरनी शुरू कर दी हैं और किराए में सीधे दो से तीन गुना तक की भारी-भरकम वृद्धि कर दी है।

ट्रेनों में लंबी वेटिंग बनी यात्रियों की मजबूरी

गणेशोत्सव महाराष्ट्र का सबसे बड़ा और लोकप्रिय त्योहार माना जाता है। इस दौरान पुणे, मुंबई और पिंपरी-चिंचवड़ जैसे बड़े औद्योगिक शहरों में काम करने वाले लाखों लोग अपने पैतृक गांवों और शहरों की तरफ रुख करते हैं। लेकिन हर साल की तरह इस बार भी भारतीय रेलवे की व्यवस्था यात्रियों की इस भारी भीड़ के आगे बौनी साबित हुई। महाराष्ट्र के विभिन्न रूटों पर चलने वाली एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों में महीनों पहले ही रिजर्वेशन फुल हो चुके हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि ज्यादातर प्रमुख ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट डेढ़ सौ के पार पहुंच चुकी है। ऐसे में यात्रियों के पास अपने परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए निजी बसों के अलावा और कोई दूसरा व्यावहारिक विकल्प नहीं बचा है।

मराठवाड़ा, विदर्भ और खानदेश के यात्री सबसे ज्यादा परेशान

पिंपरी-चिंचवड़ और पुणे के औद्योगिक इलाकों में विदर्भ, मराठवाड़ा और खानदेश क्षेत्र के लाखों श्रमिक, नौकरीपेशा लोग और उनके परिवार रहते हैं। त्योहार के मौके पर जब ये लोग अपने गृहनगर लौटने का प्रयास करते हैं, तो इन्हें सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। नागपुर, अमरावती, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद), यवतमाल, अकोला, जलगांव, नांदेड़ और सोलापुर जैसे महत्वपूर्ण रूटों पर चलने वाली प्राइवेट बसों के संचालकों ने इस आपदा को अवसर में बदल दिया है। जो बसें सामान्य दिनों में किफायती दरों पर यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाती थीं, वे अब आसमान छूते किराए वसूल रही हैं।

प्रमुख रूटों पर किराए की स्थिति

निजी बस ऑपरेटरों द्वारा वसूले जा रहे मनमाने किराए का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सामान्य दिनों की तुलना में यात्रियों को अपनी जेबें बहुत ज्यादा ढीली करनी पड़ रही हैं। आइए नजर डालते हैं प्रमुख रूटों के वर्तमान किराया ढांचे पर:

  • पुणे से नागपुर: सामान्य किराए से बढ़कर अब यह ₹2,300 से ₹3,900 तक वसूला जा रहा है।
  • पुणे से अमरावती: इस रूट पर यात्रियों को ₹1,500 से लेकर ₹3,500 तक चुकाने पड़ रहे हैं।
  • पुणे से छत्रपति संभाजीनगर: किराया बढ़कर ₹1,300 से ₹3,000 तक पहुंच गया है।
  • पुणे से यवतमाल: इस मार्ग पर टिकट के दाम ₹1,300 से ₹2,800 के बीच वसूले जा रहे हैं।
  • पुणे से नांदेड़: जो सफर कभी ₹1,500 में तय होता था, उसके लिए अब ₹2,700 तक देने पड़ रहे हैं।
  • पुणे से अकोला: यात्रियों को ₹1,200 की जगह ₹2,500 तक का भुगतान करना पड़ रहा है।
  • पुणे से जलगांव: इस रूट पर किराया ₹1,150 से उछलकर ₹2,200 तक पहुंच गया है।
  • पुणे से सोलापुर: कम दूरी वाले इस मार्ग पर भी किराया ₹900 से बढ़ाकर ₹1,800 कर दिया गया है।

पिक-अप हॉटस्पॉट बने निगड़ी, भोसरी और चिंचवाड़

त्योहार के इन दिनों में पिंपरी-चिंचवड़ क्षेत्र के कई इलाके यात्रियों से खचाखच भरे नजर आ रहे हैं। निगड़ी, भोसरी, चिंचवाड़, थेरगांव और नासिक फाटा जैसे प्रमुख पिक-अप पॉइंट्स पर शाम ढलते ही यात्रियों का भारी हुजूम जमा हो जाता है। आने वाले दिनों में गणेश विसर्जन और उसके बाद वापसी की यात्रा के दौरान इस भीड़ के और अधिक विकराल रूप लेने की पूरी संभावना है। यात्रियों का आरोप है कि बस एजेंट और संचालक सीट की श्रेणी (स्लीपर या सीटर) और यात्रा की तारीख का बहाना बनाकर यात्रियों से मनमाने दाम मांग रहे हैं, और मजबूरी के चलते लोग इन शर्तों पर टिकट बुक करने को विवश हैं।

क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) से सख्त कार्रवाई की मांग

निजी ट्रैवल माफियाओं की इस खुली लूट से त्रस्त होकर आम नागरिकों और यात्री संगठनों ने क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर दी है। नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि प्रशासन को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। आरटीओ द्वारा विशेष फ्लाइंग स्क्वॉड (उड़न दस्ते) का गठन किया जाना चाहिए जो औचक निरीक्षण कर इन बसों के टिकटों की जांच करें। यात्रियों की मांग है कि जो भी बस ऑपरेटर तय किए गए किराए से अधिक पैसे वसूलते हुए पकड़ा जाए, उसका परमिट निलंबित करने के साथ-साथ भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए।

निष्कर्ष और आगे की राह

त्योहारों के पावन दिनों में अपनों के बीच पहुंचने की खुशी पर महंगाई और मुनाफाखोरी का यह साया बेहद निराशाजनक है। जब तक परिवहन विभाग और राज्य सरकार ऐसे निजी ऑपरेटरों पर लगाम कसने के लिए कोई ठोस और स्थाई नीति नहीं बनाती, तब तक आम जनता इसी तरह अपनी गाढ़ी कमाई इन ट्रेवल्स संचालकों को सौंपने के लिए मजबूर होती रहेगी। फिलहाल, सभी की निगाहें आरटीओ के अगले कदमों और इस दिशा में होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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