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ठाणे में बोर्ड परीक्षा का तनाव हुआ छूमंतर: 2 हजार छात्रों ने सीखे सफलता के अचूक टिप्स

ठाणे में बोर्ड परीक्षा का तनाव हुआ छूमंतर: 2 हजार छात्रों ने सीखे सफलता के अचूक टिप्स

बोर्ड परीक्षाओं का नाम सुनते ही विद्यार्थियों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आना एक आम बात है। खासकर जब बात कक्षा 10 यानी एसएससी बोर्ड की हो, तो यह दबाव और भी बढ़ जाता है। ऐसे में महाराष्ट्र के ठाणे शहर में एक अनूठी पहल देखने को मिली, जिसने न केवल हजारों बच्चों का हौसला बढ़ाया, बल्कि उन्हें परीक्षा के डर से बाहर निकालकर सही दिशा भी दिखाई। ठाणे में आयोजित एक विशेष मार्गदर्शन सत्र में लगभग दो हजार छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और बोर्ड परीक्षा की वैतरणी पार करने के गुर सीखे।

गणित और विज्ञान के खौफ से ऐसे पाएं मुक्ति

अक्सर बोर्ड के छात्रों के दिलों में गणित (Mathematics) और विज्ञान (Science) के विषयों को लेकर एक अजीब सा डर बैठा रहता है। इस मेगा गाइडेंस सेशन में पहुंचे विषय विशेषज्ञों (Subject Experts) ने इसी डर को सबसे पहले तोड़ने का काम किया। विशेषज्ञों ने बच्चों को समझाया कि ये दोनों विषय रटने के नहीं, बल्कि समझने और अभ्यास करने के हैं।

विशेषज्ञों ने छात्रों को फॉर्मूले याद करने के बजाय उनके मूल सिद्धांतों (Concepts) को क्लियर करने की सलाह दी। विज्ञान के डायग्राम्स और न्यूमेरिकल्स को हल करने के आसान तरीके बताए गए, ताकि परीक्षा हॉल में छात्र बिना किसी पैनिक के पन्ने भर सकें। सत्र के दौरान कई ऐसे व्यावहारिक उदाहरण दिए गए जो रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े थे, जिससे छात्रों को बोरिंग लगने वाले टॉपिक्स भी चुटकियों में समझ आ गए।

समय प्रबंधन: परीक्षा में सफलता की सबसे बड़ी कुंजी

पूरी सालभर की मेहनत पर पानी सिर्फ इसलिए फिर जाता है क्योंकि छात्र समय का सही प्रबंधन (Time Management) नहीं कर पाते। कई बार आता हुआ पेपर भी इसलिए छूट जाता है क्योंकि तीन घंटे कम पड़ जाते हैं। इस महत्वपूर्ण पहलू पर सत्र में विशेष जोर दिया गया।

  • पेपर पैटर्न को समझें: परीक्षा शुरू होने से पहले रीडिंग टाइम का सदुपयोग कैसे करें, इसकी जानकारी दी गई।
  • सेक्शन-वाइज टाइम अलॉटमेंट: किस प्रश्न पर कितना समय खर्च करना चाहिए, ताकि अंत में रिवीजन के लिए कम से कम 10-15 मिनट बच सकें।
  • स्टडी प्लानिंग: घर पर पढ़ाई करते वक्त सोशल मीडिया और अन्य विकर्षणों (Distractions) से कैसे दूरी बनाई जाए, इस पर खुलकर चर्चा हुई।

दो हजार छात्रों की उमड़ी भीड़, दिखा गजब का उत्साह

ठाणे के इस ऑडिटोरियम में जब दो हजार से अधिक किशोर छात्र एक साथ एक ही मकसद के साथ बैठे, तो ऊर्जा का स्तर देखने लायक था। छात्रों के चेहरों पर जो अनिश्चितता और घबराहट पहले दिख रही थी, वह सत्र के आगे बढ़ने के साथ आत्मविश्वास में बदलती नजर आई। कई छात्रों ने खुलकर विशेषज्ञों से अपने सवाल पूछे और अपनी व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान भी पाया।

कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों और आयोजकों का मानना है कि परीक्षा के दिनों में सिर्फ किताबें पढ़ना काफी नहीं होता, बल्कि मानसिक रूप से मजबूत होना भी उतना ही जरूरी है। इस तरह के आयोजनों से बच्चों को एक ऐसा मंच मिलता है जहाँ वे अपनी झिझक मिटा सकते हैं और अपनी छिपी हुई क्षमताओं को पहचान सकते हैं।

अभिभावकों के लिए भी था खास संदेश

इस सत्र में केवल छात्रों को ही नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से उनके अभिभावकों को भी एक बड़ा संदेश दिया गया। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि माता-पिता को बच्चों पर अपने सपनों का बोझ नहीं डालना चाहिए और न ही परीक्षा के अंकों के आधार पर उनकी तुलना दूसरों से करनी चाहिए। सकारात्मक घरेलू माहौल ही बच्चे की आधी जीत तय कर देता है।

अब आगे क्या?

इस मेगा सेशन के बाद ठाणे के छात्रों में एक नया जोश दिखाई दे रहा है। बोर्ड परीक्षाओं के नजदीक आते-आते इस तरह के मार्गदर्शन शिविर छात्रों के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम साबित नहीं होते। अब देखना यह है कि ये दो हजार छात्र इस सीख को अपनी रोजाना की दिनचर्या में उतारकर बोर्ड के नतीजों में कितना शानदार प्रदर्शन करते हैं।

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नसीम अहमद

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नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

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