सितंबर 2026 की शुरुआत नेपाल के नुवाकोट जिले के लिए किसी प्रलय से कम साबित नहीं हुई है। प्रकृति का ऐसा रौद्र रूप देखने को मिला, जिसने पल भर में हंसते-खेलते परिवारों को मलबे और आंसुओं के समंदर में डुबो दिया। अचानक आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने इलाके के कई गांवों को नेस्तनाबूद कर दिया है। इस तबाही के बाद जो सबसे वीभत्स और झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है, वह है अपनों की तलाश में दर-दर भटकते लोगों की। मलबे के ढेर और बिखरे हुए शवों के बीच अपने परिजनों को ढूंढने की यह जंग किसी भी इंसान की रूह कंपा देने के लिए काफी है।
अंगूठी और कड़े से अपनों की शिनाख्त की मजबूरी
बाढ़ का पानी और अपने साथ सब कुछ बहा ले जाने वाला सैलाब जब थमा, तो पीछे छोड़ गया तबाही का ऐसा मंजर जिसे बयां करने के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं। नुवाकोट के प्रभावित इलाकों में हालात इतने भयावह हैं कि कई जगहों पर इंसानी शव साबुत नहीं मिल पा रहे हैं। पानी के तेज बहाव और पत्थरों से टकराकर शवों के टुकड़े हो चुके हैं। ऐसे में स्थानीय लोग और पीड़ित परिवार अपने परिजनों की पहचान उनके शरीर के अंगों से नहीं, बल्कि हाथों में पहनी जाने वाली अंगूठी, कड़े, घड़ी या कपड़ों के छोटे-छोटे चीथड़ों से करने को मजबूर हैं।
ग्राउंड जीरो पर मौजूद लोगों की आंखें सूख चुकी हैं। हर तरफ चीख-पुकार और मातम का माहौल है। एक स्थानीय निवासी ने रोते हुए बताया, 'मेरा बेटा घर पर ही था जब अचानक पानी का सैलाब आया। अब यहां सिर्फ कीचड़ और पत्थर हैं। हमें जो शव मिल रहे हैं, वे पहचानने लायक भी नहीं हैं। मैं अपने बेटे को उसके हाथ की उस चांदी की अंगूठी से ढूंढ रहा हूँ, जो मैंने उसे इसी साल गिफ्ट की थी।'
प्रशासन और राहत कार्यों की चुनौतियाँ
घटना की सूचना मिलने के बाद नेपाल सरकार, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों ने फौरन राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए थे, लेकिन तबाही का दायरा इतना बड़ा है कि संसाधन कम पड़ते नजर आ रहे हैं।
- सड़क संपर्क टूटा: बाढ़ और भूस्खलन के कारण नुवाकोट को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पूरी तरह से कट चुके हैं, जिससे भारी मशीनरी और राहत सामग्री समय पर प्रभावित इलाकों तक नहीं पहुंच पा रही है।
- कम्युनिकेशन ब्लैंकआउट: कई इलाकों में बिजली और मोबाइल नेटवर्क ठप होने की वजह से अपनों की खोजबीन में जुटे लोगों को अपनों से संपर्क करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
- डीएनए टेस्ट की मांग: चूंकि कई शवों की पहचान उनके कपड़ों या शरीर के चिह्नों से भी नहीं हो पा रही है, इसलिए पीड़ित परिवार अब सरकार से डीएनए सैंपलिंग की मांग कर रहे हैं ताकि उन्हें अपनों का अंतिम संस्कार करने का हक मिल सके।
कुदरत का कहर और लापरवाही के सवाल
स्थानीय लोग इस तबाही के पीछे केवल प्राकृतिक आपदा ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध खनन और अनियोजित निर्माण कार्यों को भी जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर नदियों के किनारों पर अवैध बस्तियां और अनियंत्रित कटाई रोकी जाती, तो शायद तबाही का यह मंजर इतना भयानक नहीं होता। बाढ़ का पानी इतनी तेजी से रिहायशी इलाकों में घुसा कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। नींद में सो रहे लोग जलसैलाब की आगोश में समा गए।
अस्पतालों के बाहर अपनों का इंतजार
नुवाकोट के नजदीकी अस्पतालों और राहत शिविरों के बाहर सैकड़ों की संख्या में लोग खड़े हैं। हर बार जब कोई एम्बुलेंस या बचाव दल की गाड़ी अंदर आती है, तो इन लोगों की सांसें थम जाती हैं। वे उम्मीद और डर के एक अजीब से अहसास के बीच जीते नजर आ रहे हैं। एक तरफ उन्हें अपनों के जीवित मिलने की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ मलबे से मिल रहे शवों की हालत देखकर उनका दिल बैठा जा रहा है।
निष्कर्ष
नेपाल के नुवाकोट से आ रही यह ग्राउंड रिपोर्ट मानवता को झकझोर देने वाली है। एक तरफ बाढ़ का पानी उतरने के बाद तबाही के निशान साफ दिखने लगे हैं, तो दूसरी तरफ अपनों की तलाश में भटकते इन बेबस लोगों का दर्द आने वाले लंबे समय तक भुलाया नहीं जा सकेगा। प्रकृति के इस विकराल रूप के आगे इंसान कितना लाचार है, यह नुवाकोट की इन गलियों में साफ देखा जा सकता है, जहां हर कोई अपने किसी अपने की आखिरी निशानी तलाशने में जुटा है।