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पंजाब में गेहूं के प्रमाणित बीजों पर 50% सब्सिडी, ढाई लाख किसानों को मिलेगा लाभ

पंजाब में गेहूं के प्रमाणित बीजों पर 50% सब्सिडी, ढाई लाख किसानों को मिलेगा लाभ

पंजाब सरकार ने रबी सीजन में किसानों को बड़ी राहत देते हुए प्रमाणित गेहूं के बीजों की खरीद पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देने का निर्णय लिया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां द्वारा घोषित इस योजना के तहत राज्य के करीब ढाई लाख किसानों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए कुल 50 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है।

चंडीगढ़ में योजना की जानकारी देते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) लुधियाना और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) की संस्तुतियों के अनुसार रियायती दरों पर प्रमाणित बीज मुहैया कराए जाएंगे। तय प्रावधानों के मुताबिक, प्रमाणित गेहूं के बीज की मौजूदा कीमत 4250 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है, जिस पर सब्सिडी मिलने के बाद किसानों को यह बीज 2250 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर प्राप्त होगा। यह वित्तीय सहायता बीज लागत के 50 प्रतिशत अथवा प्रति हेक्टेयर अधिकतम 2000 रुपये, जो भी राशि कम होगी, तक सीमित रखी गई है। राहत की यह राशि सीधे खरीद के समय ही बीज की कुल कीमत में समायोजित कर दी जाएगी।

योजना का दायरा और वित्तीय प्रावधान

कृषि विभाग की ओर से इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत राज्यभर में 2,42,218 किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पूरी व्यवस्था को अमलीजामा पहनाने के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। यह पहल केंद्र प्रायोजित 'कृषि उन्नति योजना' के तहत 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन' (एनएफएसएनएम) के बीज घटक के अंतर्गत लागू की जा रही है, जिसका उद्देश्य किसानों पर आर्थिक बोझ कम करना और उन्हें उच्च गुणवत्ता के प्रमाणित बीज उपलब्ध कराना है।

आवेदन प्रक्रिया और पात्रता के नियम

इस योजना का लाभ उठाने के इच्छुक किसानों को अपने संबंधित जिला अथवा ब्लॉक कृषि कार्यालय से संपर्क करना होगा और आधिकारिक पोर्टल http://www.agrimachinerypb.com के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के दौरान आधार कार्ड अनिवार्य किया गया है, तथा आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर प्राप्त वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) के जरिए आवेदक की पहचान सत्यापित की जाएगी।

सब्सिडी का दायरा केवल उन्हीं गेहूं की किस्मों पर लागू होगा जिन्हें पीएयू द्वारा अनुशंसित किया गया हो तथा जिन्हें आइसीएआर या पंजाब सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर अधिसूचित किया गया हो। इसके अतिरिक्त, यह भी स्पष्ट किया गया है कि चुनी गई बीज की किस्म 10 साल से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए। बीज की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नोडल एजेंसियों की जिम्मेदारी तय की गई है।

पारदर्शिता और सत्यापन के कड़े निर्देश

योजना का लाभ 'पहले आओ, पहले पाओ' के सिद्धांत पर जिला व ब्लॉक स्तर पर निर्धारित लक्ष्यों के आधार पर वितरित किया जाएगा। भारत सरकार के तय दिशा-निर्देशों के अनुसार, लाभार्थियों के लिए दो साल की कूलिंग अवधि का नियम भी प्रभावी रहेगा ताकि योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंच सके। विभाग के मुख्यालय स्तर पर लाभार्थियों की सूची, वितरित बीज की मात्रा और सब्सिडी की राशि का रैंडम सत्यापन भी किया जाएगा ताकि पूरी प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बनी रहे।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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