दम्माम के किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर काम के दौरान हुई दुखद घटना
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के एक युवा प्रवासी कामगार की सऊदी अरब में एक भीषण हमले के दौरान मौत हो गई है। यह दुखद घटना गुरुवार रात दम्माम शहर स्थित किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुई, जहां हूती लड़ाकों द्वारा मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया था। इस अप्रत्याशित हादसे की खबर मिलने के बाद से मृतक के पैतृक गांव में कोहराम मचा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
घटना की पृष्ठभूमि और आधिकारिक जानकारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हमला सऊदी अरब के महत्वपूर्ण दम्माम हवाई अड्डे को निशाना बनाकर किया गया था। मृतकों में शामिल कमलेश पांडेय (उम्र और अन्य विवरण पारिवारिक सूत्रों पर आधारित) मूल रूप से गोरखपुर जिले के बांसगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले किशनपुर बगही गांव के रहने वाले थे। वह हरिश्चंद्र पांडेय के पुत्र थे। परिवार के अनुसार, कमलेश साल 2022 में रोजी-रोटी की तलाश में सऊदी अरब गए थे और वहां किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के परिसर के भीतर संचालित होने वाली बस सेवा में ड्राइवर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। कुछ महीने पूर्व ही वह अपनी छुट्टियां बिताने के लिए घर आए थे और छुट्टियां पूरी होने के बाद वापस सऊदी अरब लौटे थे।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और अंतिम बातचीत
कमलेश चार भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। उनके पिता किसानी का काम करते हैं। उनके परिवार में बुजुर्ग माता-पिता के अलावा उनकी पत्नी और दो बेटियां हैं, जिनके सिर से पिता का साया उठ गया है। उनके भाइयों में एक भाई अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में नौकरी करते हैं, जबकि अन्य दो भाई गांव में ही रहकर खेती-किसानी में पिता का हाथ बंटाते हैं। परिवार के सदस्यों ने बताया कि दुर्घटना से ठीक पहले, यानी 21 अक्तूबर को रात 10 बजे उनकी आखिरी बार वॉट्सऐप के जरिए अपने भाई से बातचीत हुई थी। इससे पहले उन्होंने परिवार के अन्य सदस्यों से भी वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क किया था और सब कुछ ठीक होने की बात कही थी।
शव वापसी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का इंतजार
शुक्रवार देर रात परिजनों को आधिकारिक और अन्य माध्यमों से कमलेश की मौत की दुखद सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही घर में चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव में मातम पसर गया। शोकाकुल परिवार अब सऊदी अरब से कमलेश के पार्थिव शरीर के सुरक्षित भारत (गोरखपुर) पहुंचने का इंतजार कर रहा है। इसके साथ ही परिजन प्रशासनिक स्तर पर होने वाली औपचारिकताओं और कागजी कार्रवाई के पूरा होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, ताकि शव को जल्द से जल्द उनके पैतृक गांव लाया जा सके और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जा सके।