उत्तर प्रदेश के संभल जिले की रहने वाली 75 वर्षीय चंदा देवी ने बेंगलुरु में आयोजित एशियन मास्टर्स स्विमिंग चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल कर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनके हौसले और तैराकी के प्रति जुनून ने यह साबित कर दिया है कि यदि मजबूत इच्छाशक्ति हो, तो बढ़ती उम्र कभी भी सपनों की राह में बाधा नहीं बनती है।
संभल जिले के चंदौसी स्थित रुस्तगी मुहल्ले में बड़ा महादेव के पास रहने वाली चंदा देवी पिछले लगभग 20 वर्षों से तैराकी का नियमित अभ्यास कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर की इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में उन्होंने अपनी मेहनत और अनुशासन के दम पर यह बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में पहले भी पदक जीत चुकीं चंदा देवी का यह सफर उन तमाम महिलाओं के लिए एक मजबूत प्रेरणास्रोत है जो उम्र बढ़ने के साथ अपनी प्राथमिकताओं और सपनों को पीछे छोड़ देती हैं।
बेंगलुरु में आयोजित हुई थी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में चार से 10 अक्टूबर 2026 तक एशियन मास्टर्स स्विमिंग चैंपियनशिप का आयोजन किया गया था। इस महाद्वीपीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में कुल नौ देशों के लगभग 1500 दिग्गज तैराकों ने हिस्सा लिया था। कड़े मुकाबले और चुनौतीपूर्ण माहौल के बीच चंदा देवी ने 75 से 80 वर्ष आयु वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान प्राप्त किया और रजत पदक पर कब्जा जमाया।
दो दशकों का कड़ा अभ्यास और अनुशासन
चंदा देवी का यह पदक रातों-रात मिली सफलता का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे उनके करीब दो दशकों का कड़ा संघर्ष और निरंतर अभ्यास जुड़ा हुआ है। वह आज भी अपनी फिटनेस को बरकरार रखने के लिए रोजाना स्विमिंग पूल में घंटों पसीना बहाती हैं। उनके इस समर्पण ने यह साबित कर दिया है कि खेल और फिटनेस की कोई उम्र सीमा नहीं होती है। इस स्पर्धा के दौरान उनके बेहतरीन तकनीकी कौशल और शारीरिक सहनशक्ति ने दर्शकों के साथ-साथ अन्य प्रतियोगियों को भी खासा प्रभावित किया।
संभल और चंदौसी में खुशी का माहौल
चंदा देवी की इस शानदार सफलता से न केवल उनके परिवार और शुभचिंतकों में खुशी की लहर है, बल्कि पूरे संभल जिले और चंदौसी कस्बे का गौरव भी बढ़ गया है। स्थानीय लोगों और खेल प्रेमियों का मानना है कि उनका यह सफर आने वाली पीढ़ी और विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को शारीरिक रूप से सक्रिय रहने के लिए प्रेरित करेगा। यह उपलब्धि दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प और नियमित जीवनशैली से किसी بھی उम्र में बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं।