यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की नई 'फिलिन' (Filin) क्रूज मिसाइल ने कीव की सैन्य चिंताएं बढ़ा दी हैं। यूक्रेनी सैन्य खुफिया एजेंसी (HUR) और रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह कम लागत वाली मिसाइल बड़े पैमाने पर उत्पादन और हमलों के लिए तैयार की जा रही है, जो भविष्य में यूक्रेनी वायु रक्षा प्रणाली के लिए जेट-पावर ड्रोन से भी बड़ा संकट साबित हो सकती है।
यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के पूर्व ड्रोन सलाहकार सर्नही 'फ्लैश' बेस्क्रेट्नोव और सर्नही स्टर्नेंको ने चेतावनी दी है कि फिलिन मिसाइल पारंपरिक हथियारों की तुलना में अधिक तेज, फुर्तीली और भारी वारहेड ले जाने में सक्षम है। स्टर्नेंको ने अपने टेलीग्राम चैनल पर लिखा कि इस तरह के हवाई हमलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल ही उनका अगला भविष्य है, जिसके सामने जेट पावर्ड शाहेद ड्रोन भी छोटी समस्या लगेंगेफिलिन मिसाइल की मुख्य विशेषताएं और क्षमताएं
यूक्रेन की सैन्य खुफिया एजेंसी HUR द्वारा प्रकाशित विवरण के मुताबिक, 11 फीट लंबी इस मिसाइल को जमीन के साथ-साथ हेलीकॉप्टर और यूएवी से भी लॉन्च किया जा सकता है। रूसी बलों ने गर्मियों के अंत में इसका उपयोग शुरू किया था। यह मिसाइल 100 किलोग्राम का वारहेड ले जाती है। रूस का दावा है कि यह लगभग 500 मील प्रति घंटे की गति से उड़ सकती है और इसकी मारक क्षमता 745 मील है।
यह गति रूस के सबसे उन्नत जेट-संचालित ड्रोन 'गेरान-5' (जो अधिकतम 370 मील प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ता है) से भी अधिक है। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, फिलिन बहुत कम ऊंचाई पर उड़ान भर सकती है या 3.7 मील की ऊंचाई तक जा सकती है। इसका ढांचा कार्बन और फाइबरग्लास से बना है, और इसके कुछ हिस्से 3डी-प्रिंटेड हैकम लागत और विदेशी कलपुर्जे
विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलिन का अनुमानित मूल्य 1.5 लाख डॉलर (लगभग 1,50,000 अमेरिकी डॉलर) प्रति यूनिट है, जो पारंपरिक Kh-101 क्रूज मिसाइल की लागत का लगभग सोलहवां हिस्सा है। कम कीमत होने के कारण रूस इसका आसानी से बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रहा है। HUR ने इसके फ्लाइट कंट्रोलर, इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, इक्विपमेंट कंट्रोल यूनिट और एंटी-जैमिंग हार्डवेयर में कई विदेशी पुर्जे पाए जाने का दावा किया है। इसमें अमेरिका के 35, चीन के 22 और जापान, स्विट्जरलैंड, ताइवान व नीदरलैंड के 13 कंपोनेंट्स शामिल हैं। हालांकि, इसका इंजन रूसी मूल का बताया गया है, जो नए 'कोवर' और 'मोनोक्रोम' मिसाइलों में भी देखा गया है।यूक्रेनी वायु रक्षा पर बढ़ता दबाव
रूस द्वारा कम लागत वाली तकनीक का उपयोग करके बनाई गई ऐसी मिसाइलें (जैसे बंडरोल और फिलिन) यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणालियों पर भारी दबाव डाल रही हैं। बंडरोल मिसाइल भी इसी श्रेणी की है, जिसे पहली बार वसंत 2025 में देखा गया था। यूक्रेनी विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि क्या देश का वायु सेना कमान इन नए हथियारों के व्यापक इस्तेमाल से पहले पर्याप्त काउंटर-मेजर तैयार कर रहा है। हालांकि, इन प्रदर्शन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है और इन्हें यूक्रेनी खुफिया रिपोर्टों के आधार पर साझा किया गया है।
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