Breaking
► गोंडा में बड़ा फर्जीवाड़ा: मृत महिला को जिंदा दिखा हड़पी एक एकड़ जमीन ► विद्यार्थियों को राष्ट्रवाद से जोड़ने के लिए तीन दिवसीय कार्यक्रम का सुझाव: सीएम शुभेंदु अधिकारी ► एशियन पैरा गेम्स 2026: पैरा एथलीट सिमरन ने 100 और 200 मीटर में जीते दो स्वर्ण पदक ► हरियाणा भाजपा में पूर्व नेताओं की होगी वापसी, स्मृति ईरानी ने दिए निर्देश ► इजरायल चुनाव: नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य पर मंडराया संकट, ओपिनियन पोल में कड़ा मुकाबला ► रूस की नई 'फिलिन' क्रूज मिसाइल से यूक्रेन की बढ़ी चिंता, कम लागत और भारी तबाही का खतरा ► ऑपरेशन ट्राइडेंट: 38 ठिकानों पर छापेमारी, 1,424 बैंक खाते फ्रीज और 100 करोड़ के हवाला कारोबार का खुलासा ► 5 नवंबर को करनाल आएंगे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, 'लोकतंत्र बचाओ' पदयात्रा में होंगे शामिल ► यूपी की राजनीति में विरोधाभास: एक तरफ देवी-देवताओं को नकारने की शपथ, तो दूसरी तरफ मायावती की दुर्गा रूप में पूजा ► सीएम मोहन यादव ने पीएम मोदी के दिवंगत पिता पर टिप्पणी की निंदा की ► गोंडा में बड़ा फर्जीवाड़ा: मृत महिला को जिंदा दिखा हड़पी एक एकड़ जमीन ► विद्यार्थियों को राष्ट्रवाद से जोड़ने के लिए तीन दिवसीय कार्यक्रम का सुझाव: सीएम शुभेंदु अधिकारी ► एशियन पैरा गेम्स 2026: पैरा एथलीट सिमरन ने 100 और 200 मीटर में जीते दो स्वर्ण पदक ► हरियाणा भाजपा में पूर्व नेताओं की होगी वापसी, स्मृति ईरानी ने दिए निर्देश ► इजरायल चुनाव: नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य पर मंडराया संकट, ओपिनियन पोल में कड़ा मुकाबला ► रूस की नई 'फिलिन' क्रूज मिसाइल से यूक्रेन की बढ़ी चिंता, कम लागत और भारी तबाही का खतरा ► ऑपरेशन ट्राइडेंट: 38 ठिकानों पर छापेमारी, 1,424 बैंक खाते फ्रीज और 100 करोड़ के हवाला कारोबार का खुलासा ► 5 नवंबर को करनाल आएंगे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, 'लोकतंत्र बचाओ' पदयात्रा में होंगे शामिल ► यूपी की राजनीति में विरोधाभास: एक तरफ देवी-देवताओं को नकारने की शपथ, तो दूसरी तरफ मायावती की दुर्गा रूप में पूजा ► सीएम मोहन यादव ने पीएम मोदी के दिवंगत पिता पर टिप्पणी की निंदा की

इजरायल चुनाव: नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य पर मंडराया संकट, ओपिनियन पोल में कड़ा मुकाबला

इजरायल चुनाव: नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य पर मंडराया संकट, ओपिनियन पोल में कड़ा मुकाबला

हमास हमलों के तीन साल बाद और ईरान के साथ सैन्य संघर्ष के साये में इजरायल में 27 अक्टूबर को आम चुनाव होने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक करियर की यह सबसे बड़ी परीक्षा है।

इजरायल में 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के आतंकी हमलों के बाद यह पहला आम चुनाव है। यह चुनाव तय करेगा कि देश के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू सत्ता में बने रहेंगे या तीन साल के युद्ध और आंतरिक उथल-पुथल के बाद उन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ेगी। इस बार के चुनाव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन और ईरान के साथ हुआ अनसुलझा टकराव अहम भूमिक निभा रहे हैं, हालांकि बंटा हुआ विपक्ष भी अपनी चुनौती को सत्ता परिवर्तन में बदलने के लिए संघर्ष कर रहा है।

सर्वे में कांटे की टक्कर के संकेत

हालिया ओपिनियन पोल एक बेहद कड़े मुकाबले की ओर इशारा कर रहे हैं। इजरायल के तीन प्रमुख टीवी नेटवर्कों द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए सर्वे के अनुसार, आईडीएफ के पूर्व प्रमुख गादी आइसेनकोट की नई पार्टी 'यशार' को प्रधानमंत्री नेतन्याहू की 'लिकुड' पार्टी से आगे निकलते हुए दिखाया गया है। हालांकि, मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक न तो नेतन्याहू के गठबंधन को और न ही मुख्य विपक्षी गुट को 120 सीटों वाली इजरायली संसद (क्रेसेट) में बहुमत के लिए आवश्यक 61 सीटों का जादुई आंकड़ा मिलता दिखाई दे रहा है।

सर्वे के अनुमानों के अनुसार, गादी आइसेनकोट की 'यशार' पार्टी को लगभग 22 से 23 सीटें मिल सकती हैं, जबकि नेतन्याहू की 'लिकुड' पार्टी को 19 से 21 सीटें मिलने की संभावना है। वहीं, नेतन्याहू के पूरे गठबंधन को कुल मिलाकर करीब 50 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि मुख्य विपक्षी गुट को 52 से 56 सीटें मिल सकती हैं। इसके अलावा, अरब नेतृत्व वाली पार्टियां 14 से 16 सीटें जीत सकती हैं। हालांकि ये केवल शुरुआती अनुमान हैं, लेकिन ये इस बात की गवाही देते हैं कि मुकाबला कितना कठिन है।

मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरे गादी आइसेनकोट

इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) के पूर्व प्रमुख गादी आइसेनकोट इस चुनाव में नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरे हैं। उन्होंने साल 2015 से 2019 तक सैन्य प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली थी और 7 अक्टूबर के हमलों के बाद गठित युद्धकालीन सरकार का हिस्सा भी रहे थे। हालांकि, जून 2024 में उन्होंने सरकार से इस्तीफा दे दिया था। उनका तर्क था कि युद्ध से जुड़े संवेदनशील फैसलों पर राजनीतिक स्वार्थ हावी हो रहे हैं। इसके बाद उन्होंने बेनी गैंट्ज से अलग होकर सितंबर 2025 में 'यशार' पार्टी की स्थापना की।

आइसेनकोट का चुनाव प्रचार उनके सैन्य अनुभव, प्रशासनिक जवाबदेही और इस बात पर केंद्रित है कि इजरायल को अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं से समझौता किए बिना नेतृत्व में बदलाव की आवश्यकता है। वे पारंपरिक वामपंथी नेता नहीं हैं, बल्कि उनकी मुख्य आलोचना युद्ध संचालन के तौर-तरीकों, 7 अक्टूबर की खुफिया विफलताओं और सरकार के घरेलू एजेंडे पर आधारित है। विपक्ष के अन्य नेताओं की तरह वे भी हमास के खिलाफ सख्त रुख का समर्थन करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि देश को अधिक प्रभावी सुरक्षा नेतृत्व की जरूरत है।

ईरान संघर्ष: रणनीतिक सफलता या राजनीतिक जोखिम?

सुरक्षा इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा है और ईरान के मोर्चे पर हुई घटनाएं इसे और भी पेचीदा बनाती हैं। बीते 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के परमाणु और सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हुए एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया था। यह संघर्ष एक व्यापक क्षेत्रीय टकराव में बदल गया था, जिसके बाद जून में पाकिस्तान की मध्यस्थता से एक युद्धविराम समझौता हुआ और दोनों पक्षों के बीच सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।

हालांकि इस विराम से ईरान का परमाणु कार्यक्रम, उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ईरानी बंदरगाहों पर लगातार दबाव और क्षेत्र में बनी अनिश्चितता के कारण कभी भी दोबारा संघर्ष छिड़ने का जोखिम बरकरार है।

प्रधानमंत्री नेतन्याहू इस सैन्य अभियान को अपनी एक बड़ी रणनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश कर रहे हैं। उनका दावा है कि इस सख्त सैन्य कार्रवाई ने इजरायल के लिए एक बड़े खतरे को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। उनका यह भी मानना है कि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए भविष्य में और भी कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 27 अक्टूबर के चुनाव में मतदाता नेतन्याहू की इन सैन्य सफलताओं को उनकी सियासी जीत में बदलते हैं या नहीं। यदि वे हारते हैं, तो एक नया नेतृत्व इजरायल की दिशा तय करेगा।

About the Author

ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

Read More

ज़रूर पढ़ें (You May Also Like)

अगली खबर पढ़ें:

आगे पढ़ें →