केजीएमयू धर्मांतरण और लव जिहाद मामले में एसटीएफ की जांच रिपोर्ट सामने आई है। पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी समेत चार विभागों में नेटवर्क और शिकायतों को दबाने का खुलासा।
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में धर्मांतरण और कथित लव जिहाद प्रकरण को लेकर उत्तर प्रदेश विशेष कार्य बल (एसटीएफ) की जांच रिपोर्ट ने संस्थान की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान केजीएमयू में सामने आए धर्मांतरण और कथित लव जिहाद के मामलों में एसटीएफ की जांच रिपोर्ट से नए और चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान के भीतर कम से कम चार प्रमुख विभागों में एक संदिग्ध नेटवर्क सक्रिय था और महिला चिकित्सकों द्वारा पूर्व में उठाई गई गंभीर शिकायतों को प्रशासनिक स्तर पर लगातार दबाया जाता रहा।
जांच के दायरे में केजीएमयू के चार प्रमुख विभाग
एसटीएफ की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, केजीएमयू के पैथोलॉजी, गांधी वार्ड, माइक्रोबायोलॉजी और रेडियोलॉजी विभाग इस पूरे प्रकरण में जांच के दायरे में हैं। गंभीर बात यह है कि इन विभागों में कार्यरत महिला चिकित्सकों ने समय-समय पर अपनी सुरक्षा और कार्यस्थल पर अनुचित दबाव को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन संस्थान के जिम्मेदार अधिकारियों ने इन मामलों में समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे कथित नेटवर्क को और बढ़ावा मिला।
चिकित्सकों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल
जांच रिपोर्ट में विभिन्न विभागों के चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की संदिग्ध गतिविधियों की ओर इशारा किया गया है। पैथोलॉजी, मेडिसिन और बायोकेमिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण विभागों से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका इस नेटवर्क में बताई जा रही है। हालांकि, एसटीएफ और प्रशासनिक सूत्रों का स्पष्ट कहना है कि किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता और उसके दोष का अंतिम निर्धारण कानूनी जांच और निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही तय होगा।
निजी मेडिकल संस्थानों में निवेश और वैचारिक प्रभाव के आरोप
एसटीएफ की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि संस्थान के कुछ चिकित्सक लखनऊ के ही एक अन्य निजी मेडिकल संस्थान में आर्थिक निवेश से जुड़े हैं। इसके अलावा, एक अन्य निजी यूनिवर्सिटी के विभिन्न विभागों से जुड़े कुछ चिकित्सकों पर कथित कट्टरपंथी विचारधारा से अत्यधिक प्रभावित होने के आरोप लगाए गए हैं। एसटीएफ इन सभी वित्तीय और वैचारिक संबंधों की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि संस्थान की आंतरिक व्यवस्था का किस प्रकार दुरुपयोग किया गया।
वर्ष 2020 के कोविड काल के पुराने प्रकरण की चर्चा
जांच रिपोर्ट में वर्ष 2020 के दौरान कोविड-19 संक्रमण के शुरुआती दौर की एक घटना का भी विशेष रूप से जिक्र किया गया है। आरोप है कि उस दौरान लखनऊ में एकत्र हुए जमातियों में से एक संक्रमित व्यक्ति को केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में लाया गया था। नियमानुसार स्क्रीनिंग और ट्रायज प्रोटोकॉल का पालन किए बिना उसे सीधे वार्ड में भर्ती करा दिया गया, जिसके कारण अन्य मरीजों और चिकित्सा कर्मियों में संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो गया था। इस मामले के उजागर होने के बाद शासन स्तर पर जांच के आदेश दिए गए थे। अब एसटीएफ की ताजा रिपोर्ट में इस पुराने प्रकरण के दोबारा जुड़ने से संस्थान में प्रशासनिक नियमों के पालन और आंतरिक अनुशासन पर सवालिया निशान लग गए हैं।
दूसरी ओर, इस पूरी जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद केजीएमयू के शिक्षकों और कर्मचारियों के एक वर्ग ने रिपोर्ट की कार्यप्रणाली और उसमें उठाए गए बिंदुओं पर अपने स्तर से सवाल भी उठाए हैं, जिससे संस्थान के भीतर अंदरखाने सुगबुगाहट तेज हो गई है।