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मेरठ के शिक्षक मिर्जा की दो रचनाएं एनसीईआरटी में शामिल, लहराया परचम

मेरठ के शिक्षक मिर्जा की दो रचनाएं एनसीईआरटी में शामिल, लहराया परचम

शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम रोशन किया है। फलावदा कस्बे के रहने वाले और जूनियर हाई स्कूल गड़ीना में सहायक अध्यापक के पद पर सेवा दे रहे मिर्जा मिन्हाजुद्दीन की दो कविताओं को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की प्रतिष्ठित पुस्तक 'काव्य मंजरी' में जगह मिली है। उनके इस मुकाम से पूरे शिक्षा जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है।

राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला में हुआ चयन

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एनसीईआरटी के केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान (CIET) नई दिल्ली की ओर से हिंदी माह-2026 के अंतर्गत एक विशेष कार्यशाला और शिक्षक कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया था। यह आयोजन 25 और 26 सितंबर को अरविंद डिजिटल शिक्षा के तहत राजभाषा हिंदी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था।

इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में देश के 19 अलग-अलग राज्यों से लगभग 1200 से अधिक रचनाएं प्राप्त हुई थीं। कड़े चयन प्रक्रिया और विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद इनमें से केवल 93 बेहतरीन रचनाओं को ही अंतिम रूप से चुना गया। गर्व की बात यह है कि इन चुनिंदा रचनाकारों में मेरठ के शिक्षक मिर्जा मिन्हाजुद्दीन भी शामिल थे, जिन्हें इस विशेष सम्मेलन में आमंत्रित किया गया था।

किन दो रचनाओं को मिला स्थान?

शिक्षक मिर्जा मिन्हाजुद्दीन की जिन दो रचनाओं को 'काव्य मंजरी' में स्थान मिला है, वे अपने आप में बेहद खास और शिक्षण पद्धति में नवाचार का अनूठा उदाहरण हैं:

  • फसल चक्र: यह एक शैक्षिक रचना (कविता) है, जिसे कृषि और फसलों पर आधारित पाठों को सरल बनाने के लिए तैयार किया गया है। इस गीत के माध्यम से छोटे बच्चे बहुत कम समय में तीनों फसलों के प्रकार, उनकी बुआई-कटाई और कृषि से जुड़े सामान्य ज्ञान को आसानी से याद कर लेते हैं। यह न सिर्फ बच्चों में कृषि के प्रति समझ बढ़ाता है बल्कि देश की रीढ़ को भी मजबूत करता है। उत्तर प्रदेश के कई स्कूलों की दीवारों पर भी इस कविता को लिखवाया गया है।
  • हिन्दी सबको जोड़ती है: यह एक उत्कृष्ट साहित्यिक रचना है, जो हिंदी भाषा के वैश्विक प्रभाव और उसकी ताकत को दर्शाती है। इस रचना का उद्देश्य यह बताना है कि कैसे देश-विदेश से आने वाले लोग हिंदी से प्रभावित होकर इसके प्रेमी बन जाते हैं और इसकी सेवा करने लगते हैं। इससे स्कूली विद्यार्थियों में शुद्ध हिंदी सीखने और इसके प्रति जागरूक होने की प्रेरणा मिलती है।

दिग्गजों की मौजूदगी में मिला सम्मान

इस भव्य आयोजन के दौरान एनसीईआरटी के निदेशक डॉ. दिनेश प्रसाद सकलानी, मारीशस विश्व हिंदी सचिवालय के उप महासचिव शुभंकर मिश्र, प्रोफेसर रामजन्म शर्मा और प्रोफेसर अमरेंद्र प्रसाद बेहेरा सहित देश-विदेश के कई जाने-माने शिक्षाविद और विद्वान मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में मिर्जा मिन्हाजुद्दीन को 'काव्य मंजरी' पुस्तक की प्रति भेंट कर सम्मानित किया गया।

27 साल का लंबा शैक्षणिक अनुभव

मिर्जा मिन्हाजुद्दीन का शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। वर्तमान में वह गड़ीना के जूनियर हाई स्कूल में बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं, लेकिन इससे पहले उन्होंने लगभग 11 साल तक छोटा मवाना स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) में सेवाएं दी हैं। इस दौरान उन्होंने सैकड़ों बीटीसी (BTC) प्रशिक्षुओं को भी प्रशिक्षित किया।

लगभग 27 वर्षों के अपने लंबे अध्यापन अनुभव के दौरान उन्होंने पढ़ाई को बोरिंग बनाने के बजाय हमेशा गद्य और पद्य के जरिए नए शैक्षिक नवाचार (Educational Innovations) किए हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके गृह जिले मेरठ के लिए, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के शिक्षकों के लिए एक मिसाल बन गई है।

शिक्षा जगत में चर्चा का विषय

आज के दौर में जब डिजिटल शिक्षा और आधुनिक तकनीक का बोलबाला है, ऐसे में एक शिक्षक द्वारा कविताओं के माध्यम से पाठ्यक्रम को सरल बनाना और उसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना बड़ी बात है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के नवाचार से सरकारी स्कूलों की शिक्षण पद्धति में क्रांतिकारी बदलाव आ रहे हैं और छात्र खेल-खेल या गीत-संगीत के माध्यम से कठिन विषयों को आसानी से सीख पा रहे हैं।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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