योगी सरकार का बड़ा कदम: गोशालाओं से जुड़ेगी किसानों की कमाई और प्राकृतिक खेती
उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की गोशालाओं को केवल गोवंश संरक्षण तक सीमित न रखकर, इन्हें किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस योजना के तहत गोबर और अन्य जैविक संसाधनों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाएगा, जिससे एक ओर गोशालाओं की आय बढ़ेगी तो दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर किसानों को खाद और जैविक उत्पाद सुलभ हो सकेंगे।
इस पूरी पहल को अमलीजामा पहनाने के लिए ललितपुर को पायलट नेचुरल फार्मिंग डिस्ट्रिक्ट के तौर पर विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। ललितपुर के अनुभवों और परिणामों के आधार पर ही इस मॉडल को प्रदेश के हर मंडल के एक-एक जिले में लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग और नाबार्ड के बीच रूपरेखा तैयार
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप इस महत्वपूर्ण पहल पर काम शुरू कर दिया गया है। हाल ही में गो सेवा आयोग और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें इस मॉडल की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा की गई।
इस व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) और कृषि विज्ञान केंद्रों को भी भागीदार बनाने पर विचार चल रहा है। प्रस्ताव के मुताबिक, नाबार्ड से वित्तीय सहयोग और क्षमता विकास में मदद ली जाएगी, जबकि उपकार व कृषि विज्ञान केंद्रों के जरिए किसानों और गोशाला संचालकों को तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य गोवंश संरक्षण, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण उद्यमिता को एक सूत्र में पिरोकर किसानों व गोशालाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करना है।
गोबर और जैविक संसाधनों से तैयार होंगे कई उत्पाद
प्रस्तावित मॉडल के तहत गोशालाओं में उपलब्ध गोबर से प्राकृतिक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जैविक कीट नियंत्रक और पंचगव्य आधारित उत्पादों के निर्माण पर विशेष जोर रहेगा। इसके अलावा, गो-काष्ठ तथा गोबर आधारित बायोगैस और कम्प्रेस्ड बायोगैस (बायो-सीबीजी) संयंत्र स्थापित करने की संभावनाओं पर भी काम चल रहा है।
इन उपायों से न केवल गोशालाओं के लिए आय के नए और स्थायी स्रोत विकसित होंगे, बल्कि किसानों को भी किफायती दरों पर प्राकृतिक खेती के लिए जरूरी संसाधन आसानी से मिल सकेंगे।
एफपीओ और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी
ललितपुर में इस योजना के क्रियान्वयन के दौरान गोशालाओं, स्थानीय किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को आपसी तालमेल से जोड़ने की पुख्ता योजना बनाई गई है। इसके तहत कृषि उपज के संग्रहण, प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बेहतर विपणन की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाएगी, ताकि किसानों को उनके उत्पादों का बाजार में उचित और लाभकारी मूल्य मिल सके।