देश की सीमाओं की रक्षा करने के बाद अब समाज के सबसे जरूरतमंद और कमजोर वर्गों की सुध लेना ही असली राष्ट्रधर्म है। इसी प्रेरणा और जज्बे के साथ उत्तराखंड के कोटद्वार में पूर्व सैनिकों ने एक बार फिर समाज सेवा का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। कोटद्वार स्थित बेस हॉस्पिटल के मेडिकल वार्ड में अब उन मरीजों के लिए राहत की राह आसान हो गई है, जो आर्थिक तंगी या शारीरिक लाचारी के कारण बुनियादी मेडिकल सुविधाएं जुटाने में असमर्थ हैं। पूर्व सैनिक संघर्ष समिति की ओर से आज अस्पताल प्रशासन को विभिन्न प्रकार की मेडिकल कंफर्ट सामग्री सौंपी गई है, जिससे सीधे तौर पर गरीब और असहाय रोगियों को लाभ मिलेगा।
हौसलों से भरी उड़ान: कोटद्वार के पूर्व सैनिकों का नया अभियान
कवि की वह प्रसिद्ध पंक्ति—"मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है!"—कोटद्वार के इन पूर्व सैनिकों के जीवन पर एकदम सटीक बैठती है। सेना की वर्दी उतारने के बाद भी इनका अनुशासन, देशप्रेम और जनसेवा का जज़्बा कम नहीं हुआ है। पूर्व सैनिक संघर्ष समिति, कोटद्वार के निरंतर क्रियाकलापों और सामाजिक मुद्दों पर उनकी मुखरता व प्रामाणिकता ने आज आम जनता के बीच एक अटूट विश्वास पैदा कर दिया है
इसी भरोसे और सामाजिक सरोकार की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए, समिति ने आज एक विशेष अभियान के तहत बेस हॉस्पिटल के मेडिकल वार्ड के लिए जरूरी चिकित्सा सामग्री भेंट की है। इस कदम से अस्पताल में इलाज करा रहे उन गरीब मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें महंगी मेडिकल सामग्री खरीदने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।अस्पताल प्रशासन को सौंपी गई ये जरूरी मेडिकल सामग्री
समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाएं और राहत पहुंचाने के उद्देश्य से समिति ने आज अस्पताल को कई महत्वपूर्ण वस्तुएं दान की हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- डायपर: लंबे समय से बिस्तर पर रहने वाले और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए।
- सर्जिकल ग्लव्स: स्वच्छता और सुरक्षित चिकित्सा देखभाल के लिए आवश्यक सामग्री।
- एयर मैट्रेस (हवा गद्दे): लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने वाले मरीजों को बेडसोर (घाव) से बचाने के लिए।
- अन्य आवश्यक चिकित्सा सामग्री: मरीजों की त्वरित और बेहतर देखभाल से जुड़ी विभिन्न वस्तुएं।
यह तमाम राहत सामग्री समिति के अध्यक्ष महेन्द्र पाल सिंह रावत के नेतृत्व में पहुंचे एक उच्चस्तरीय पूर्व सैनिक प्रतिनिधिमंडल द्वारा अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों को आधिकारिक रूप से सौंपी गई।
प्रतिनिधि मंडल में शामिल रहे ये प्रमुख चेहरे
इस नेक और मानवीय कार्य के दौरान पूर्व सैनिकों का अनुशासन और एकजुटता साफ तौर पर देखने को मिली। अस्पताल पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में समिति के प्रमुख पदाधिकारी और सदस्य पूरी मुस्तैदी के साथ मौजूद रहे। इस प्रतिनिधिमंडल में निम्नलिखित गणमान्य लोग शामिल थे:
- महेन्द्र पाल सिंह रावत: अध्यक्ष, पूर्व सैनिक संघर्ष समिति
- मेहरवान सिंह चौहान: लेखा निरीक्षक
- देवेंद्र सिंह बिष्ट: कोषाध्यक्ष
- ठाकुर सिंह: उपाध्यक्ष
- अनसूया प्रसाद सेमवाल: उपाध्यक्ष
- जीत सिंह: सक्रिय सदस्य
अस्पताल प्रशासन ने पूर्व सैनिकों के इस प्रयास की भूरी-भूरी प्रशंसा की है और इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायी कदम बताया है।
दिव्यांगजनों की सहायता से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं तक का सफर
यह पहला मौका नहीं है जब पूर्व सैनिक संघर्ष समिति ने इस तरह का मानवीय कार्य किया हो। इससे पहले भी समिति के माध्यम से कई दिव्यांगजनों को उनकी जरूरत के अनुसार व्हील चेयर और अन्य सहायक उपकरण वितरित किए जा चुके हैं। समिति लगातार धरातल पर उतरकर उन लोगों की मदद कर रही है, जिनकी आवाज शासन-प्रशासन या मुख्यधारा तक आसानी से नहीं पहुंच पाती है।
समिति के पदाधिकारियों का साफ कहना है कि उनका मूल मंत्र और ध्येय पूरी तरह से स्पष्ट और अडिग है:
पहले देश सेवा, अब समाज सेवा।
हमारा समाज स्वस्थ रहे, यही हमारी कामना है।
स्थानीय स्तर पर हो रही है इस पहल की सराहना
सितंबर 2026 की इस महत्वपूर्ण घटना के बाद से ही कोटद्वार और आसपास के पूरे इलाके में इस कार्य की चर्चाएं जोरों पर हैं। स्थानीय नागरिकों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों ने पूर्व सैनिकों की इस सोच की सराहना की है। जानकारों का मानना है कि यदि समाज के अन्य संगठन और सक्षम लोग भी इसी प्रकार आगे आएं, तो अस्पतालों में आने वाले गरीब और असहाय मरीजों का दर्द काफी हद तक कम किया जा सकता है।
पूर्व सैनिकों की यह पहल साबित करती है कि वर्दी चाहे शरीर पर हो या न हो, देश और समाज के प्रति सेवाभाव कभी सेवानिवृत्त नहीं होता। कोटद्वार की यह समिति आज युवाओं और अन्य सामाजिक संगठनों के लिए एक मिसाल बन चुकी है, जो दिखाती है कि सच्चे समर्पण से किस प्रकार समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।