शहरी गरीबों के सपनों के आशियाने को साकार करने की दिशा में पहाड़ी राज्य उत्तराखंड ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत आवासों की ग्राउंडिंग में पूरे देश में शानदार प्रदर्शन करते हुए उत्तराखंड ने पहला स्थान हासिल किया है। इस बड़ी उपलब्धि के बाद राज्य के प्रशासनिक हलकों में उत्साह का माहौल है। देश की राजधानी नई दिल्ली के प्रतिष्ठित विज्ञान भवन में आयोजित एक गरिमापूर्ण समारोह के दौरान यह सम्मान राज्य की झोली में गिरा है।
विज्ञान भवन में मिला राष्ट्रीय सम्मान
सोमवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने उत्तराखंड के प्रतिनिधियों को इस राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा। राज्य की तरफ से शहरी विकास विभाग के निदेशक और अपर सचिव विनोद गोस्वामी तथा शहरी विकास निदेशालय के सहायक निदेशक राजीव पांडे ने संयुक्त रूप से यह प्रतिष्ठित पुरस्कार ग्रहण किया। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि यदि योजनाओं का क्रियान्वयन सही दिशा और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के साथ किया जाए, तो परिणाम कितने बेहतरीन आ सकते हैं।
समारोह के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए निदेशक विनोद गोस्वामी ने इस सफलता के पीछे की पूरी रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि किस तरह से राज्य सरकार और स्थानीय निकायों ने मिलकर दिन-रात मेहनत की है ताकि हर जरूरतमंद तक समय पर छत पहुंचाई जा सके।
कितने आवासों को मिली मंजूरी और क्या है ग्राउंडिंग की स्थिति?
आंकड़ों पर गौर करें तो प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत उत्तराखंड के लिए कुल 3,979 आवास स्वीकृत किए गए हैं। इन स्वीकृत आवासों में से अब तक 1,867 आवासों की ग्राउंडिंग का काम सफलताપૂર્વक पूरा किया जा चुका है। केंद्र सरकार ने इसी साल अगस्त के महीने में 1,647 अतिरिक्त आवासों को अपनी मंजूरी प्रदान की थी, जिसके एवज में सितंबर माह में ही राज्य सरकार को निर्धारित धनराशि भी जारी कर दी गई थी।
विभाग के अनुसार, केंद्र सरकार से अब तक कुल 2,332 आवासों के निर्माण के लिए प्रत्यक्ष रूप से धनराशि अवमुक्त की जा चुकी है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस अवमुक्त धनराशि के सापेक्ष लगभग 88 प्रतिशत आवासों का निर्माण कार्य धरातल पर शुरू भी किया जा चुका है। स्थानीय निकायों को तेजी से फंड ट्रांसफर किया जा रहा है ताकि बाकी बचे आवासों की ग्राउंडिंग भी बिना किसी रुकावट के पूरी की जा सके।
पीएम आवास योजना 1.0 की सफलता का सफर
उत्तराखंड की सफलता केवल नए चरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पहले चरण (पीएम आवास योजना 1.0) का ट्रैक रिकॉर्ड भी बेहद शानदार रहा है। पुराने आंकड़ों पर नजर डालें तो पहले चरण के तहत राज्य में कुल 62,272 आवास स्वीकृत किए गए थे। इन कठिन लक्ष्यों को पार करते हुए राज्य ने इनमें से 53,320 आवासों का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
- केंद्रीय और राज्य का सहयोग: इस विशाल प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने के लिए केंद्र सरकार ने केंद्रीय अंश के रूप में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की। वहीं, राज्य सरकार ने भी अपनी तरफ से करीब 300 करोड़ रुपये का राज्यांश उपलब्ध कराया।
- बीएलसी घटक (Beneficiary Led Construction): इस घटक के अंतर्गत व्यक्तिगत स्तर पर कुल 19,380 आवासों का निर्माण पूरा किया जा चुका है।
- एएचपी घटक (Affordable Housing in Partnership): भागीदारी आधारित किफायती आवास योजना के तहत लगभग 15,960 आवासों में से 11,848 से ज्यादा यूनिट्स पूरी हो चुकी हैं, जबकि बाकी बची हुई यूनिट्स अपने निर्माण के अंतिम चरण में हैं।
- सीएलएसएस घटक (Credit Linked Subsidy Scheme): ऋण आधारित ब्याज सब्सिडी योजना के माध्यम से राज्य के 19,190 पात्र परिवारों को बैंकों के जरिए ब्याज सब्सिडी का सीधा लाभ पहुंचाया गया है।
पारदर्शिता और प्रशासनिक समन्वय की बड़ी भूमिका
किसी भी योजना की सफलता कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर उसकी रफ्तार से तय होती है। उत्तराखंड शहरी विकास विभाग ने इस बात को भली-भांति समझा है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग के लिए राज्य स्तर से लेकर निकाय स्तर तक एक मजबूत समन्वय स्थापित किया गया है। संबंधित कार्यदायी संस्थाओं के साथ लगातार बैठकें और अनुश्रवण (Monitoring) किया जा रहा है ताकि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लेटलतीफी न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी भूगोल और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उत्तराखंड का यह प्रदर्शन अन्य बड़े राज्यों के लिए एक मिसाल बन गया है। आवास विहीन परिवारों को समयबद्ध तरीके से पक्के मकान उपलब्ध कराने का यह अभियान राज्य के सामाजिक ताने-बाने को मजबूत कर रहा है।
आगे की राह और भविष्य की योजनाएं
राष्ट्रीय स्तर पर मिले इस सम्मान ने उत्तराखंड शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ा दी है। विभाग का मुख्य लक्ष्य अब यह सुनिश्चित करना है कि जो आवास निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं, उन्हें तय सीमा के भीतर पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए। साथ ही, जिन नए आवासों के लिए हाल ही में बजट जारी हुआ है, उनकी जमीनी शुरुआत को बिना किसी प्रशासनिक अड़चन के तेजी से आगे बढ़ाया जाए।
उत्तराखंड की यह जीत केवल एक पुरस्कार भर नहीं है, बल्कि यह उन हजारों गरीब परिवारों के विश्वास की जीत है, जिन्होंने कभी अपने पक्के घर का सपना देखा था और आज वह सपना हकीकत में बदलता हुआ साफ नजर आ रहा है।