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किस्त न देने पर छीना ऑटो, वाराणसी में पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

किस्त न देने पर छीना ऑटो, वाराणसी में पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

वाराणसी के लालपुर-पांडेयपुर थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक गरीब ऑटो चालक की रोजी-रोटी का इकलौता साधन तब छिन गया, जब वह महिला समूह के कर्ज की साप्ताहिक किस्त समय पर नहीं चुका पाया। आरोप है कि किस्त में कुछ हफ्तों की देरी होने पर न केवल उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई, बल्कि उसका सीएनजी ऑटो भी जबरन छीन लिया गया। स्थानीय पुलिस चौकी से न्याय न मिलने पर अब यह पीड़ित ड्राइवर सीधे डीसीपी वरुणा के दरवाजे पर न्याय की गुहार लगाने पहुंचा है।

घटना का पूरा वाकया: कैसे दिया गया वारदात को अंजाम?

पीड़ित ऑटो चालक रामचंद्र चौहान ने जो आपबीती सुनाई है, वह किसी फिल्मी सीन से कम नहीं है। घटना 30 सितंबर की शाम की है। रामचंद्र अपना किराए का सीएनजी ऑटो (रजिस्ट्रेशन नंबर - UP 65 AT 4796) लेकर सड़क पर उतरा था ताकि अपने परिवार का पेट पाल सके। इसी दौरान चौकाघाट जाने के लिए चार सवारियों ने उसका ऑटो बुक किया।

सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन जैसे ही ऑटो केशव कुंज के पास पहुंचा, उन चारों सवारियों ने वाहन को रुकवाने के लिए कहा। गाड़ी रुकते ही आरोपियों ने कथित तौर पर रामचंद्र के साथ मारपीट शुरू कर दी। इतना ही नहीं, उसका मोबाइल फोन भी छीन लिया गया ताकि वह किसी से मदद न मांग सके और इसके बाद वे लोग उसका ऑटो लेकर फरार हो गए।

पीड़ित रामचंद्र ने इस मामले में बीरेंद्र सोनकर, मुस्कान सोनकर, बबलू मुसलमान और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ नामजद आरोप लगाए हैं।

बकाया किस्त थी तो क्या कानून हाथ में लेने का हक है?

इस पूरी घटना ने समाज के सामने कई बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रामचंद्र का कहना है कि उसके बेटे की तबीयत बेहद खराब चल रही थी, जिस वजह से वह पिछले कुछ हफ्तों से समूह के पैसों की किस्त नहीं चुका पाया था। हालांकि, कर्ज चुकाना उसकी जिम्मेदारी थी, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी व्यक्ति का पैसा बकाया है, तो क्या उसे सड़क पर मारपीट करने और किसी की रोजी-रोटी का साधन छीनने का अधिकार मिल जाता है?

यदि विवाद पैसों के लेन-देन का था, तो उसे कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए था। सड़क पर इस तरह से कानून को अपने हाथ में लेना और गुंडागर्दी के बल पर वाहन छीनना किस न्याय प्रणाली का हिस्सा है? क्या आर्थिक तंगी से जूझ रहे एक गरीब इंसान की कोई गरिमा या अधिकार नहीं हैं?

पांडेयपुर चौकी पर क्यों नहीं निकला कोई निष्कर्ष?

घटना के तुरंत बाद पीड़ित रामचंद्र न्याय की उम्मीद लेकर लालपुर-पांडेयपुर थाने की पांडेयपुर चौकी पहुंचा था। उसने वहां अपनी शिकायत दर्ज कराई और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हैरान करने वाली बात यह है कि चौकी पर दोनों पक्ष आमने-सामने आए, लेकिन इसके बावजूद पुलिस किसी भी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई।

जब एक पीड़ित थाने या चौकी की दहलीज तक पहुंच जाता है, तो वहां से उसे बैरंग लौटाना स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सीधा सवालिया निशान लगाता है:

  • क्या चौकी स्तर पर मामले की कोई गंभीर जांच की गई?
  • क्या आरोपी पक्षों से कड़ाई से पूछताछ करके ऑटो बरामद करने का प्रयास हुआ?
  • जब दोनों पक्ष चौकी पर मौजूद थे, तो पुलिस ने तुरंत एक्शन क्यों नहीं लिया?
  • क्या एक गरीब फरियादी को न्याय पाने के लिए भी आला अधिकारियों के चक्कर काटने ही पड़ेंगे?

डीसीपी वरुणा के दरबार में पहुंची गुहार

चौकी स्तर पर निराशा हाथ लगने के बाद, पीड़ित ने किसी तरह डीसीपी वरुणा का सीयूजी मोबाइल नंबर हासिल किया और अपनी आपबीती सीधे उन्हें सुनाई। डीसीपी ने उसकी पूरी बात सुनने के बाद उसे अपने कार्यालय बुलाया।

अब यह मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आ चुका है, जिससे स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर भी दबाव बढ़ गया है। यह देखना बेहद अहम होगा कि क्या डीसीपी कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद पीड़ित को उसका ऑटो वापस मिल पाता है या नहीं। साथ ही, जिन लोगों ने कानून को अपने हाथ में लेकर इस घिनौनी हरकत को अंजाम दिया है, उन पर पुलिसिया शिकंजा कब कसा जाता है?

जिम्मेदारों की भूमिका पर उठ रहे सवाल

इस पूरे प्रकरण में लालपुर-पांडेयपुर थाना प्रभारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। क्या थाना प्रभारी को इस पूरी घटना की जानकारी थी? यदि उन्हें जानकारी थी, तो चौकी स्तर पर त्वरित कार्रवाई क्यों नहीं की गई? और यदि उन्हें जानकारी नहीं थी, तो उनके अपने क्षेत्र में इस तरह की अराजकता कैसे फैल रही है?

एक गरीब के लिए ऑटो केवल लोहे के चार पहिये नहीं हैं, बल्कि वह उसके बच्चों की दो वक्त की रोटी, पढ़ाई और घर के चूल्हे का एकमात्र जरिया है। ऐसे वाहन को छीन लेना किसी परिवार की आजीविका पर सीधा हमला है।

नोट: इस लेख में लगाए गए सभी आरोप पीड़ित रामचंद्र चौहान के बयानों पर आधारित हैं। इस मामले में पुलिस की आधिकारिक जांच और आरोपियों के पक्ष सामने आने के बाद ही पूरी सच्चाई और स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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