वाराणसी के सुजाबाद बंधा रोड इलाके से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। लापरवाही की एक ऐसी कीमत एक परिवार को चुकानी पड़ी है जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती। मंगलवार की सुबह एक मामूली सी दिखने वाली लापरवाही ने 35 वर्षीय एक हंसते-खेल्ते परिवार का इकलौता सहारा छीन लिया। खोरा बीर बाबा मंदिर के पास बिजली के कटे हुए तार की चपेट में आने से एक वाहन चालक की जान चली गई, जिससे पीछे छूट गईं दो मासूम बेटियां और एक बेसहारा पत्नी।
सड़क किनारे खड़ी गाड़ी बनी मौत का जाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान 35 वर्षीय विष्णु साहनी के रूप में हुई है, जो पेशे से एक वाहन चालक (ड्राइवर) थे और अपनी मेहनत से परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। मंगलवार की सुबह विष्णु अपने रोजाना के काम के सिलसिले में सुजाबाद बंधा रोड पर स्थित खोरा बीर बाबा मंदिर के पास पहुंचे। वहां सड़क के किनारे उनकी गाड़ी खड़ी थी।
विष्णु जैसे ही गाड़ी को स्टार्ट करने के लिए उसके पास पहुंचे, उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि मौत उनके इतनी करीब है। दरअसल, सड़क के ठीक ऊपर से गुजरने वाला या आसपास लटका हुआ बिजली का एक कटा हुआ तार उनकी गाड़ी के संपर्क में आ चुका था। इस वजह से पूरी गाड़ी में हाई-वोल्टेज करंट उतर आया था। जैसे ही विष्णु ने गाड़ी को छुआ, वह भयानक करंट की चपेट में आ गए और संभलने का मौका तक नहीं मिला।
चीख-पुकार के बाद मचा कोहराम
यह भयावह मंजर देख आसपास के स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े। लोगों ने किसी तरह बिजली के प्रवाह को बंद करवाने का प्रयास किया और विष्णु को उस स्थिति से बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। करंट का झटका इतना तीव्र था कि विष्णु गंभीर रूप से झुलस चुके थे। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही मृतक के घर में कोहराम मच गया। पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस घर में कुछ घंटे पहले तक सब कुछ सामान्य था, वहां अब मातम और सन्नाटा पसर गया है।
दो मासूम बेटियों के सिर से उठा पिता का साया
इस हादसे का सबसे डरावना पहलू यह है कि विष्णु अपने पीछे दो बहुत ही छोटी और मासूम बेटियों को छोड़ गए हैं। उन बच्चियों को अभी यह भी ठीक से समझ नहीं आ रहा है कि आखिर उनके जीवन में क्या तबाही आ गई है। वे बस अपलक अपनी मां को रोते हुए देख रही हैं। एक पिता का साया उठ जाने से इन दोनों बच्चियों के सिर से ममता और सुरक्षा का वह मजबूत पहरा हमेशा के लिए छिन गया है, जो उन्हें भविष्य की धूप से बचाता।
पड़ोसियों और रिश्तेदारों का कहना है कि विष्णु बेहद मेहनतकश इंसान थे और दिन-रात मेहनत करके अपने परिवार का पेट पालते थे। उनके जाने के बाद अब इस परिवार के सामने आर्थिक संकट का भी एक बहुत बड़ा पहाड़ खड़ा हो गया है।
प्रशासन और बिजली विभाग की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
इस दुखद घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में बिजली विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का आरोप है कि इलाके में कई जगहों पर बिजली के तार जर्जर स्थिति में हैं या कटे-लटके हुए हैं, जिसकी शिकायत कई बार विभाग से की जा चुकी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सोए रहते हैं।
- लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार: क्या जनता को यूं ही बेसहारा मरने के लिए छोड़ दिया जाएगा?
- रखरखाव में भारी चूक: सड़कों के किनारे इस तरह खुलेआम लटकते या कटे तार किसी बड़े हादसे को खुद न्योता देते हैं।
- त्वरित कार्रवाई की मांग: स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की गंभीरता से जांच हो और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।
निष्कर्ष: सबक जो कभी न सीखे जाने का गम
यह दुर्घटना सिर्फ एक इकलौता हादसा नहीं है, बल्कि यह हमारे बुनियादी ढांचे और शहरी प्रबंधन की लचर व्यवस्था का एक आईना है। एक तरफ जहां तकनीक और विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ जरा सी लापरवाही किसी की पूरी दुनिया उजाड़ देती है। जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग समय रहते जागे ताकि भविष्य में किसी अन्य विष्णु को इस तरह अपनी जान न गंवानी पड़े और किसी मासूम बच्ची के सिर से उसके पिता का साया न छिने।