दोस्ती का रिश्ता इस दुनिया में सबसे पवित्र और भरोसेमंद माना जाता है, लेकिन जब यही रिश्ता अविश्वास और लालच की भेंट चढ़ जाता है, तो इंसानियत का लहू सूख जाता है। हरियाणा के सोनीपत जिले से एक ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने दोस्ती की परिभाषा को तार-तार कर दिया है। हरिद्वार की एक धार्मिक यात्रा के दौरान गायब हुए युवक विक्की की मिस्ट्री का पुलिस ने करीब 40 दिन बाद ऐसा खौफनाक खुलासा किया है, जिसे सुनकर हर कोई सन्न रह गया है। विक्की की हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि उसके जिगरी दोस्तों ने ही महज 18 हजार रुपये के शक में बेहद बेरहमी से कर दी थी।
हरिद्वार से लौटने के बाद अचानक गायब हो गया था विक्की
घटना की शुरुआत 01 अगस्त को हुई थी, जब सोनीपत का रहने वाला विक्की अपने दो दोस्तों विक्रम और प्रीतम के साथ पवित्र नगरी हरिद्वार घूमने के लिए गया था। उस समय तक परिजनों को यह अंदाजा भी नहीं था कि यह यात्रा उनके बेटे की आखिरी यात्रा साबित होगी। हरिद्वार से घूमने के बाद जब तीनों युवक वापस सोनीपत लौटे, तो कुछ दिनों की शांति के बाद विक्रम और प्रीतम दोबारा विक्की के घर पहुंचे। वे उसे किसी काम या घूमने के बहाने अपने साथ दोबारा घर से बाहर ले गए।
उसके बाद से विक्की का कुछ अता-पता नहीं चला। वह न तो घर लौटा और न ही उसका मोबाइल फोन चालू मिला। परिजनों ने शुरुआत में अपने स्तर पर उसकी तलाश की, लेकिन जब उसका कोई सुराग नहीं लगा, तो उनकी चिंता बढ़ती चली गई। परिवार ने तुरंत स्थानीय थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए फौरन जांच का दायरा बढ़ाया और गायब युवक के दोस्तों पर अपनी नजरें गड़ाईं।
पुलिस की पूछताछ में खुला खौफनाक राज
परिजनों की शिकायत और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर पुलिस ने जब विक्रम और प्रीतम को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ शुरू की, तो उनके चेहरे के रंग उड़ गए। शुरुआती टालमटोल के बाद दोनों ने जो सच उगला, उसने पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने ही विक्की को रास्ते से हटाने की साजिश रची थी और उसकी हत्या कर दी है।
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने गोहाना के पास पानीपत बाईपास के नीचे बनी एक पुलिया के पास से विक्की का शव बरामद किया। चूंकि घटना को बीते हुए करीब 40 दिन हो चुके थे, इसलिए लंबे समय तक खुले आसमान के नीचे और नमी में पड़े रहने के कारण विक्की का शव पूरी तरह से कंकाल में तब्दील हो चुका था। शव की ऐसी दर्दनाक हालत देखकर मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए।
महज 18 हजार रुपये के विवाद में रची गई थी खूनी साजिश
आखिर एक दोस्ती इतनी बेरहम कैसे हो गई कि उसने जान ले ली? इस सवाल के जवाब में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। एसीपी राजपाल ने मीडिया को जानकारी दी कि प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि जब ये तीनों दोस्त हरिद्वार में थे, तब प्रीतम के करीब 18 हजार रुपये कहीं गुम हो गए थे। प्रीतम को किसी बाहरी व्यक्ति पर नहीं, बल्कि अपने ही दोस्त विक्की पर शक था कि उसी ने उसके रुपये चुराए हैं।
इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ, जो समय के साथ और गहराता गया। विक्की द्वारा पैसे चुराने की बात से इंकार करने के बावजूद विक्रम और प्रीतम के मन में उसके प्रति दुश्मनी बैठ चुकी थी। उन्होंने विक्की को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का मन बना लिया और उसकी हत्या की पूरी योजना तैयार कर ली।
महज 10 रुपये के चाकू से काता गला
अपराध की योजना कितनी शातिर थी, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आरोपियों ने वारदात को अंजाम देने के लिए बेहद मामूली सी तैयारी की थी। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने हत्या को अंजाम देने के लिए मात्र 10 रुपये में एक चाकू खरीदा था। इसके बाद वे विक्की को अपने साथ सुनसान इलाके में ले गए, जहां उन्होंने योजना के मुताबिक चाकू से उसका गला रेत दिया।
वारदात को अंजाम देने के बाद उन्होंने साक्ष्यों को छिपाने की नीयत से विक्की के शव को पानीपत बाईपास के पास स्थित पुलिया के नीचे फेंक दिया और वहां से फरार हो गए। उन्हें लगा कि इस तरह से शव को ठिकाने लगाने के बाद कभी सच सामने नहीं आएगा और वे कानून की पकड़ से बच जाएंगे।
कंकाल बन चुके शव की ऐसे हुई शिनाख्त
हत्याकांड के इतने हफ्तों बाद जब शव बरामद हुआ, तो उसकी पहचान करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती था क्योंकि चेहरा और शरीर पूरी तरह से विकृत हो चुका था। पुलिस ने डेडबॉडी को तुरंत खानपुर कलां स्थित बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। विक्की के छोटे भाई अक्षय ने बताया कि आरोपियों ने संभवतः दो या तीन अगस्त के आसपास ही इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दे दिया था।
शव के ऊपरी हिस्से से मिले एक पहचान पत्र (आईडी कार्ड) और कपड़ों के अवशेषों के आधार पर मृतक की शिनाख्त हुई। करीब 35 वर्षीय विक्की पेशे से ड्राइवर था और अपने परिवार के गुजारे के लिए मेहनत-मशक्कत करता था। उसकी मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और माता-पिता तथा भाई-बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रूखी गांव और भटगांव निवासी दोनों आरोपियों विक्रम और प्रीतम को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब उन्हें अदालत में पेश करके रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है ताकि हत्याकांड से जुड़े तमाम पहलुओं को खंगाला जा सके।
एसीपी ने बताया कि रिमांड के दौरान पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि इस खौफनाक साजिश में क्या कोई और भी शामिल था या नहीं। इसके अलावा, वारदात से पहले और बाद में दोनों आरोपी किन-किन लोगों के संपर्क में थे, इसकी भी बारीकी से जांच की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर समाज में घटते भरोसे और छोटी-छोटी बातों पर इंसानी रिश्तों के कत्ल होने की प्रवृत्ति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।