कोलकाता में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने राज्य के स्कूलों और कॉलेजों में हर साल तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की वकालत की है, जिसमें भाषण, प्रश्नोत्तरी और वाद-विवाद जैसी प्रतियोगिताएं शामिल होंगी।
अपने गृह जिले पूर्व मेदिनीपुर के रामनगर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को राष्ट्र विरोधी तत्वों और वैचारिक बुराइयों से बचाना बेहद जरूरी है। उन्होंने बिना नाम लिए परोक्ष कटाक्ष करते हुए कहा कि छात्रों को तिलचट्टे और खटमल जैसे दुर्गुणों के प्रभाव से दूर रखना आवश्यक है। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि ऐसी प्रवृत्तियों को रोकने के लिए सख्ती की जरूरत होती है।
पिछली सरकारों पर विरासत और संस्कृति मिटाने का आरोप
मुख्यमंत्री ने वामपंथी दलों के 34 वर्षों के शासन और उसके बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार के 15 साल के कार्यकाल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इन पिछली सरकारों ने राज्य के लोगों की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को मिटाने का सुनियोजित प्रयास किया।
उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि पिछली सरकारों के दौरान शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) में विद्यार्थियों के नामांकन को हतोत्साहित किया गया और इसके स्थान पर ‘जय हिंद वाहिनी’ को शुरू किया गया। उनके अनुसार, एनसीसी से जुड़ने पर युवाओं को सशस्त्र बलों में अग्निवीर के रूप में चयन में सीधी मदद मिल सकती थी। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूली इतिहास की पुस्तकों में उन लोगों की प्रशंसा पढ़ाई गई जिन्होंने सिंगूर से टाटा मोटर्स की परियोजना को हटाने में भूमिका निभाई थी।
नई शिक्षा नीति और मोबाइल फोन पर प्रतिबंध
शिक्षा प्रणाली में सुधार और बदलाव की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को लागू करने की औपचारिक घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले शैक्षणिक सत्र से पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।
विद्यार्थियों के डिजिटल उपयोग पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह 12वीं कक्षा तक के स्कूली छात्रों द्वारा मोबाइल फोन के इस्तेमाल के पूरी तरह खिलाफ हैं। पिछली सरकार द्वारा 11वीं कक्षा के विद्यार्थियों को मोबाइल खरीदने के लिए 10,000 रुपये दिए जाने की योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसकी बजाय सरकार अब छात्रों की पढ़ाई में मदद के लिए टैबलेट उपलब्ध कराएगी।
साहित्यिक सामग्री और वैचारिक नियंत्रण पर रुख
मुख्यमंत्री ने यह भी कड़ा रुख अपनाया कि राज्य में किसी भी ऐसी साहित्यिक सामग्री की अनुमति नहीं दी जाएगी जो भारत-विरोधी हो, सनातन परंपरा के खिलाफ हो या किसी भी धर्म की भावनाओं को आहत करती हो। वामदलों द्वारा दुर्गापूजा के दौरान लगाए जाने वाले पुस्तक स्टालों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि जनता ऐसी विचारधाराओं को पहले ही खारिज कर चुकी है।
यह पूरी बातचीत और बयानबाजी तब सामने आई जब मुख्यमंत्री रामनगर में हाल ही में कोलकाता के चोरबागान दुर्गापूजा पंडाल में 17 अक्टूबर को हुई भगदड़ में जान गंवाने वाली पीड़िता कल्पना जाना के परिवार से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को मुलाकात के दौरान सरकारी सहायता राशि का चेक भी सौंपा।