दुर्गापुर स्थित सेल की इस महत्वपूर्ण इकाई के विस्तार से प्लांट का भविष्य सुरक्षित होगा और मिश्र धातु उत्पादन को नई तकनीकी ताकत मिलेगी।
पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में स्थित स्टील अथारिटी आफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की इकाई एलाय स्टील्स प्लांट (एएसपी) के कायाकल्प और विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सेल बोर्ड ने इस परियोजना के लिए लगभग 1600 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय से प्लांट के आधुनिकीकरण का रास्ता साफ हो गया है, जिससे आने वाले समय में उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
राष्ट्रीय इस्पात नीति के तहत उठाया गया कदम
सेल के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2017 की राष्ट्रीय इस्पात नीति के तहत देश में कुल इस्पात उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर सालाना 300 मिलियन टन तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी व्यापक योजना के तहत सेल द्वारा अकेले 50 मिलियन टन उत्पादन क्षमता का विस्तार किया जाना है। इस राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने की प्रक्रिया में अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात कारखानों के साथ-साथ एलाय स्टील्स प्लांट का विस्तार भी अत्यंत आवश्यक माना गया था।
सेल बोर्ड की गत 25 सितंबर को आयोजित 537वीं बैठक में इस 1600 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी विस्तार परियोजना को औपचारिक स्वीकृति प्रदान की गई। इसके उपरांत, छह अक्टूबर को इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक निर्देश भी जारी कर दिए गए।
परियोजना के तहत स्थापित होंगी आधुनिक तकनीक इकाइयां
प्रस्तावित आधुनिकीकरण कार्य के अंतर्गत प्लांट में कई अत्याधुनिक उत्पादन सुविधाओं को जोड़ा जाएगा। इनमें एक नया इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (ईएएफ), एक उन्नत बिलेट-कम-ब्लूम कास्टर और तैयार छड़ तथा तार के निर्माण के लिए एक नया बार मिल शामिल है। सेल प्रबंधन ने इन सभी निर्माण और स्थापना कार्यों को पूरा करने के लिए आगामी 30 से 36 महीने का लक्ष्य तय किया है।
विनिवेश की आशंका से लेकर श्रमिक राहत तक का सफर
इस प्लांट के इतिहास में निजीकरण और विनिवेश के खिलाफ लंबा संघर्ष भी शामिल है। वर्ष 2016 में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने एएसपी के रणनीतिक विनिवेश के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई थी। इसके विरोध में स्थानीय श्रमिक संगठनों ने वर्ष 2017 से कड़ा आंदोलन छेड़ दिया था। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब वर्ष 2018 में केंद्र सरकार ने संभावित खरीदारों से रुचि पत्र मांगने के लिए वैश्विक निविदा जारी कर दी।
हालांकि, श्रमिकों के लगातार और मुखर विरोध के दबाव के चलते वर्ष 2019 में सेल ने रुचि पत्र आमंत्रित करने की प्रक्रिया को आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया। इस प्रक्रिया के रद्द होने के बाद से ही प्लांट के भविष्य को लेकर श्रमिकों में असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ था। अब इस 1600 करोड़ रुपये की नई विस्तार परियोजना के मंजूर होने से श्रमिक संगठनों और कर्मचारियों ने बड़ी राहत की सांस ली है।
रक्षा क्षेत्र और हाई-स्पीड रेलवे में है प्लांट का विशेष योगदान
दुर्गापुर के इस कारखाने में उत्पादन का एक लंबा इतिहास रहा है। एएसपी में 23 जनवरी 1965 को आंशिक रूप से उत्पादन का कार्य शुरू हुआ था, जो आगे चलकर वर्ष 1971 के आसपास पूर्ण पैमाने पर शुरू हो गया। वर्ष 1973 में विधिवत स्थापित इस कारखाने की विशेषता यह है कि यहां लगभग 500 प्रकार के विशिष्ट मिश्र धातु इस्पात (स्पेशल एलॉय स्टील्स) तैयार किए जाते हैं।
इन विशेष धातुओं का उपयोग देश के रक्षा क्षेत्र में पनडुब्बियों और मिसाइलों के निर्माण के अलावा हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं जैसे कई अन्य सामरिक और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
श्रमिक संगठनों ने जताई मजबूत रोजगार की उम्मीद
प्लांट के इस फैसले पर श्रमिक वर्ग में भारी उत्साह देखा जा रहा है। एलाय स्टील्स वर्कर्स यूनियन से जुड़े इंटक के जिला अध्यक्ष सुभाष साहा ने इस निर्णय को श्रमिकों के लंबे और संघर्षपूर्ण आंदोलन का सकारात्मक परिणाम बताया है। उनके अनुसार, इस आधुनिकीकरण और विस्तार के पूरा होने से प्लांट आने वाले कई दशकों तक लगातार उत्पादन करने में सक्षम रहेगा। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि इससे कर्मचारियों का नौकरी के प्रति भरोसा मजबूत होगा और क्षेत्र के युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। स्थानीय श्रमिक संगठन लंबे समय से यह मांग उठाते रहे हैं कि परियोजना के निर्माण कार्यों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए।
भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के जिला महासचिव मृण्मय बंदोपाध्याय ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि बीएमएस नेतृत्व काफी समय से एएसपी के विस्तार की पुरजोर मांग कर रहा था। सेल बोर्ड के इस निर्णय से प्लांट से जुड़े श्रमिकों और उनके परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।