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चीन के शिजांग में कुदरत का भयंकर कहर, लैंडस्लाइड से 16 की मौत और 546 लापता

चीन के शिजांग में कुदरत का भयंकर कहर, लैंडस्लाइड से 16 की मौत और 546 लापता

प्रकृति का रौद्र रूप एक बार फिर एशियाई देशों को अपनी आगोश में ले चुका है। नेपाल के बाद अब पड़ोसी मुल्क चीन में कुदरत का ऐसा कहर बरपा है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। चीन के संवेदनशील और पहाड़ी माने जाने वाले शिजांग (Tibet/Xizang) क्षेत्र में सीमा के नजदीक स्थित एक व्यस्त बंदरगाह पर अचानक हुए भीषण भूस्खलन (Landslide) ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 16 लोगों की दर्दनाक मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 546 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस भयानक हादसे की चपेट में कई देशों के नागरिक आए हैं, जिनमें 49 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।

अचानक हुए भूस्खलन से सहम उठा इलाका

सरकारी और प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह त्रासद घटना शनिवार शाम करीब 6 बजे घटी। शिजांग के पास स्थित बंदरगाह क्षेत्र में अचानक पहाड़ों का एक बड़ा हिस्सा दरककर नीचे आ गिरा। इस मलबे की चपेट में वहां काम कर रहे मजदूर, स्थानीय लोग और विभिन्न देशों से पहुंचे यात्री आ गए। घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमों ने मोर्चा संभाल लिया, लेकिन भौगोलिक परिस्थितियां और लगातार खराब मौसम राहत कार्यों में भारी बाधा बन रहे हैं।

घटनास्थल पर मलबे के विशाल ढेर को हटाने के लिए भारी-भरकम मशीनों और आधुनिक उपकरणों को तैनात किया गया है। बचाव दल दिन-रात मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटे हैं, लेकिन लापता लोगों की भारी संख्या ने अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। मरने वालों का आंकड़ा अभी और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि कई लोग मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं।

23 देशों के 261 विदेशी नागरिकों से टूटा संपर्क

इस हादसे की विभीषिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि दुनिया के 23 अलग-अलग देशों के नागरिक प्रभावित हुए हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, भूस्खलन के बाद कुल 261 विदेशी नागरिकों से अब तक किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं हो पाया है। इन लापता विदेशी नागरिकों की सूची ने कई देशों की सरकारों को चिंता में डाल दिया है।

  • नेपाल: सबसे अधिक 104 नागरिक नेपाल के लापता बताए जा रहे हैं।
  • भारत: सूची में दूसरे स्थान पर भारत है, जिसके 49 नागरिक इस आपदा के बाद से लापता हैं।
  • लातविया: लातविया के 33 नागरिकों का भी अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है।
  • अमेरिका और ब्रिटेन: हादसे की चपेट में अमेरिका के 18 और ब्रिटेन के 15 नागरिक भी आए हैं।
  • अन्य देश: कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के 6-6, दक्षिण अफ्रीका के 4, जबकि मलेशिया, जर्मनी और रूस के 3-3 नागरिक लापता हैं। इसके अलावा आयरलैंड, एस्टोनिया, फ्रांस, नीदरलैंड और न्यूजीलैंड के नागरिक भी इस सूची में शामिल हैं।

भोटे कोशी नदी में उफान, नेपाल तक महसूस हुआ असर

इस प्राकृतिक आपदा का दायरा केवल चीन की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पड़ोसी देश नेपाल पर भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। भूस्खलन के बाद पास ही बहने वाली भोटे कोशी नदी में जलस्तर अचानक बढ़ गया है और इसके तेज बहाव की भयावह आवाजें सुनी जा रही हैं।

नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि रसुवा के जिला प्रशासन कार्यालय को भोटे कोशी नदी के पानी के अत्यधिक वेग के बारे में सूचना मिली है। प्रशासन ने रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों के नदी किनारे बसे इलाकों में रहने वाले लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतने और सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्देश दिया है।

नेपाल में पहले से ही बाढ़ का तांडव

गौरतलब है कि यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब नेपाल पहले से ही कुदरत के भीषण प्रकोप से जूझ रहा है। नेपाल में हालिया बाढ़ और बारिश जनित आपदाओं के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 675 तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा, देश भर में 2,400 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल के हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि वहां के अस्पतालों के मुर्दाघरों में शवों को रखने के लिए जगह कम पड़ने लगी है, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और मदद की गुहार

शिजांग में हुए इस भूस्खलन के बाद भारत सहित कई देशों के राजनयिक मिशन बीजिंग के संपर्क में हैं। लापता भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी और उनकी स्थिति की जानकारी लेने के लिए भारतीय दूतावास लगातार चीनी अधिकारियों के संपर्क में बना हुआ है। परिवारों में अपने प्रियजनों की सलामती को लेकर भारी बेचैनी और तनाव का माहौल है।

मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही गतिविधियों के कारण भूस्खलन का खतरा अभी भी टला नहीं है। राहत और बचाव कार्य में जुटे कर्मियों को भी सुरक्षित दूरी बनाए रखने की हिदायत दी गई है। जैसे-जैसे मलबे को हटाने का काम आगे बढ़ रहा है, स्थिति और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें शिजांग के इस राहत अभियान पर टिकी हैं, और हर कोई लापता लोगों के सुरक्षित मिलने की प्रार्थना कर रहा है।

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ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

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