दक्षिण कोरिया में एआई स्मार्ट चश्मों के बढ़ते इस्तेमाल और नकल के मामलों पर नकेल कसने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाने का फैसला किया है। देश की बेहद कठिन कॉलेज प्रवेश परीक्षा 'सुनुंग' के दौरान अब हाई-टेक नकल करने वालों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।
दक्षिण कोरियाई सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस स्मार्ट चश्मों के जरिए परीक्षा हॉल में नकल करने वाले छात्रों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। प्रस्तावित नए नियमों के तहत, यदि कोई छात्र स्मार्ट चश्मे के जरिए नकल करते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर न सिर्फ आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा, बल्कि उसे तीन साल तक कॉलेज प्रवेश परीक्षा देने से भी प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। मौजूदा नियमों के तहत इस तरह के अपराध के लिए एक साल तक परीक्षा प्रतिबंध का प्रावधान है।
नियमों में बदलाव और प्रशासनिक तैयारियां
दक्षिण कोरिया के शिक्षा मंत्रालय के अधिकारी ली जून-ह्युक ने न्यूज एजेंसी एएफपी को दी गई जानकारी में स्पष्ट किया है कि मंत्रालय स्मार्ट चश्मों के जरिए होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए सख्त आपराधिक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। हालांकि, आगामी महीने में आयोजित होने वाली परीक्षा में इन नए और कड़े नियमों के तत्काल लागू होने की संभावना कम है। अधिकारियों का तर्क है कि परीक्षा में केवल कुछ ही दिन शेष होने के कारण इतने कम समय में नियमों में संशोधन करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसलिए इन प्रस्तावों को आगामी सत्र से पूरी तरह लागू किए जाने की योजना है।
प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए परीक्षा के दौरान हर केंद्र पर एक विशेष कर्मचारी की तैनाती की जाएगी। इन कर्मचारियों की मुख्य जिम्मेदारी परीक्षा हॉल में प्रवेश करने वाले छात्रों के पास मौजूद संदिग्ध स्मार्ट चश्मों या ऐसे अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की पहचान करना होगी।
दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में शुमार 'सुनुंग'
दक्षिण कोरिया में उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली सुनुंग (Suneung) परीक्षा को वैश्विक स्तर पर सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में गिना जाता है। देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने के लिए इस परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना अनिवार्य माना जाता है। दक्षिण कोरियाई समाज में इस परीक्षा का महत्व केवल शैक्षणिक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बेहतर रोजगार, सामाजिक प्रतिष्ठा और वैवाहिक जीवन की संभावनाओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
इस परीक्षा की गंभीरता और व्यापक प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके अंग्रेजी लिसनिंग टेस्ट के दौरान लगभग 35 मिनट के लिए पूरे देश में उड़ानों के संचालन पर रोक लगा दी जाती है। इसके अलावा, छात्रों को परीक्षा केंद्रों तक समय पर पहुंचने में किसी प्रकार की असुविधा या ट्रैफिक जाम का सामना न करना पड़े, इसके लिए बैंकों और सरकारी कार्यालयों के कामकाज के घंटे भी एक घंटे आगे बढ़ाए जाते हैं ताकि कर्मचारी देर से पहुंच सकें। यह पूरी परीक्षा लगभग आठ घंटे तक एक मैराथन सत्र के रूप में चलती है। तुलनात्मक रूप से देखें तो इस परीक्षा में सफलता का प्रतिशत बेहद कम रहता है, जो कि भारत की प्रतिष्ठित आईआईटी प्रवेश परीक्षा के समकक्ष माना जाता है।
स्मार्ट चश्मों के बढ़ते मामलों के बाद आई सख्ती
सरकार द्वारा इस दिशा में सख्त रुख अपनाने के पीछे हाल ही में सामने आए कुछ गंभीर मामले हैं। राजधानी सियोल की एक यूनिवर्सिटी में निबंध परीक्षा के दौरान तीन छात्रों को स्मार्ट चश्मा पहने या अपने पास रखने के आरोप में पकड़ा गया था। इसके अलावा, विदेशी विश्वविद्यालयों जैसे ताइवान की नेशनल ताइवान यूनिवर्सिटी में भी एक छात्र को एआई स्मार्ट चश्मे की मदद से प्रवेश परीक्षा में नकल करने की कोशिश करते हुए अयोग्य घोषित किया जा चुका है।
वर्तमान समय में उपलब्ध एआई स्मार्ट चश्मों में उच्च क्षमता वाले कैमरे, वीडियो रिकॉर्डिंग और एआई असिस्टेंट जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद होती हैं। इनकी मदद से न केवल प्रश्न पत्र की तस्वीरें और वीडियो कैप्चर किए जा सकते हैं, बल्कि पलक झपकते ही जटिल सवालों के सटीक जवाब भी प्राप्त किए जा सकते हैं, जिसके चलते शिक्षा बोर्डों के लिए पारंपरिक निगरानी के तरीके नाकाफी साबित हो रहे हैं।