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तेजस कार्यक्रम को मिली नई रफ्तार, अमेरिका से आए शक्तिशाली इंजन

तेजस कार्यक्रम को मिली नई रफ्तार, अमेरिका से आए शक्तिशाली इंजन

भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए साल 2026 की शुरुआत से ही कई सकारात्मक और उत्साहजनक खबरें सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में, देश के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम 'तेजस एमके-1ए' (Tejas MK-1A) को एक नई और मजबूत रफ्तार मिली है। अमेरिका की रक्षा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी जी.ई. एयरोस्पेस (GE Aerospace) ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को F404-IN20 इंजनों की एक और नई खेप सफलतापूर्वक सौंप दी है। इस ताजा आपूर्ति के बाद से भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता को बढ़ाने की दिशा में चल रहा यह प्रोजेक्ट एक बार फिर ट्रैक पर लौट आया है, जिसे लेकर लंबे समय से रक्षा गलियारों में चर्चाएं चल रही थीं।

समय पर आपूर्ति और रक्षा समझौते की अहमियत

भारतीय रक्षा मंत्रालय और अमेरिकी कंपनी के बीच साल 2021 में एक बड़ा अनुबंध साइन हुआ था। इस समझौते के तहत, जी.ई. एयरोस्पेस को कुल 99 अत्याधुनिक पावर प्लांट (इंजन) HAL को सप्लाई करने हैं। इन इंजनों का सीधा इस्तेमाल भारतीय वायुसेना के लिए तैयार हो रहे उन्नत किस्म के तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमानों में किया जाना है। जानकारों का मानना है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में आ रही दिक्कतों के बावजूद, इंजनों की इस नई खेप का पहुंचना भारत की रक्षा निर्माण क्षमताओं के लिए एक राहत भरी खबर है।

रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि किसी भी स्वदेशी रक्षा प्रोजेक्ट की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसके अहम कलपुर्जा समय पर मिलें। तेजस जैसे एडवांस्ड फाइटर जेट के लिए F404-IN20 इंजन रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं। ऐसे में इंजनों की यह खेप मिलने से एचएएल (HAL) की निर्माण इकाईयों में अब विमानों को अंतिम रूप देने और उनकी डिलीवरी प्रक्रिया में तेजी आएगी।

तेजस एमके-1ए: आसमान में भारत की बढ़ती ताकत

तेजस एमके-1ए सिर्फ एक लड़ाकू विमान नहीं है, बल्कि यह भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' अभियान का सबसे चमकीला उदाहरण है। पुराने तेजस विमानों की तुलना में एमके-1ए वर्जन कई मायनों में बेहद घातक और एडवांस्ड तकनीक से लैस है। इसमें निम्नलिखित प्रमुख खूबियां शामिल हैं:

  • उत्कृष्ट रडार सिस्टम: इसमें एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कannéd Array (AESA) रडार लगाया गया है, जो दुश्मन के विमानों को दूर से ही दबोचने में सक्षम है।
  • बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट: विमान का आधुनिक ईडब्ल्यू (EW) सूट इसे दुश्मन के मिसाइल हमलों और रडार जैमिंग से बचाने में पूरी तरह सक्षम है।
  • रिफ्यूलिंग क्षमता: इसमें हवा में ही ईंधन भरने (Mid-air refueling) की सुविधा है, जिससे इसकी मारक क्षमता और दायरा कई गुना बढ़ जाता है।
  • विदेशी हथियारों का एकीकरण: बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइलों और आधुनिक हथियारों को आसानी से इस पर तैनात किया जा सकता है।

रक्षा उत्पादन में मील का पत्थर

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा उपकरणों के निर्यात और अपने स्वदेशी उत्पादन में अभूतपूर्व प्रगति की है। तेजस कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल रक्षा आयातक देश नहीं रहा, बल्कि दुनिया के नक्शे पर एक उभरता हुआ रक्षा निर्यातक देश बनता जा रहा है। एचएएल (HAL) के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि आने वाले महीनों में इंजनों की आपूर्ति और तेज हो सकती है, जिससे भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रंस को समय पर नए विमान मिल सकेंगे।

चुनौतियां और भविष्य की राह

हालांकि इंजनों की इस खेप के आने से तात्कालिक दबाव कम हुआ है, लेकिन भविष्य में इस तरह की रक्षा परियोजनाओं को पूरी तरह से निर्बाध बनाए रखने के लिए देश के भीतर ही इंजन निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाना अनिवार्य हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार पहले ही अमेरिका की कंपनी के साथ तकनीक के हस्तांतरण (Technology Transfer) को लेकर बड़े समझौते कर चुकी है, जिसके तहत आने वाले समय में देश में ही लड़ाकू विमानों के इंजन बनाए जाने की योजना पर काम चल रहा है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर देखा जाए तो, जी.ई. एयरोस्पेस द्वारा HAL को F404-IN20 इंजनों की यह डिलीवरी भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण में एक मील का पत्थर साबित होगी। जिस तेजी से भारतीय रक्षा उद्योग अपनी प्राथमिकताओं को पूरा कर रहा है, वह दिन दूर नहीं जब भारतीय आसमान की सुरक्षा पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक के कंधों पर होगी और तेजस एमके-1ए इसमें सबसे आगे खड़ा नजर आएगा।

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ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

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