कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के बयान पर उपजे विवाद के बीच आगरा में श्री अग्रवाल संघ ने उनका समर्थन किया है। संघ के पदाधिकारियों ने समाजवादी पार्टी पर वैश्य समाज को लेकर राजनीति करने और बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने का गंभीर आरोप लगाया है।
आगरा खंड एमएलसी चुनाव के दौरान भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच बूथ कैप्चरिंग के आरोपों को लेकर विवाद सामने आया था। इसी संदर्भ में एक पत्रकार ने कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय से सवाल किया था कि सपा प्रत्याशी और उनके समर्थक भाजपा पर बूथ कैप्चरिंग का आरोप लगा रहे हैं, इस पर उनका क्या कहना है। इस सवाल के जवाब में मंत्री ने कथित तौर पर टिप्पणी की थी कि सपा के लोग भाजपा पर बूथ कैप्चर का आरोप लगा रहे हैं, जो कि ऐसी स्थिति है मानो कोई वैश्या किसी सती पर उंगली उठाए। इस बयान के सामने आने के बाद उसकी भाषा और आशय को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई और इसे लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
श्री अग्रवाल संघ की प्रेसवार्ता और मुख्य दावे
बयान पर मचे घमासान के बाद प्रताप नगर स्थित बुर्जी वाला हनुमान मंदिर में श्री अग्रवाल संघ के पदाधिकारियों ने एक प्रेसवार्ता का आयोजन किया। संघ से जुड़े टीएन अग्रवाल, गौरव बंसल, राजेश अग्रवाल, मनोज गर्ग और राजकुमार अग्रवाल समेत अन्य प्रमुख वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की टिप्पणी किसी व्यक्ति या समुदाय के खिलाफ नहीं थी, बल्कि यह समाजवादी पार्टी की कथित राजनीतिक संस्कृति पर एक राजनीतिक कटाक्ष था। पदाधिकारियों का कहना था कि चुनावी माहौल में कुछ लोग राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए इस बयान के अर्थ को गलत ढंग से पेश कर रहे हैं और इसे वैश्य समाज के अपमान से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित है।
सपा के पूर्ववर्ती शासनकाल पर उठाए गए सवाल
प्रेसवार्ता के दौरान कपड़ा, सर्राफा, पेठा, लोहा और इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार से जुड़े वैश्य समाज के प्रतिनिधियों ने समाजवादी पार्टी के पुराने शासनकाल की याद दिलाई। संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि उस दौर में बूथ कैप्चरिंग, अपहरण, फिरौती, चौथ वसूली, लूट और कारोबारियों की संपत्तियों पर कब्जे की घटनाओं से व्यापारी वर्ग का जीवन और व्यवसाय संकट में रहता था। वक्ताओं ने दावा किया कि वैश्य समाज के व्यापारियों को भी उस समय इन कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने अपने राजनीतिक एजेंडे के तहत समाज को अलग-अलग वर्गों में बांटने की राजनीति की है, उन्हें वैश्य समाज का प्रतिनिधि बनकर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
लंबे समय के राजनीतिक सफर का हवाला
संघ के अन्य पदाधिकारियों ओएस गर्ग, बीएस गर्ग, विनय बंसल, शशिकांत, राकेश अग्रवाल, सुनील मित्तल, संदीप गुप्ता, राजीव गुप्ता, नंदनंदन गर्ग, राजेश जिंदल, पुरुषोत्तम, राकेश बंसल, आलोक जैन, नवीन अग्रवाल, मोहन गर्ग, अजय बिहारी और दुष्यंत अग्रवाल ने भी समाज के लोगों से अपील की कि वे किसी भी बयान पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसके मूल संदर्भ को समझें। वक्ताओं ने याद दिलाया कि योगेंद्र उपाध्याय लंबे समय से शहर की राजनीति में सक्रिय हैं और करीब 15 वर्षों तक विधायक के रूप में आगरा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि जरूरत पड़ने पर मंत्री हमेशा वैश्य समाज के लोगों के साथ खड़े रहे हैं, इसलिए इस प्रकरण को तूल देना उचित नहीं है।