बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेता इमरान खान को विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) द्वारा दिए गए 'भारत छोड़ने के नोटिस' पर 2 नवंबर तक के लिए रोक लगा दी है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 2 नवंबर तक टाल दी है।
मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत एम. सेठना की पीठ ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से आश्वासन दिया कि अगली तारीख तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया, "चुनौती के तहत दिया गया आदेश अगली तारीख तक स्थगित रखा जाएगा।"
नोटिस के पीछे की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब भाजपा नेता किरीट सोमैया ने एक शिकायत दर्ज कराई। इसमें आरोप लगाया गया था कि अभिनेता इमरान खान ने मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेकर कानून का उल्लंघन किया है। इस शिकायत के बाद पुलिस ने एक अनसत्यापित एफआईआर आगे बढ़ाई, जिसके आधार पर एफआरआरओ ने 14 अक्टूबर को इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट (IFA), 2025 के कथित उल्लंघन के तहत 'भारत छोड़ने का नोटिस' जारी कर दिया था।
इसके खिलाफ, 17 अक्टूबर को इमरान खान ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया और नोटिस को असंवैधानिक, मनमाना और आनुपातिक रूप से गलत बताते हुए उसे रद्द करने की मांग की। उनकी याचिका में कहा गया कि एफआरआरओ ने यह कार्रवाई केवल एक राजनीतिक पदाधिकारी के इशारे पर और उनके तय समय के अनुसार की है।
अदालत में वकीलों की दलीलें
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान, इमरान खान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने एक हस्तक्षेप आवेदन का विरोध किया। हस्तक्षेपकर्ता ने प्रारंभिक आपत्ति जताई थी कि FRRO की कार्रवाई के खिलाफ वर्तमान सिविल रिट याचिका आपराधिक पक्ष में दायर नहीं की जा सकती। वरिष्ठ वकील धोंड ने दलील दी कि हस्तक्षेपकर्ता के पास कोई कानूनी आधार (locus standi) नहीं है और वह केवल एक "तीसरे पक्ष का दर्शक" है।
इस पर अदालत ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलि़सिटर जनरल तुषार मेहता के रुख के बारे में जानना चाहा और कहा कि वह इस मामले को हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में यह सत्यापित करने के लिए भेजेगी कि क्या इसमें कोई आपराधिक पहलू है। अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि यह मामला 'नागरिक परिणामों' (civil consequence) से उपजा है और इसमें उसे कोई आपराधिकता नजर नहीं आती है।
चूंकि सॉलि़सिटर जनरल तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट में किसी अन्य मामले में व्यस्त थे, इसलिए केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलि़सिटर जनरल (ASG) अनिल सिंह ने पीठ को सूचित किया कि वह 2 नवंबर को पेश होंगे। एएसजी सिंह के समय मांगने और अगली तारीख तक कोई कार्रवाई न करने का मौखिक आश्वासन देने के बाद, हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर तय कर दी।