राजधानी दिल्ली में प्रकृति का कहर और प्रशासनिक लापरवाही एक बार फिर आमने-सामने खड़ी नजर आ रही है। लगातार हो रही बारिश के बीच दक्षिण दिल्ली के व्यस्त और संवेदनशील इलाके सत्य निकेतन में एक पांच मंजिला इमारत के भरभराकर जमींदोज होने की खबर ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। यह इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के बिल्कुल करीब है, जहां हजारों की संख्या में देश भर के छात्र पीजी (Paying Guest) और किराए के कमरों में रहकर अपनी पढ़ाई करते हैं। रविवार दोपहर को हुए इस भीषण हादसे के बाद से इलाके में चीख-पुकार मची हुई है और राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई धड़कनें: 'सिर्फ सिर बाहर, पूरा शरीर मलबे में कैद'
इस हादसे के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न न्यूज प्लेटफॉर्म्स पर एक खौफनाक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर किसी भी इंसान की रूह कांप जाएगी। इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मलबे के विशाल ढेर के बीच एक छात्र का पूरा शरीर अंदर बुरी तरह फंसा हुआ है और केवल उसका सिर बाहर की तरफ दिखाई दे रहा है। अपनी जान बचाने की गुहार लगा रहे उस छात्र का चेहरा और आसपास का मंज़र इस बात की गवाही दे रहा है कि हादसा कितना भयानक था। स्थानीय लोगों और रेस्क्यू टीमों की प्राथमिकता इस वक्त किसी तरह उस छात्र समेत अन्य सभी फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। अचानक से एक जोरदार धमाके जैसी आवाज आई और कुछ ही सेकंड में पांच मंजिला इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। इमारत के गिरते ही आसपास के इलाकों में धूल का गुबार छा गया और लोग अपनी जान बचाकर भागे। गनीमत यह रही कि स्थानीय लोग तुरंत अपनी जान की परवाह किए बिना मदद के लिए आगे आए और अपने स्तर पर मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया। कई लोग हथौड़ों, लोहे की रॉड और हाथों से ही सीमेंट के भारी स्लैब को हटाने की कोशिश करते नजर आए।
पीछे खड़े हैं कई गंभीर सवाल: क्या पीजी के नाम पर चल रहा था अवैध निर्माण?
सत्य निकेतन का यह इलाका छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यहां आवासीय भवनों को व्यावसायिक रूप देकर अवैध रूप से पीजी और हॉस्टल चलाने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि मूल रूप से छोटे परिवारों के लिए बने मकानों पर नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से तीन से चार मंजिलें और खड़ी कर दी गईं। कम जगह में ज्यादा मुनाफा कमाने की होड़ में बिना किसी इंजीनियर की सलाह के कमजोर नींव पर भारी-भरकम ढांचे खड़े कर दिए जाते हैं।
लगातार हो रही बारिश ने इन अवैध और कमजोर इमारतों की पोल खोलकर रख दी है। बारिश के पानी के कारण नींव में सीपेज और दीवारों में आई दरारों ने इस पांच मंजिला इमारत को अंदर से खोखला कर दिया था, जो रविवार को भारी बारिश के बीच ढह गई। प्रशासन की भूमिका पर भी अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर बिना नक्शा पास किए या सुरक्षा मानकों की अनदेखी करके इस तरह के हॉस्टल कैसे धड़ल्ले से संचालित हो रहे थे?
युद्धस्तर पर जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन, कितने लोग अंदर?
घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग (Fire Department), एनडीआरएफ (NDRF) और स्थानीय प्रशासन की टीमें भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गईं। राहत और बचाव कार्य को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए क्रेन, जेसीबी और गैस कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि मलबे में दबे कंक्रीट के बड़े टुकड़ों को काटा जा सके।
शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक मलबे से 6 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हादसे के वक्त इमारत के अंदर कुल कितने लोग मौजूद थे। कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि मलबे के नीचे 50 से अधिक लोग फंसे हो सकते हैं, क्योंकि रविवार का दिन होने के कारण ज्यादातर छात्र अपने कमरों में ही मौजूद थे। इसके अलावा, मलबे के नीचे कई दोपहिया और चार पहिया वाहन भी दब गए हैं, जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि तबाही कितनी बड़ी थी।
सुरक्षा के मद्देनजर आसपास की इमारतें भी खाली कराई गईं
हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सत्य निकेतन की उस गली और उसके आसपास की अन्य संकीर्ण इमारतों को भी तुरंत खाली करवा लिया है। डर यह सता रहा है कि मुख्य इमारत के गिरने से आसपास की जमीनी और दीवारों की पकड़ कमजोर हो चुकी है, जिससे कोई और बड़ा हादसा न हो जाए। प्रभावित परिवारों और छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के निर्देश दे दिए गए हैं।प्रशासनिक बयान और आगे की कार्रवाई
स्थानीय प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर कैंप किए हुए हैं और हर एक गतिविधि पर कड़ी नजर रख रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस समय उनकी सबसे पहली प्राथमिकता मलबे में फंसे हर एक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया जाएगा, जो यह पता लगाएगी कि यह इमारत कितनी पुरानी थी, इसका निर्माण वैध था या नहीं, और क्या इसमें कमर्शियल एक्टिविटी के नियमों का उल्लंघन हुआ था। दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह हादसा एक बार फिर महानगरों की उन तमाम अवैध इमारतों और पीजी माफियाओं की पोल खोलता है जो छात्रों की जान से खिलवाड़ कर अपनी तिजोरी भर रहे हैं। फिलहाल, पूरे देश की निगाहें दिल्ली के सत्य निकेतन पर टिकी हैं, जहां हर एक सेकंड के साथ मलबे से किसी जिंदगी के बाहर आने की उम्मीद की जा रही है।