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मलबे के नीचे से आई छात्र की वीडियो कॉल: सत्य निकेतन हादसे पर डीयू डायरेक्टर का बड़ा खुलासा

मलबे के नीचे से आई छात्र की वीडियो कॉल: सत्य निकेतन हादसे पर डीयू डायरेक्टर का बड़ा खुलासा

दिल्ली के सत्य निकेतन में दिल दहला देने वाला हादसा

राजधानी दिल्ली के पॉश और छात्र बहुल इलाके सत्य निकेतन से एक ऐसा वाकया सामने आया है जिसने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। यहां एक पुरानी इमारत अचानक भरभराकर जमींदोज हो गई। इस भीषण हादसे के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। इस दुर्घटना ने एक बार फिर से दिल्ली में अवैध निर्माण और पुरानी इमारतों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गईं। मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थानीय लोगों की भीड़ भी मौके पर जमा है और हर कोई अपनों की सलामती की दुआ मांग रहा है।

मलबे के अंदर से छात्र की आई वीडियो कॉल

इस पूरे हादसे का सबसे डरावना और भावुक पहलू तब सामने आया जब मलबे के अंदर दबे एक छात्र ने किसी तरह अपनी जान बचाने की जद्दोजहद के बीच वीडियो कॉल किया। यह मंजर ऐसा था जिसने सुनने वालों की सांसे रोक दीं। दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) साउथ कैंपस की डायरेक्टर ने इस घटना पर बात करते हुए खुद इस बात का खुलासा किया है कि कैसे फंसे हुए छात्र ने अपनी स्थिति की जानकारी दी।

डायरेक्टर के अनुसार, छात्र जब मलबे के नीचे फंसा था, तो उसने अपने एक साथी को वीडियो कॉल के जरिए अपनी लोकेशन और हालात के बारे में बताया। उस कॉल के जरिए यह अंदाजा लगाया जा सका कि छात्र किस जगह पर दबा हुआ है, जिससे बचाव दल को रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने में काफी मदद मिली। यह तकनीक और किस्मत का ही संगम था कि उस विकट परिस्थिति में भी संपर्क साधने का जरिया मिल गया।

प्रशासन और डीयू प्रशासन की त्वरित कार्रवाई

घटना की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय का प्रशासन भी तुरंत हरकत में आ गया। साउथ कैंपस डायरेक्टर खुद मौके पर हालात का जायजा लेने पहुंचीं। उन्होंने अधिकारियों से मिलकर राहत कार्यों की पूरी जानकारी ली और यह सुनिश्चित किया कि छात्रों को हरसंभव चिकित्सीय सहायता और मदद मुहैया कराई जाए।

प्रशासन की ओर से जारी शुरुआती बयानों में कहा गया है कि हमारी पहली प्राथमिकता मलबे में फंसे हर एक शख्स को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके बाद इस पूरे हादसे के कारणों की गहनता से जांच की जाएगी कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे बरती गई और क्या इमारत के निर्माण या मरम्मत में कोई अवैध काम चल रहा था।

छात्र आवासों और पीजी की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

सत्य निकेतन का इलाका डीयू के छात्रों के बीच पीजी (Paying Guest) और किराए के कमरों के लिए बेहद मशहूर है। यहां हजारों छात्र रहकर अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि इनमें से कई इमारतें बेहद पुरानी और जर्जर हालत में हैं। मकान मालिक ज्यादा किराए के चक्कर में नियमों को ताक पर रखकर छात्रों की जान को जोखिम में डालते हैं।

  • इमारतों की समय पर स्ट्रक्चरल ऑडिट न होना।
  • अवैध तरीके से मंजिलें बढ़ाना।
  • वेंटिलेशन और वेंटिलेशन की भारी कमी।

फायर सेफ्टी और इमरजेंसी एग्जिट का अभाव।इस हादसे के बाद एक बार फिर यह बहस छिड़ गई है कि क्या छात्रों की सुरक्षा से यूं ही खिलवाड़ किया जाता रहेगा? स्थानीय प्रशासन और नगर निगम को अब इन इलाकों में सघन चेकिंग अभियान चलाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी अन्य छात्र को इस तरह के खौफनाक मंजर का सामना न करना पड़े।

रेस्क्यू ऑपरेशन में आ रही हैं ये चुनौतियां

बचाव कार्यों में जुटी टीमों का कहना है कि सत्य निकेतन की गलियां बेहद संकरी हैं। भारी-भरकम जेसीबी और क्रेन जैसी मशीनें घटनास्थल तक सीधे नहीं पहुंच पा रही हैं, जिसके कारण रेस्क्यू ऑपरेशन की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है। इसके बावजूद एनडीआरएफ के जवान अपने हाथों से मलबा हटाने और कटर का इस्तेमाल कर रास्ता बनाने में जुटे हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में एक-एक मिनट की कीमत होती है। वीडियो कॉल करने वाले छात्र और अन्य संभावित पीड़ितों तक जल्द से जल्द ऑक्सीजन और पानी पहुंचाने की कोशिशें की जा रही हैं ताकि उनकी जान बचाई जा सके।

निष्कर्ष और आगे की स्थिति

ताजा अपडेट्स मिलने तक राहत कार्य लगातार जारी है। पूरा देश इस समय सत्य निकेतन के उन छात्रों के लिए प्रार्थना कर रहा है जो इस हादसे का शिकार हुए हैं। यह दुर्घटना पूरे सिस्टम के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि अगर समय रहते पुरानी इमारतों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो ऐसे हादसे बार-बार दोहराए जाएंगे। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

Writer (स्थानीय खबरें)

निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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