जेएनयू में दीवारों पर विवादित नारों और राजनीतिक तस्वीरों को लेकर बढ़ा तनाव
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में दीवारों पर विवादित नारे लिखने और राजनीतिक संदेश चस्पा करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस सिलसिले में शुरू हुआ वैचारिक मतभेद अब छात्र संगठनों के बीच तीखे टकराव और मारपीट तक पहुंच गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और मामले की जांच की जा रही है, हालांकि अभी तक दीवारों पर अनाधिकृत रूप से नारे लिखने वाले व्यक्तियों की आधिकारिक पहचान सामने नहीं आ सकी है।
स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज की दीवार पर लिखे गए विरोधी नारे
विवाद की शुरुआत परिसर स्थित स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज (एसओएस) की दीवार से हुई, जहां सबसे पहले 'फ्री उमर खालिद' और 'लांग लिव नक्सलबाड़ी' जैसे नारे लिखे गए थे। इसके जवाब में दक्षिणपंथी छात्र गुटों की तरफ से उसी दीवार पर उमर खालिद के नाम पर क्रॉस का निशान बनाकर उसके आगे 'नेवर डोंट फ्री' लिख दिया गया। इसके अलावा, इसी दीवार पर 'अखंड भारत', 'स्टॉप लव जिहाद' और 'आल हैरासर्स विल बी टेकन डाउन' जैसे कई अन्य संदेश भी लिखे मिले। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब स्कूल के व्याख्यान कक्ष संख्या 335 के दरवाजे के ऊपरी हिस्से पर भी 'अखंड भारत' लिखा हुआ पाया गया।
एबीवीपी और वामपंथी छात्रों के बीच मारपीट और आरोप-प्रत्यारोप
शनिवार को इन नारों की मौजूदगी को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच तीखी झड़प और मारपीट की घटना सामने आई। एबीवीपी ने आरोप लगाया कि वामपंथी छात्र संगठनों के सदस्यों ने ही परिसर में 'फ्री उमर खालिद' और 'लांग लिव नक्सलबाड़ी' जैसे नारे लिखे थे और विरोध करने पर उनके कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद से परिसर में दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
बर्खास्त प्रोफेसर की तस्वीरें और अन्य राजनीतिक पोस्टर चस्पा
नारों के इस विवाद के बीच परिसर में कुछ अन्य राजनीतिक और संवेदनशील सामग्रियां भी चस्पा की गईं। छात्राओं के यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों के मामले में हाल ही में बर्खास्त किए गए प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम की कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ वाली तस्वीरें भी दीवारों पर चिपकाई गईं। इसके साथ ही, एक छात्र संगठन के आधिकारिक नाम के साथ छेड़छाड़ कर उसे एक नया और विवादित रूप देने का मामला भी सामने आया है, जिससे परिसर का राजनीतिक माहौल और अधिक गर्मा गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की अपील और जांच
छात्र संगठनों के बीच बढ़ते तनाव और संपत्ति को नुकसान पहुंचने की शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया है। प्रशासन की ओर से इन तमाम विवादित नारों और पोस्टरों को हटवाने की बात कही गई है। इस संबंध में जेएनयू प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि छात्रों से अपील की गई है कि वे विश्वविद्यालय की संपत्ति को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचाएं और परिसर की दीवारों को बदरंग करने से बचें। फिलहाल प्रशासन पूरे घटनाक्रम की गहनता से पड़ताल कर रहा है।