कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के समक्ष मुजफ्फरपुर के किसानों ने खेती से जुड़ी कई गंभीर समस्याएं रखी हैं। 'खेत बचाओ अभियान सह कृषि जन कल्याण संवाद' के दौरान किसानों ने महंगी डीएपी, नकली खाद फैक्ट्री, मिट्टी जांच में वर्षों की देरी और फसल मुआवजे की मांग को प्रमुखता से उठाया।
मुजफ्फरपुर में आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों ने कृषि मंत्री के सामने अपनी जमीनी परेशानियां बेबाकी से रखीं। कार्यक्रम के दौरान मुरौल के किसान सुमन कुमार झा ने शिकायत की कि उनके इलाके में डीएपी का एक बोरा 1800 रुपये तक में बेचा जा रहा है। विरोध करने पर दुकानदार प्रशासनिक सेटिंग की बात कहते हैं। इस पर कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने किसान से संबंधित दुकानदार का नाम गोपनीय रूप से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि सख्त कार्रवाई की जा सके।
सकरा में नकली खाद फैक्ट्री और सख्त कार्रवाई के निर्देश
सकरा इलाके में नकली खाद की फैक्ट्री संचालित होने और कृत्रिम किल्लत पैदा करने का गंभीर मामला भी सामने आया। स्थानीय किसान रोशन कुमार ने इस गिरोह के खिलाफ जांच की मांग उठाई। इस पर कृषि मंत्री ने प्रखंड कृषि पदाधिकारी, कृषि समन्वयक और किसान सलाहकार से तुरंत जवाब-तलब करने के निर्देश दिए।
मंत्री ने घोषणा की कि नकली उर्वरक और कीटनाशक बनाने तथा बेचने वालों के अवैध कारोबार की सटीक सूचना देने वाले किसानों और इस पर प्रभावी कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया जाएगा। किसानों को सीधे शिकायत दर्ज कराने के लिए संबंधित अधिकारियों के मोबाइल नंबर भी सार्वजनिक किए गए हैं।
मिट्टी जांच रिपोर्ट में पांच साल की देरी और अन्य प्रशासनिक अड़चनें
घोसौत के किसान सुनील कुमार झा ने बताया कि पांच साल पहले 105 किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने लिए गए थे, लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट नहीं मिल सकी है, जिससे संतुलित खाद के इस्तेमाल में परेशानी आ रही है। इस पर कृषि मंत्री ने जिला कृषि पदाधिकारी को प्रभावित किसानों की सूची तैयार कर शिविर लगाने का निर्देश दिया।
गायघाट के राजेश कुमार ने बाढ़ से खरीफ और रबी की फसल बर्बाद होने के बावजूद मुआवजा नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। वहीं धनौर के परमानंद सिंह ने लंबित जमाबंदी के कारण किसान पहचान पत्र बनाने में आ रही दिक्कतों की बात कही। मंत्री ने स्पष्ट किया कि पहचान पत्र के लिए जमीन का ब्योरा होना अनिवार्य है, जिसके लिए राजस्व और कृषि विभाग के समन्वय पर जोर दिया गया है।
कृषि यंत्र अनुदान और लीची उत्पादकों की समस्याएं
नेकनामपुर के चितरंजन प्रसाद और बोचहां के शंकर साह ने कृषि यंत्रों पर मिलने वाले अनुदान और परमिट में एक से दो साल तक की देरी की शिकायत करते हुए लॉटरी व्यवस्था में सुधार की मांग रखी। इसी प्रकार गोपाल शाही और अशोक शर्मा ने खाद लाइसेंस के लिए राशि जमा करने के पांच महीने बाद भी प्रशिक्षण नहीं मिलने का मुद्दा उठाया।
लीची उत्पादक कृष्ण गोपाल ने उत्तर प्रदेश से आने वाले मधुमक्खी पालकों को गोपालगंज सीमा पर स्वास्थ्य जांच के नाम पर होने वाली अवैध वसूली की शिकायत की और लीची की हवाई ढुलाई में सहयोग मांगा। मनिका के राजीव लोचन ने घोड़परास के आतंक से निजात दिलाने और कटरा के नंदकिशोर यादव ने उद्यान विभाग के अधिकारियों के दूरस्थ प्रखंडों में न पहुंचने की बात कही।
बैठक में कोल्ड स्टोरेज की घटी हुई बिजली दरों के बावजूद पुराने शुल्क वसूले जाने का मामला भी उठाया गया। कृषि मंत्री ने सभी मामलों में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देते हुए किसानों को समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया है।