शिमला के संजौली चौक पर वाहन में अनधिकृत फ्लैशर लाइट का उपयोग करने पर रोके जाने के बाद ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मी के साथ बहस करने और सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। घटना का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पुलिस ने स्थिति स्पष्ट करते हुए यह कार्रवाई की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना 22 अक्टूबर की है जब संजौली चौक पर यातायात प्रबंधन की ड्यूटी पर तैनात एक कर्मचारी ने वाहन के डैशबोर्ड पर अनधिकृत रूप से फ्लैशर लाइट का इस्तेमाल होते देखा। नियमों के तहत वाहन रोके जाने पर उसमें सवार दो व्यक्ति नीचे उतर आए और उन्होंने तैनात पुलिसकर्मी के साथ तीखी बहस शुरू कर दी। इस दौरान आरोप है कि उन्होंने अभद्र भाषा का प्रयोग किया और पुलिसकर्मी को धमकाया भी।
वाहन रोके जाने और बहसबाजी के इस घटनाक्रम के कारण व्यस्त मार्ग पर यातायात भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ। हंगामे की स्थिति बनते देख मौके पर कुछ अन्य स्थानीय लोग भी एकत्रित हो गए, जिन्होंने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी का समर्थन किया।
संजौली थाने में मुकदमा दर्ज
यातायात शाखा में तैनात संबंधित पुलिसकर्मी की लिखित शिकायत के आधार पर संजौली पुलिस थाना में अभियोग संख्या 74/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 221 और 3(5) के तहत कानूनी कार्रवाई की है। पुलिस द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, नामजद किए गए दोनों आरोपियों की पहचान राहुल शर्मा (निवासी ढली) और 23 वर्षीय अर्णव (निवासी लोअर कलस्टन, शिमला) के रूप में हुई है। इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच संजौली पुलिस थाने की एक टीम द्वारा की जा रही है।
पिस्तौल तानने का दावा खारिज
घटना के दौरान पिस्तौल तानए जाने को लेकर सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से उठाए जा रहे सवालों पर शिमला पुलिस ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब तक सामने आए साक्ष्यों और तथ्यों से पिस्तौल तानने के आरोपों की पुष्टि नहीं होती है। पुलिस के अनुसार, इस तरह के आरोप प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज होने के बाद कानूनी बचाव के लिए गढ़े गए प्रतीत होते हैं, हालांकि मामले में आगे की जांच अभी जारी है।