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असम-अरुणाचल सीमा पर तनाव: पुलिस को करनी पड़ी फायरिंग, जानें क्यों सुलग रही है सीमा?

असम-अरुणाचल सीमा पर तनाव: पुलिस को करनी पड़ी फायरिंग, जानें क्यों सुलग रही है सीमा?

असम-अरुणाचल सीमा पर फिर दहला माहौल

पूर्वोत्तर भारत के दो पड़ोसी राज्यों असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमाओं पर एक बार फिर तनाव की आग सुलग उठी है। सीमा पर चल रही अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी के दूसरे दिन स्थिति उस समय बेकाबू हो गई जब प्रदर्शनकारियों और स्थानीय लोगों के बीच हिंसक झड़प हो गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मजबूरन हवाई फायरिंग करनी पड़ी। सवाल यह है कि आखिर दशकों पुराना यह सीमा विवाद एक बार फिर हिंसक रूप क्यों ले रहा है?

क्या है विवाद की जड़?

यह पूरा विवाद सोमवार को धेमाजी जिले में अंतर-राज्यीय सीमा पर शुरू हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, जमीन पर कब्जे को लेकर हुए एक विवाद के दौरान कथित तौर पर अरुणाचल प्रदेश की ओर से की गई गोलीबारी में असम के करीब 12 मूल निवासी घायल हो गए। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैला दिया, जिसके बाद असम के 'ताकम मिसिंग पोरिन केबांग' (TMPK) और अन्य स्थानीय संगठनों ने मोर्चा खोल दिया।

आर्थिक नाकेबंदी और झड़प की कहानी

बुधवार को शुरू हुई अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी के दौरान स्थिति तब बिगड़ गई, जब अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानीय निवासियों ने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों पर पथराव कर दिया। इसके जवाब में दोनों गुटों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। मौके पर मौजूद सुरक्षाबलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवा में गोली चलाई। वर्तमान में, प्रदर्शनकारियों ने अरुणाचल आने-जाने वाले सभी व्यावसायिक वाहनों को रोक दिया है, हालांकि इमरजेंसी सेवाओं और स्कूल बसों को इससे छूट दी गई है।

प्रदर्शनकारी संगठनों की प्रमुख मांगें

सीमा पर प्रदर्शन कर रहे संगठनों ने सरकार के सामने अपनी मांगें स्पष्ट कर दी हैं:

  • गोलीबारी के दोषियों पर कार्रवाई: सोमवार को हुई घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
  • सीमा विवाद का समाधान: असम और अरुणाचल के बीच सालों से चले आ रहे सीमा विवाद का एक स्थायी और ठोस समाधान निकाला जाए।
  • अतिक्रमण हटाना: असम की जमीन पर कथित रूप से किए गए कब्जे को तुरंत खाली कराया जाए।

मुख्यमंत्रियों की अपील: शांति ही एकमात्र रास्ता

तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने संयम बरतने की अपील की है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि, 'सीमाएं कभी दिलों को नहीं बांट सकतीं।' उन्होंने जनता से शांति बनाए रखने का आग्रह किया है। वहीं, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि दोनों राज्यों के बीच भाईचारे का इतिहास रहा है। उन्होंने कहा, 'मतभेदों को केवल बातचीत और आपसी समझ के जरिए ही सुलझाया जा सकता है।'

भविष्य की राह क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सीमा विवादों को केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि उच्च-स्तरीय वार्ता के माध्यम से सुलझाने की जरूरत है। असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच की यह सीमा रेखा न केवल भौगोलिक है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से भी जुड़ी हुई है। गृह मंत्रालय की मध्यस्थता और दोनों राज्यों की सरकारों के बीच निरंतर संवाद ही इस तनाव को खत्म करने का एकमात्र जरिया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. असम और अरुणाचल प्रदेश में विवाद क्यों हो रहा है?

यह विवाद मुख्य रूप से अंतर-राज्यीय सीमा पर जमीन के स्वामित्व और कथित अतिक्रमण को लेकर है।

2. आर्थिक नाकेबंदी का मतलब क्या है?

प्रदर्शनकारी संगठनों ने अरुणाचल प्रदेश की ओर जाने वाले व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही को रोक दिया है, ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके।

3. क्या अभी सीमा पर स्थिति सामान्य है?

प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं, हालांकि तनाव अभी भी बरकरार है।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

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अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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