बिहार विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के परिणामों में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। शुरुआती रुझानों और पहली वरीयता के वोटों में पिछड़ने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने दूसरे वरीयता के वोटों के आधार पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मात दे दी है।
दरभंगा ग्रेजुएट सीट पर हुए इस कड़े मुकाबले में राजद उम्मीदवार अनिल कुमार झा ने भाजपा के सर्वेश कुमार को पराजित किया। मतगणना लगभग 60 घंटे तक लगातार चली, जिसके बाद द्वितीय वरीयता के मतों के हस्तांतरण से परिणाम स्पष्ट हुए। इस जीत के साथ ही विधान परिषद चुनाव में राजद और भाजपा दोनों के पास अब बराबर सीटें हो गई हैं।
शुरुआती बढ़त और जश्न के बाद पलटी बाजी
मतगणना के शुरुआती दौर में स्थिति भाजपा के पक्ष में नजर आ रही थी। भाजपा ने अपनी बढ़ी हुई संख्या पर जश्न मनाना भी शुरू कर दिया था। मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी ने दरभंगा ग्रेजुएट सीट से भाजपा उम्मीदवार सर्वेश कुमार को जीत की अग्रिम बधाई तक दे दी थी। हालांकि, यह बढ़त अंतिम चरण तक कायम नहीं रह सकी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भाजपा उम्मीदवार सर्वेश कुमार पहले के सभी 10 राउंड की मतगणना में राजद के अनिल कुमार झा से आगे चल रहे थे। लेकिन जैसे ही चुनाव प्रक्रिया दूसरे वरीयता के मतों की गिनती और ट्रांसफर तक पहुंची, समीकरण पूरी तरह बदल गए। अंततः अनिल कुमार झा ने 450 वोटों के अंतर से यह सीट अपने नाम कर ली। इस हार के साथ ही सत्तारूढ़ भाजपा दरभंगा की दोनों विधान परिषद सीटों पर जीत हासिल करने से चूक गई। खास बात यह है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी भी दरभंगा से ही ताल्लुक रखते हैं और विधानसभा में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।
क्या कहते हैं एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के नियम
विधान परिषद, राष्ट्रपति और राज्यसभा के चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व के साथ एकल संक्रमणीय मत (एसटीवी) प्रणाली के तहत आयोजित किए जाते हैं। इस प्रणाली में मतदाता किसी एक उम्मीदवार के सामने क्रॉस या टिक का निशान लगाने के बजाय मतपत्र पर उम्मीदवारों को उनकी पसंद के क्रम में नंबर देते हैं- पहली पसंद के लिए 1, दूसरी पसंद के लिए 2, तीसरी पसंद के लिए 3, और इसी तरह आगे भी।
चुनाव नियमों के अनुसार, किसी भी विजयी उम्मीदवार को जीत के लिए एक निश्चित कोटे को पार करना अनिवार्य होता है। इस चुनाव में यह कोटा 31,911 वोट (वैध मतों का 50% + 1) निर्धारित किया गया था। चूँकि न तो सर्वेश कुमार और न ही अनिल कुमार झा को पहले दौर की गिनती में सीधे तौर पर इस आंकड़े तक पहुंचने के लिए पर्याप्त वोट मिले, इसलिए चुनाव प्रक्रिया को उम्मीदवारों की छंटनी और वरीयता आधारित गिनती की ओर बढ़ाना पड़ा।
कैसे पलटे समीकरण और अन्य दलों की स्थिति
जब दूसरे वरीयता के वोटों की गिनती शुरू हुई, तो कांग्रेस के रजनीकांत पाठक और जन सुराज पार्टी (JSP) के डॉ. इम्तेयाज नूरानी समेत कम वोट पाने वाले उम्मीदवारों को एक-एक करके बाहर कर दिया गया। इसके बाद उनके मतपत्रों को दूसरी और बाद की वरीयता के आधार पर फिर से आवंटित किया गया।
निकाले गए उम्मीदवारों के ट्रांसफर वोटों का एक बड़ा हिस्सा राजद उम्मीदवार अनिल कुमार झा के खाते में गया। वोटों के इस बड़े पैमाने पर हुए हस्तांतरण के कारण राजद ने भाजपा की शुरुआती बढ़त को खत्म कर दिया और अंतिम दौर की छंटनी में सर्वेश कुमार से आगे निकलकर सीट पर कब्जा जमा लिया।
इस चुनाव के समग्र परिणामों पर नजर डालें तो राजद और भाजपा दोनों ने दो-दो सीटों पर जीत दर्ज की है। इसके अलावा जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और जन सुराज पार्टी (जेएसपी) के खाते में एक-एक सीट आई है, जबकि दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मारी है।