भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: कृषि हितों की पूरी सुरक्षा का दावा, गोयल बोले- देश को मिलेगा मजबूत तुलनात्मक लाभ
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार समझौते में भारत के संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की पूरी रक्षा की गई है। इंस्टीट्यूट फॉर स्टडीज इन इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट (ISID) के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस समझौते के लागू होने के बाद भारत को एक बेहद मजबूत तुलनात्मक लाभ (कम्पेरेटिव एडवांटेज) प्राप्त होगा।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पिछले सप्ताह यह जानकारी दी थी कि दोनों देश समझौते पर हस्ताक्षर करने के बेहद करीब हैं और करीब 99 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
राजनीतिक बयानों और आलोचना पर प्रतिक्रिया
मंत्री पीयूष गोयल ने व्यापार समझौते को लेकर हो रही राजनीतिक बयानबाजी पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ तत्व इसे बिना पूरी जानकारी के राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'जब तक समझौते के विस्तृत विवरण पूरी तरह सामने नहीं आते, तब तक आलोचना का कोई आधार नहीं है।' गोयल ने विश्वास जताया कि विवरण सार्वजनिक होने पर देशवासी देखेंगे कि किसानों के किसी भी संवेदनशील हित से समझौता नहीं किया गया है। व्यापार केवल पूर्ण आंकड़ों पर नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले की क्षमता यानी प्रतिस्पर्धात्मकता पर आधारित होता है।'
रूस और ईरान प्रतिबंध कानून पर रोक का असर
दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते की संभावनाओं को उस समय और बल मिला जब अमेरिका ने इस महीने की शुरुआत में ईंधन की ऊंची कीमतों के बीच 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' पर अस्थायी रोक लगा दी। इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को रूस से तेल आयात करने वाले देशों जैसे भारत और चीन पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिलता। मार्को रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया था कि रूसी तेल खरीद पर टैरिफ रोकने के फैसले में भारत के साथ व्यापार समझौते को ध्यान में रखा गया था।
तेल से जुड़े टैरिफ ही दोनों देशों के बीच एकमात्र अड़चन थे, क्योंकि अन्य मामलों में आपसी सहमति बन चुकी है। नई दिल्ली पर अमेरिकी 'सेक्शन 301' की जांच और व्यापार समझौते के परिणामस्वरुप दोनों देशों के रुख में तालमेल देखने को मिला है। भारत ने पहली सेक्शन 301 जांच के बाद पहले ही 'बलपूर्वक श्रम' (फोर्सड लेबर) का उपयोग करके बनाए गए सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा अति-क्षमता (ओवरकैपेसिटी) पर हुई सेक्शन 301 जांच के बाद भारत ने अन्य G20 देशों के साथ मिलकर ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, रसायन, बुनियादी सेमीकंडक्टर और सोलर पैनल जैसे क्षेत्रों में संरचनात्मक अति-क्षमता के खिलाफ कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता जताई है।
समझौतों की नई रणनीति और RCEP का संदर्भ
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत उन्हीं देशों के साथ समझौते करने का प्रयास कर रहा है जिनके साथ हमारी पूरक क्षमता (कॉम्प्लीमेंट्री एडवांटेज) है। वर्तमान में भारत के व्यापार समझौते 38 विकसित और अपेक्षाकृत समृद्ध देशों के साथ हैं, जिससे दोनों पक्षों के लिए पूरक व्यापार के अवसर पैदा हो रहे हैं।
पूर्व के समझौतों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि 2014 से पहले के सभी समझौते केवल 10 ट्रिलियन डॉलर के दायरे को कवर करते थे और वे देश बड़े पैमाने पर भारत के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे थे। क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह समझौता भारत के विनिर्माण क्षेत्र के लिए मौत का परवाना साबित होता और वह अनिवार्य रूप से चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) बन जाता।
मंत्री ने बताया कि 2019 में कार्यभार संभालने के बाद जब उन्होंने RCEP के विवरण देखे तो वे हैरान रह गए थे। 4 नवंबर 2019 को बैंकॉक में RCEP वार्ताओं से हटने के फैसले को उन्होंने देश के उद्योग के पक्ष में एक बड़ा कदम बताया। भारत ने 2019 में यह कहते हुए इससे किनारा कर लिया था कि यह समझौता अपनी मूल मंशा को नहीं दर्शाता और इसका परिणाम न तो निष्पक्ष है और न ही संतुलित। भारत के हटने के बाद इस क्षेत्रीय समूह के अन्य 15 देश—आसियान के 10 देश तथा चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड—आगे बढ़ गए थे।