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चंडीगढ़ पीयू चुनाव में बड़ा उलटफेर: वोटिंग से ठीक पहले एबीवीपी और एसओआई में गठबंधन

चंडीगढ़ पीयू चुनाव में बड़ा उलटफेर: वोटिंग से ठीक पहले एबीवीपी और एसओआई में गठबंधन

चंडीगढ़ की प्रतिष्ठित पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) छात्र संघ चुनाव का माहौल अपने चरम पर पहुंच चुका है। मतदान से ठीक कुछ घंटे पहले कैंपस की राजनीति में एक ऐसा बड़ा भूचाल आया है, जिसने तमाम राजनीतिक दलों के समीकरणों को पूरी तरह से उलट कर रख दिया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (SOI) ने हाथ मिला लिया है। इस रणनीतिक गठबंधन के बाद से यूनिवर्सिटी कैंपस में चुनावी सरगर्मी और ज्यादा तेज हो गई है।

अकाली दल के छात्र संगठन का बड़ा कदम

शिरोमणि अकाली दल के छात्र संगठन 'एसओआई' (SOI) ने अपने कदम पीछे खींचते हुए सीधे तौर पर 'एबीवीपी' (ABVP) को समर्थन देने का ऐलान किया है। जानकारों का मानना है कि यह फैसला इस बार के चुनाव परिणामों पर गहरा असर डाल सकता है। छात्र राजनीति के गलियारों में इस सियासी डील को गेम-चेंजर माना जा रहा है, क्योंकि दोनों ही संगठनों का अपना-अपना मजबूत जनाधार और स्टूडेंट बेस है।

चुनाव की तारीख नजदीक आते ही कैंपेन का दौर थम चुका है, लेकिन पर्दे के पीछे चलने वाली रणनीतियां और जोड़तोड़ अपने उरूज पर हैं। एबीवीपी और एसओआई के शीर्ष नेताओं ने लंबी बातचीत के बाद इस साझा मोर्चे की रूपरेखा तैयार की है। उनका उद्देश्य विपक्षी दलों को कड़ी टक्कर देना और पीयू कैंपस में अपनी जीत का परचम लहराना है।

क्या कहते हैं चुनावी समीकरण?

  • गठबंधन का प्रभाव: एसओआई के समर्थन से एबीवीपी को उन इलाकों और विभागों में सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है, जहां पंजाबी पृष्ठभूमि के छात्रों की संख्या बहुतायत में है।
  • विपक्षी दलों की बढ़ी मुश्किलें इस नए समीकरण के बाद अन्य छात्र संगठनों की नींद उड़ गई है, जिन्हें अब अपनी रणनीति नए सिरे से तैयार करनी पड़ रही है।
  • कैंपस का माहौल: चुनाव आयोग की कड़ी निगरानी के बीच सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

छात्रों के बीच चर्चा का विषय

पंजाब यूनिवर्सिटी के हॉस्टलों से लेकर डिपार्टमेंट्स की कैंटीन तक, हर तरफ इसी गठबंधन की चर्चा हो रही है। आम छात्र यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि इस सियासी समझौते का सीधा असर कल होने वाली वोटिंग पर कितना पड़ेगा। जहां एक तरफ समर्थक इस एकता को ऐतिहासिक बता रहे हैं, वहीं विरोधी खेमा इसे सिर्फ सत्ता हासिल करने की एक अवसरवादी चाल करार दे रहा है।

बहरहाल, मुकाबला बेहद रोमांचक हो चुका है और हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कल जब छात्र अपने मत का प्रयोग करेंगे, तो वे इस नए राजनीतिक समीकरण को कितना स्वीकार करते हैं। चुनाव के नतीजे ही तय करेंगे कि यह दांव किसके पक्ष में बैठेगा और कौन सा संगठन पीयू की सत्ता की चाबी अपने हाथ में लेगा।:

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

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अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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