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छत्तीसगढ़ कृषि विवि पेपर लीक मामला: प्रोफेसर ने 11 हजार में बेचा था पेपर, ऐसे खुला राज

छत्तीसगढ़ कृषि विवि पेपर लीक मामला: प्रोफेसर ने 11 हजार में बेचा था पेपर, ऐसे खुला राज

शिक्षा के मंदिर को कलंकित करने वाली एक हैरान करने वाली घटना छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सामने आई है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष का प्रश्न पत्र लीक होने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक निजी कॉलेज के प्रोफेसर समेत छह लोगों को दबोच लिया है। इस खुलासे ने अकादमिक जगत में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि जिस शिक्षक पर छात्रों के भविष्य को गढ़ने की जिम्मेदारी थी, वही सौदागर बन बैठा।

महज 36 घंटे के भीतर पुलिस ने सुलझाई गुत्थी

रायपुर पुलिस की साइबर सेल और अपराध शाखा ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए शिकायत मिलने के महज 36 घंटे के भीतर इस शातिर गिरोह का पर्दाफाश कर दिया। रायपुर की पुलिस उपायुक्त (अपराध एवं साइबर) स्मृति राजनाला ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और सोशल मीडिया ट्रेकिंग के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई।

गिरफ्तार आरोपियों में दुर्ग स्थित भारती एग्रीकल्चर कॉलेज के प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया (38) के अलावा पांच छात्र—अजय नायक (20), त्रिदेव पटेल (22), नितिन पांडेय (22), अनुज मिंज (22) और आदित्य साहू (20) शामिल हैं।

ऐसे हुआ था परीक्षा का पर्दाफाश

पूरा मामला 20 अगस्त का है। उस दिन सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच विश्वविद्यालय से जुड़े सभी 28 कृषि कॉलेजों में बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष, द्वितीय सेमेस्टर के 'एजीसीएच-221' यानी कीटशास्त्र (Entomology) विषय की परीक्षा होनी थी। लेकिन परीक्षा शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही सुबह करीब 8:41 बजे कवर्धा स्थित कृषि महाविद्यालय के ई-मेल पर प्रश्न पत्र लीक होने की सूचना पहुंच गई।

इसके तुरंत बाद सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर भी प्रश्न पत्र के पन्ने वायरल होने लगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक और स्नातक परीक्षा प्रकोष्ठ के प्रभारी डॉ. एन.आर. रंगारे ने तुरंत तेलीबांधा थाने में इसकी औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

मास्टरमाइंड प्रोफेसर की करतूत: सुई और धागे से रचा खेल

पुलिस जांच में जो खुलासे हुए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। इस पूरे षड्यंत्र का मुख्य मास्टरमाइंड प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया निकला, जो 2019 से दुर्ग के भारती एग्रीकल्चर कॉलेज में अपनी सेवाएं दे रहा था।

जांच में सामने आया कि पिछले एक साल से योगेश कॉलेज की कॉपियां विश्वविद्यालय में जमा कराने और वहां से आगामी परीक्षाओं के गोपनीय प्रश्न पत्र लाने का काम करता था। 17 अगस्त को जब वह रायपुर विवि आया, तो उसने कीटशास्त्र की परीक्षा का लिफाफे वाला बंडल भी अपने कब्जे में ले लिया।

  • लीक करने का नायाब और शातिर तरीका: प्रोफेसर योगेश ने परीक्षा का लिफाफा कॉलेज ले जाने के बजाय अपने घर पहुंचाया।
  • वहाँ उसने एक सुई और नुकीले औजार (सूजा) की मदद से लिफाफों में बहुत बारीकी से छेद किया।
  • इसके बाद मोबाइल के कैमरे से गोपनीय प्रश्न पत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली और वापस फेविकोल से लिफाफे को इस तरह चिपका दिया कि किसी को शक न हो।

मात्र 11 हजार रुपये में बेच दिया भविष्य

पवित्र पेशे को शर्मसार करते हुए प्रोफेसर ने इस गोपनीय प्रश्न पत्र को अपने ही कॉलेज के छात्र अजय नायक और दो अन्य छात्रों को मात्र 11,000 रुपये में बेच दिया। इसके बाद अजय नायक ने यह प्रश्न पत्र आगे अपने साथियों—त्रिदेव पटेल, नितिन पांडेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू तक पहुँचा दिया। देखते ही देखते यह पर्चा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2008 के तहत मामला दर्ज करना पड़ा।

पुलिस ने क्या-क्या किया बरामद?

साइबर सेल की टीमों ने रायपुर, दुर्ग, कबीरधाम और बिलासपुर में एकसाथ छापेमारी की। पुलिस ने आरोपियों के पास से निम्नलिखित सामग्रियां जब्त की हैं:

  • 11,000 रुपये नकद (जो पेपर बेचने से मिले थे)
  • घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन और वीडियो रिकॉर्डिंग उपकरण
  • केबल तार, मोबाइल कनेक्टर
  • सुई, सूजा, फेविकोल और कॉपियां

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क में कुछ और लोग भी शामिल हो सकते हैं। फिलहाल, दो अन्य फरार आरोपियों की तलाश तेजी से की जा रही है और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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तनु उपाध्याय

तनु उपाध्याय

Senior Sub Editor

तनु उपाध्याय एंटरटेनमेंट जगत की हलचल को करीब से समझती हैं और उसे दर्शकों के सामने आकर्षक अंदाज में पेश करती हैं। फिल्मों, टीवी, ओटीटी और वायरल ट्रे...

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