राजधानी दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में उस वक्त सनसनी फैल गई जब जंतर-मंतर पर हो रहे एक हाई-प्रोफाइल विरोध प्रदर्शन ने अचानक उग्र रूप ले लिया। एसआईआर (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर इकट्ठा हुए तमाम राजनीतिक दलों के दिग्गजों और कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लेना शुरू कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता आतिशी और आम आदमी पार्टी के अन्य प्रमुख चेहरों के साथ-साथ आम आदमी पार्टी (या संबंधित दल) के नेता अनुराग ढांडा को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया, जिससे मौके पर तनाव और बढ़ गया।
जंतर-मंतर पर सुबह से ही बढ़ा था पारा
शुक्रवार को सुबह से ही जंतर-मंतर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए गए थे। पिछले कुछ दिनों से लगातार उठ रहे राजनीतिक सवालों और चुनावी तंत्र पर लग रहे गंभीर आरोपों के बीच विभिन्न नेताओं और कार्यकर्ताओं ने यहां जुटना शुरू कर दिया था। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि जब तक एसआईआर के मुद्दे पर निष्पक्षता और सीईसी के इस्तीफे को लेकर स्पष्ट कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा।
हालाँकि, दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी। बैरिकेडिंग को पार करने की कोशिश कर रहे कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोक भी देखने को मिली।
प्रमुख नेताओं की डिटेंशन से गरमाई सियासत
विरोध प्रदर्शन के दौरान जैसे ही स्थिति बेकाबू होने लगी, पुलिस ने ऐक्शन लेते हुए बड़े नेताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। आतिशी और अनुराग ढांडा समेत कई अन्य प्रमुख नेताओं को पुलिस ने अपनी गाड़ियों में बैठाकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाना शुरू किया। इस कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और सरकार तथा चुनाव आयोग के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार किया।
- मुख्य मांगें: एसआईआर और सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा।
- प्रमुख कार्रवाई: दिल्ली पुलिस द्वारा आतिशी, अनुराग ढांडा और सौरभ भारद्वाज (संभावित) सहित कई नेताओं को हिरासत में लिया जाना।
- मौजूदा स्थिति: जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है।
पुलिस और प्रशासन का पक्ष
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जंतर-मंतर पर इस प्रदर्शन के लिए किसी भी तरह की पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी या फिर तय नियमों का उल्लंघन किया जा रहा था। शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखना और आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बिना अनुमति के भीड़ जुटाने और सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने के प्रयासों के चलते ही यह प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू
इस पूरी घटना के बाद से राष्ट्रीय राजधानी की राजनीति में उबाल आ गया है। विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक देश में अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार हर नागरिक को है, लेकिन सरकार पुलिस के दम पर हर आवाज को दबाना चाहती है। वहीं, दूसरी ओर शासक दल के प्रवक्ताओं का तर्क है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पूरी सख्ती से की जाएगी।
आगे क्या हो सकता है?
हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा किए जाने को लेकर थाने के बाहर और विभिन्न राजनीतिक दफ्तरों में बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि चुनाव आयोग और एसआईआर से जुड़े सवाल पहले से ही राष्ट्रीय पटल पर बहस का केंद्र बने हुए हैं।
जंतर-मंतर पर हुई इस ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर से राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक टकराव को सुर्खियों में ला दिया है। पल-पल बदलते इस घटनाक्रम की हर अपडेट पर हमारी पैनी नजर बनी हुई है।