वित्तीय जगत में सनसनी फैला देने वाले एक बड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने 30 सितंबर 2026 को तायल ग्रुप (Tayal Group) से जुड़े बैंक फ्रॉड और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) की प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग के मामले में देश भर में 12 अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। यह पूरी कार्रवाई दो अलग-अलग ईसीआईआर (ECIR) में दर्ज मामलों के आधार पर की जा रही है, जिसमें कुल 820.86 करोड़ रुपये की भारी-भरकम 'अपराध से अर्जित आय' (Proceeds of Crime) की पहचान की गई है।
दो अलग-अलग मामलों में दर्ज हुआ फ्रॉड का जाल
जांच एजेंसी के दस्तावेजों के मुताबिक, इस पूरे घोटाले की जड़ें दो प्रमुख बैंक घोटालों से जुड़ी हैं। पहला मामला यूको बैंक (UCO Bank) से जुड़ा हुआ है, जिसमें लगभग 296.25 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड का आरोप है। इस मामले में मुख्य रूप से एम/एस के. लाइफस्टाइल एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (M/s K. Lifestyle & Industries Ltd.) और अन्य को आरोपी बनाया गया है।
वहीं, दूसरा मामला बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) को लीड बैंक बनाकर बनाए गए वित्तीय कंसोर्टियम से जुड़ा है। इसमें करीब 524.61 करोड़ रुपये के कथित फर्जीवाड़े की बात सामने आई है। इस दूसरे मामले के दायरे में एम/एस एक्टिव कॉरपोरेशन लिमिटेड (M/s Actif Corporation Ltd.) और एम/एस जयभारत टेक्सटाइल एंड रियल स्टेट लिमिटेड (M/s Jaybharat Textiles & Real Estate Ltd.) जैसी कंपनियां शामिल हैं।
फर्जी घोषणाएं और शेल कंपनियों का खेल
शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि समूह की इन कंपनियों ने बैंकों से फंड हासिल करने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया। कंपनियों ने अपनी उत्पादन क्षमता और प्लांट में लगी मशीनरी को लेकर फर्जी घोषणाएं कीं। इसके अलावा, स्टॉक स्टेटमेंट में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया और बैंकों के पास गिरवी रखी गई भारी-भरकम मशीनरी को बिना किसी आधिकारिक अनुमति के चुपचाप बेच दिया गया।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि बैंकों से निकाले गए धन को प्रमोटरों द्वारा नियंत्रित शेल (फर्जी) कंपनियों के जटिल जाल के जरिए अलग-अलग खातों में घुमाया गया और अंततः इसे रियल एस्टेट संपत्तियों में निवेश कर दिया गया। इसी कड़ी में नागपुर का चर्चित 'एम्प्रेस मॉल' (Empress Mall) भी जांच की आगोश में आया, जिसे बाद में ED ने अपने कब्जे में लेते हुए अटैच कर दिया था।
IBC प्रक्रिया के दुरुपयोग की परतें
मामले में नया मोड़ तब आया जब 8 मई 2019 को एम्प्रेस मॉल अटैचमेंट का आदेश जारी हुआ। इसके कुछ ही समय बाद, एम/एस केएसएल एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (M/s KSL & Industries Ltd.) के कॉरपोरेट गारंटर के खिलाफ IBC की धारा 7 के तहत कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) शुरू करवा दी गई। हैरानी की बात यह है कि यह प्रक्रिया उन वित्तीय लेनदारों द्वारा शुरू कराई गई थी, जिनके संबंध तायल ग्रुप से बेहद गहरे और करीबी बताए जा रहे हैं।
एजेंसी की छानबीन में यह तथ्य उजागर हुआ कि इन कथित लेनदार कंपनियों के कम से कम आठ निदेशकों के तार एम/एस केएसएल एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के पांच निदेशकों से जुड़े हुए थे। ED का स्पष्ट आरोप है कि कागजों पर दिखाए गए ये तमाम कर्ज असल में कोई वास्तविक व्यावसायिक लेनदेन नहीं थे, बल्कि इन्हें सुनियोजित तरीके से किसी अन्य गुप्त उद्देश्य को साधने के लिए गढ़ा गया था।
कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) के समीकरणों में बदलाव
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे षड्यंत्र में रेजोल्यूशन प्रोफेशनल्स (RP) की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि आरपी ने प्रमोटर से जुड़ी शेल कंपनियों के उन दावों को आंख मूंदकर स्वीकार कर लिया, जिनका कोई ठोस और पर्याप्त सत्यापन नहीं किया गया था। इन दावों में भारी-भरकम ब्याज जोड़कर रकम को और अधिक बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।
इसका सीधा परिणाम यह हुआ कि इन शेल कंपनियों को कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) में भारी-भरकम बहुमत और वोटिंग अधिकार मिल गए, जिसके चलते असली और सुरक्षित बैंकों (Secured Creditors) की हिस्सेदारी और उनकी ताकत सिमटकर अल्पमत में चली गई। इससे बैंकों का कानूनी नियंत्रण कमजोर हुआ और PMLA के तहत की गई कानूनी कार्रवाई को अदालतों में चुनौती देने का रास्ता तैयार किया गया.
अदालतों में तथ्यों को छिपाने का आरोप
ED का यह भी दावा है कि अंतरिम और रेजोल्यूशन प्रोफेशनल्स (RP) ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई संपत्ति कुर्की को हटवाने के लिए विभिन्न अदालतों में आवेदन दाखिल किए। इन अर्जियों में अदालतों के सामने कई प्रतिकूल आदेशों और नागपुर के एम्प्रेस मॉल पर ED द्वारा लिए गए भौतिक कब्जे जैसे अहम तथ्यों को पूरी तरह से छिपाया गया या गोलमोल कर दिया गया।
NCLT और IBBI की सख्त कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने भी रेजोल्यूशन प्रोफेशनल्स के आचरण पर गंभीर टिप्पणियां की हैं और उनकी कार्यप्रणाली पर कड़े कदम उठाए हैं।
- M/s KSL & Industries Ltd. के RP: सीए किरण चिनुभाई शाह (CA Kiran Chinubhai Shah) की भूमिका पर दावों के सत्यापन में गंभीर खामियां पाई गईं।
- M/s Actif Corporation Ltd. के RP: विनोदकुमार पुखराज आंबावत (Vinodkumar Pukhraj Ambavat) पर NCLT ने 11 नवंबर 2025 को 50,000 रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया था।
- M/s Jaybharat Textiles & Real Estate Ltd. के RP: नरेन शेठ (Naren Sheth) के खिलाफ भारतीय दिवाला और दिवालियापन बोर्ड (IBBI) की अनुशासनात्मक समिति ने कथित कदाचार के मामले में निलंबन की बड़ी कार्रवाई की है।
फिलहाल, ED द्वारा की जा रही इन ताजा छापों से वित्तीय अनियमितताओं में लिفت कॉर्पोरेट जगत में हड़कंप मच गया है। जांच एजेंसियां इस बात की टटोल कर रही हैं कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।