LIVE 24x7 शुक्रवार, 06 नवंबर 2026
संस्करण: राष्ट्रीय / उत्तर प्रदेश Google News Follow
बड़ी ख़बरें
► iPhone 18 Pro से ऐसे खींचें बेहतरीन दिवाली तस्वीरें और वीडियो ► विराट कोहली के खिलाफ खेलना शानदार अनुभव: ब्लेयर टिकनर ► अमेरिकी विमानन प्राधिकरण 2028 तक बंद करेगा फ्लॉपी डिस्क का इस्तेमाल ► राजस्थान के झालावाड़ में देह व्यापार रैकेट का भंडाफोड़, 6 नाबालिग लड़कियां रेस्क्यू ► अयोध्या दीपोत्सव 2026: 30 लाख दीयों से सजेगी राम की पैड़ी, आज से कड़े सुरक्षा पहरे में सील ► वाराणसी में सड़क हादसे के बाद शव रखकर जाम लगाने पर 47 लोगों पर FIR दर्ज ► वाराणसी: अमेरिकी डॉलर का लालच देकर ठगी करने वाले तीन शातिर लुटेरे 24 घंटे में गिरफ्तार ► मोकामा विधायक अनंत सिंह का काफिला प्रयागराज रवाना, बक्सर में समर्थकों ने पहनाया चांदी का मुकुट ► कम समय में अमीर बनने का शॉर्टकट युवाओं के लिए बन रहा गंभीर कानूनी खतरा ► काशी में धनतेरस पर खुले मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी दरबार के कपाट ► iPhone 18 Pro से ऐसे खींचें बेहतरीन दिवाली तस्वीरें और वीडियो ► विराट कोहली के खिलाफ खेलना शानदार अनुभव: ब्लेयर टिकनर ► अमेरिकी विमानन प्राधिकरण 2028 तक बंद करेगा फ्लॉपी डिस्क का इस्तेमाल ► राजस्थान के झालावाड़ में देह व्यापार रैकेट का भंडाफोड़, 6 नाबालिग लड़कियां रेस्क्यू ► अयोध्या दीपोत्सव 2026: 30 लाख दीयों से सजेगी राम की पैड़ी, आज से कड़े सुरक्षा पहरे में सील ► वाराणसी में सड़क हादसे के बाद शव रखकर जाम लगाने पर 47 लोगों पर FIR दर्ज ► वाराणसी: अमेरिकी डॉलर का लालच देकर ठगी करने वाले तीन शातिर लुटेरे 24 घंटे में गिरफ्तार ► मोकामा विधायक अनंत सिंह का काफिला प्रयागराज रवाना, बक्सर में समर्थकों ने पहनाया चांदी का मुकुट ► कम समय में अमीर बनने का शॉर्टकट युवाओं के लिए बन रहा गंभीर कानूनी खतरा ► काशी में धनतेरस पर खुले मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी दरबार के कपाट

वैश्विक मंच पर दीपावली और होली की बढ़ती स्वीकार्यता, पिछले दो दशकों में ऐसे बदली तस्वीर

वैश्विक मंच पर दीपावली और होली की बढ़ती स्वीकार्यता, पिछले दो दशकों में ऐसे बदली तस्वीर
अपडेटेड: Fri, 06 Nov 2026 07:40 AM
📌 बड़ी बातें (Key Highlights)

जानिए पिछले 20 वर्षों में दिवाली और होली जैसे भारतीय त्योहारों ने कैसे दुनिया भर में सांस्कृतिक पहचान बनाई और यूनेस्को की सूची तक का सफर तय किया।

पिछले दो दशकों में प्रवासी समुदायों के प्रयासों और यूनेस्को की ऐतिहासिक मान्यता के चलते दीपावली और होली जैसी भारतीय संस्कृति के प्रतीक पर्व अब दुनिया भर में सार्वजनिक उत्सवों का हिस्सा बन चुके हैं।

कभी भारतीय त्योहारों को विदेशों में रहने वाले प्रवासी परिवारों और उनके सामुदायिक केंद्रों तक ही सीमित माना जाता था। दीपावली हो या होली, इनका उल्लास मुख्य रूप से भारतीय मूल के लोग अपने घरों या मंदिरों के भीतर ही मनाते थे। लेकिन पिछले दो दशकों यानी वर्ष 2006 से 2026 के बीच इस तस्वीर में बड़ा बदलाव आया है। आज ये पर्व दुनिया के कई देशों में आधिकारिक सांस्कृतिक कैलेंडर का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं, जहां स्थानीय प्रशासन, स्कूल, कारोबारी संस्थान और विभिन्न देशों के नागरिक भी बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं।

घरों और मंदिरों से निकलकर सड़कों तक पहुंचे उत्सव

विगत 20 वर्षों में दीपावली की वैश्विक पहचान में सबसे बड़ा बदलाव इसके सार्वजनिक और व्यापक आयोजनों के रूप में सामने आया है। ब्रिटेन का लीसेस्टर शहर इसका एक बड़ा उदाहरण है, जहां वर्ष 1983 में कुछ रोशनियों के साथ शुरू हुआ उत्सव आज दुनिया के सबसे बड़े दिवाली समारोहों में शुमार है। अब इस शहर में लगभग दो सप्ताह तक सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत, नृत्य और रोशनी के भव्य आयोजन होते हैं। लीसेस्टर सिटी काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, वहां दिवाली से जुड़े करीब 50 अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा अमेरिका में भी सांस्कृतिक स्वीकार्यता का दायरा लगातार विस्तृत हुआ है, जहां न्यूयॉर्क शहर में दक्षिण एशियाई समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद वर्ष 2023 में पहली बार दिवाली के अवसर पर सरकारी स्कूलों में आधिकारिक अवकाश घोषित किया गया। यह निर्णय अमेरिकी समाज में भारतीय मूल के लोगों की बढ़ती सांस्कृतिक उपस्थिति को रेखांकित करता है।

वैश्विक स्तर पर बदलती सांस्कृतिक सोच

इन त्योहारों को लेकर दुनिया के नजरिये में एक और अहम बदलाव यह आया है कि अब इन्हें केवल एक धार्मिक या क्षेत्रीय पर्व के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि रोशनी, उम्मीद, भाईचारे और सकारात्मकता के वैश्विक सांस्कृतिक उत्सव के तौर पर अपनाया जाने लगा है। ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर जैसे देशों में होने वाले सार्वजनिक आयोजनों में अब गैर-भारतीय नागरिकों की भागीदारी भी प्रचुर मात्रा में देखी जाती है। कई देशों के विद्यालयों में बच्चों को दिवाली की कहानियों, रंगोली बनाने की कला, दीयों के महत्व और भारतीय परंपराओं से परिचित कराया जाता है। वहीं मलेशिया, मॉरीशस, फिजी और सिंगापुर जैसे देशों में दिवाली लंबे समय से सार्वजनिक जीवन का अभिन्न अंग रही है, जहां भारतीय समुदायों की ऐतिहासिक मौजूदगी ने इसे स्थानीय संस्कृति के साथ गहराई से जोड़ दिया है।

होली ने भी बनाई अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान

दीपावली की तर्ज पर ही होली की लोकप्रियता ने भी भारत की भौगोलिक सीमाओं को पार किया है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और यूरोप के तमाम शहरों में अब होली के सार्वजनिक आयोजन, रंगोत्सव और सांस्कृतिक मेलों का आयोजन होता है। हालांकि विदेशों में होने वाले सभी होली उत्सव पारंपरिक रूप से धार्मिक नहीं होते, बल्कि कई आयोजन संगीत, रंगों, नृत्य और भारतीय खानपान पर आधारित सामुदायिक उत्सव के रूप में आयोजित किए जाते हैं। इससे उन लोगों को भी भारतीय संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है, जिनका भारत या यहां के समुदायों से कोई प्रत्यक्ष पारिवारिक संबंध नहीं रहा है।

प्रवासी समुदाय और यूनेस्को की मुहर

इस पूरे सांस्कृतिक रूपांतरण के पीछे विदेशों में बसे भारतीय प्रवासियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने न केवल अपनी परंपराओं को जीवित रखा, बल्कि उन्हें नई पीढ़ियों और स्थानीय समाजों तक भी पहुंचाया। इसी कड़ी में दिसंबर 2025 का महीना भारतीय संस्कृति के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित हुआ, जब संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने दीपावली को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में अधिकारिक तौर पर शामिल किया। इस मान्यता ने दीपावली को केवल एक धार्मिक उत्सव के दायरे से बाहर निकालकर सामाजिक परंपराओं, पारिवारिक रिश्तों और सामुदायिक एकता के वैश्विक प्रतीक के रूप में स्थापित कर दिया है। हालांकि दुनिया के हर कोने में स्थिति एक जैसी नहीं है और कुछ स्थानों पर आतिशबाजी तथा सार्वजनिक आयोजनों को लेकर अपनी स्थानीय चुनौतियां भी हैं, फिर भी बीते दो दशकों में भारतीय त्योहारों की वैश्विक दृश्यता ने यह साबित कर दिया है कि अब भारतीय संस्कृति केवल सीमाओं में नहीं बंधी है।

About the Author

अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

Content Writer

अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

Read More

ज़रूर पढ़ें (You May Also Like)

अगली खबर पढ़ें:

आगे पढ़ें →