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हैदराबाद में एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मानव श्रृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन

हैदराबाद में एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मानव श्रृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन

हैदराबाद के टैंक बंड पर एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नागरिकों का प्रदर्शन

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में शनिवार शाम को हुसैन सागर झील के पास टैंक बंड पर सैकड़ों लोगों ने एक मानव श्रृंखला बनाकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के दौरान ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे गूंजे और प्रतिभागियों ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को तुरंत रद्द करने की मांग उठाई। इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने और सीईसी अधिनियम, 2023 को वापस लेने की भी मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सूची से हटाए गए सभी मतदाताओं के नाम तुरंत बहाल किए जाएं, क्योंकि उनका दावा है कि इस एसआईआर प्रक्रिया के कारण तेलंगाना के लगभग आधे मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।

व्यापक पैमाने पर मतदाता सूची से नाम हटाने का आरोप

हाथों में तिरंगा थामे और बड़े पैमाने पर मताधिकार छीने जाने के खिलाफ नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर केंद्र सरकार के एजेंट के रूप में काम करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के अन्य दो आयुक्तों ने पिछले एक साल के दौरान 14 औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। एक प्रदर्शनकारी ने आंकड़े देते हुए कहा कि पूरे देश में कथित तौर पर 13.4 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटाए जा चुके हैं, जिससे यह साफ होता है कि एसआईआर मतदाता सत्यापन की प्रक्रिया न होकर बड़े पैमाने पर नाम काटने का अभियान बन गया है।

विभिन्न संगठनों की सहभागिता और एसआईआर पर सवाल

यह विरोध प्रदर्शन नागरिक समाज, मानवाधिकार संगठनों, किसान संगठनों, दलित समूहों, युवा और छात्र संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इसमें बड़ी संख्या में छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, पेशेवर और कामगार शामिल हुए। प्रतिभागियों ने एसआईआर की उपयोगिता और औचित्य पर कड़े सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इससे तेलंगाना के लगभग आधे मतदाताओं के नाम सूची से कट सकते हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में 73 लाख नाम हटाए जा चुके हैं और 93 लाख लोगों को 'संदिग्ध' मतदाता बताते हुए नोटिस जारी किए गए हैं, जो पूरे देश में सबसे बड़ा अनुपात है। उन्होंने इस प्रक्रिया को ऐसा मामला बताया जिसमें सरकार यह तय कर रही है कि उसके मतदाता कौन होंगे, न कि मतदाता यह चुन रहे हैं कि उनकी सरकार कौन बनाएगी।

शांतिपूर्ण प्रतिरोध और पुलिस कार्रवाई की निंदा

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि देश भर के युवा एसआईआर के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रतिरोध का नेतृत्व कर रहे हैं और तेलंगाना भी इस आंदोलन का एक अहम हिस्सा है। उन्होंने विशेष रूप से दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का एक अचूक संवैधानिक अधिकार है। अक्टूबर महीने के दौरान हैदराबाद में एसआईआर के खिलाफ कई विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं, जिसमें एक सार्वजनिक सुनवाई भी शामिल थी जहां इस प्रक्रिया से प्रभावित लोगों ने एक पैनल के सामने अपनी आपबीती साझा की थी। प्रतिभागियों का कहना था कि इस पूरी प्रक्रिया ने लाखों नागरिकों, विशेषकर महिलाओं, कामकाजी गरीबों, अल्पसंख्यकों और ट्रांसजेंडर समुदाय को गहरा मानसिक आघात पहुंचाया है, साथ ही बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) पर काम का बोझ भी काफी बढ़ा दिया है।

सीईसी अधिनियम 2023 पर सवाल और आगामी कार्ययोजना

प्रदर्शनकारियों ने सीईसी अधिनियम, 2023 की भी तीखी आलोचना की और कहा कि इस कानून ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में निष्पक्षता को कमजोर किया है और उन्हें व्यापक कानूनी संरक्षण या छूट प्रदान की है। आयोजकों की ओर से हैदराबाद और पूरे तेलंगाना में कथित बड़े पैमाने पर मतदाता सूची से नाम हटाने के मामलों से संबंधित पर्चे बांटे गए। उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक एसआईआर को पूरी तरह से रद्द नहीं किया जाता, तब तक इस अभियान को पूरे राज्य में और अधिक तीव्र किया जाएगा। आधिकारिक जानकारी के अनुसार वर्तमान में तेलंगाना में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है और इसके तहत अंतिम मतदाता सूचियों का प्रकाशन आगामी 9 नवंबर को किया जाना है।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

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अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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